माओवादियों का दावा-मुठभेड़ फर्ज़ी, अब भी कई ग्रामीणों को फ़ोर्स ने कर रखा है अगवा

मुठभेड़ फर्ज़ी बता 13 अगस्त को किया सुकमा बंद का एलान

रायपुर। नक्सलियों ने 6 अगस्त को हुई मुठभेड़ को फ़र्ज़ी करार दिया है। उन्होंने दावा किया है कि ये पूरी मुठभेड़ फ़र्ज़ी है। फ़ोर्स ने ग्रामीणों को पहले अगवा किया उनमे से 15 लोगो को मौत के घाट उतर दिया। माओवादियों ने ये भी कहा कि तीन महिलाओं से बलात्कार भी हुआ है। एक कथित पर्चे के मार्फ़त इस बात का भी दावा किया है कि अब भी कई ग्रामीण फ़ोर्स की गिरफ़्त में है। जिन्हे फ़ोर्स ने ज़बरिया अगवा कर रखा है। इस पुरे मामलें में नक्सलियों की दक्षिण बस्तर कमेटी की तरफ़ 13 अगस्त को सुकमा बंद का एलान किया है।

फर्ज़ी मुठभेड़
गौरतलब है कि 6 अगस्त को राज्य पुलिस डीआरजी और एसटीएफ के जवानों ने तड़के सुबह तक़रीबन 6 बजे नक्सलियों से मुठभेड़ होने का दवा किया था। इस मुठभेड़ में उन्होंने 15 नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया था। जिनमें एक नक्सली कमांडर की गिरफ्तारी की पुष्टि एडीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी और सुकमा एसपी बीएन मीणा ने की थी। इसी मुठभेड़ का एक कथित वीडियों भी कल शाम वायरल हुआ था। जिसमे नक्सलियों के शव और जवानों की आवाज़ सुनाई आ रही है। जिसके बाद आज सुबह नक्सलियों ने पर्चे फेंककर इस मामलें में पुलिसिया कार्यवाही को फ़र्ज़ी बताया है।

ये है नक्सलियों का कथित पर्चा…

आम जनता पर कथित फर्जी नरसंहार का खंडन करें।
13 अगस्त को सुकमा जिला बंद का सफल करें।

प्यारे जनता,
नक्सली उन्मूलन के नाम पर समाधान के तहत ऑपरेशन ग्रीन हंट 2018-22 तक खत्म करने का उद्देश्य से भाजपा ब्राह्मणीय हिंदू, फासीवादी मोदी, राजनाथ सिंह, रमन सिंह गिरोह के नेतृत्व में किराया गुंडों द्वारा अंदरूनी इलाकों में आम जनता पर योजनाबद्ध तरीके से गांवों में दिनदहाड़े हमला करना, हत्या करना, अत्याचार करना, गिरफ्तार करने, झूठे केसों में जेल डालना, महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार करना, जनता का धन माल को लूटना आम बात हो गई है। 3 दिन विशेष अभियान के नाम से कोंटा, भेज्जी, गोलापल्ली कैंप से 5 अगस्त को समन्वय के साथ 200 से ज्यादा पुलिस ने नुलकातोंग, वेलपोस्सा, गोमपाड़, किंदेमपाड़, कन्नाईपाड़ गाँवों को घेर लिया। घेराबंदी कर 50 से ज्यादा ग्रामीणों को बंदी बनाकर अपने साथ ले गए। दूसरे दिन 6 अगस्त को नुलकातोंग पहाड़ी के पास ले जा कर सुबह 6:00 बजे 15 निशस्त्र ग्रामीणों को हाथ पैर बांधकर अंधाधुंध फायरिंग कर निर्मम हत्या किए। कुछ लोग अभी भी पुलिस के कब्जे में है। कई लोग लापता और घायल भी हैं।
                                 

                                           इस घटना को पुलिस अफसरों ने पौने दो घंटा फायरिंग होने का बढ़ा चढ़ाकर बड़ा सफलता की मनगढ़ंत कहानी मीडिया में प्रचार करवा रहे हैं। यह सरासर झूठ है।
                                     

                        27 से 30 जुलाई तक लगातार अभियान के लिए पामेड़, चिंतागुफा, कैम्पों से आए पुलिस गुंडों द्वारा मड़कागुडेय, दुलेड, एर्रापल्ली, मेट्टागुड़ा, राशपल्ली, बोटेंतोंग गांव में हमला करके मेट्टागुड़ा की 3 महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। 6 अगस्त को बड़े केड़वाल, टोन्डामरका गांव पर हमला करके जनता की धन माल लूट लिए।
 

                                इन सभी कथित फर्जी नरसंहार को खंडन करते हुए आम जनता, लोकतंत्र वादियों, प्रगतिशील बुद्धिजीवियों, आदिवासी हितैषियों, आदिवासी सामाजिक संगठनों, छात्रों, मजदूरों से अपील करते हैं कि इस कथित नरसंहार को घोर निंदा करते हुए 13 अगस्त को सुकमा जिला एक दिन का बंद को सफल करें।

माकपा (माओवादी)
                                                                                               दक्षिण बस्तर डिवीज़न कमेटी

सुकमा एसपी ने किया खारिज़
इधर नक्सलियों के इस पर्चे के बारे में जब सुकमा एसपी से चर्चा की गई तब उन्होंने नक्सलियों के सारे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे माओवाद के छद्म युद्ध का एक पैतरा करार दिया है। सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने कहा कि इस पर्चे से नक्सली केवल इसे पुलिस का मनोबल तोड़ने की असफल कोशिश करते है। नक्सलियो की ओर से जारी पर्चा झूठ के अलावा कुछ नही है,उसमें दिया ब्यौरा गलत है। उन्होंने कहा कि यह मुठभेड़ थी और मिलिशियाई कैडर से हमारे जवान भिड़े थे। जिसके हर तथ्य हमारे पास हैं। उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसे आरोपो में कोई सच्चाई नही है।

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