मनोविकार बनकर गंभीर चिंता एवं चुनौती बन रही कोरोना

कोरोना मनोविकार बनकर अवसाद, दहशत, तनाव, हताशा, निराशा, कुण्ठा, डर, भय पैदा करने लगी है

 

जिन लोगों की इच्छाशक्ति, संकल्पशक्ति या आत्मबल सामान्यतया औसत या इससे कम होती है, उनके मन में कोरोना मनोविकार बनकर अवसाद, दहशत, तनाव, हताशा, निराशा, कुण्ठा, डर, भय पैदा करने लगी है जिससे बहुत से लोग ख़ुदकुशी तक करने लगे हैं। यह स्थिति बहुत भयावह एवं पीड़ादायक है कि इस आत्महत्या में अधिकतर नौजवान हैं, जिन पर उनके पूरे परिवार का उत्तरदायित्व था।

-डा. लखन चौधरी

कोविड-19 कालखण्ड की अनगिनत त्रासदियों के बीच कोरोना अब ’अछूत बीमारी’ के तौर पर आम लोगों की मानसिक बीमारी बनती जा रही है या कहें कि बन चुकी है। मनुष्यों में मनोविकार उत्पन्न करके तमाम तरह की चिंताओं, कठिनाईयों, समस्याओं, विपत्तियों एवं चुनौतियों को बढ़ाते हुए जीवन में ज़हर घोलने लगी है।

वैसे तो मनुष्य का स्वभाव होता है कि वह छोटी-मोटी चिंताओं, कठिनाईयों, समस्याओं, विपत्तियों एवं चुनौतियों से डरता, घबराता नहीं है, लेकिन इन दिनों कोरोना के कारण सामाजिक माहौल एवं वातावरण कुछ अधिक ही ज़हरीला एवं विषाक्त होता जा रहा है। दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्णं यह है कि कोरोना की दूसरी लहर अब समाज की कार्यशील आबादी को ग्रसने और डसने लगी है।

जिन लोगों की इच्छाशक्ति, संकल्पशक्ति या आत्मबल सामान्यतया औसत या इससे कम होती है, उनके मन में कोरोना मनोविकार एवं मनोविकृति बनकर अवसाद, दहशत, तनाव, हताशा, निराशा, कुण्ठा, डर, भय पैदा करने लगी है जिससे बहुत से लोग ख़ुदकुशी तक करने लगे हैं। यह स्थिति बहुत भयावह एवं पीड़ादायक है कि इस आत्महत्या में अधिकतर नौजवान हैं, जिन पर उनके पूरे परिवार का उत्तरदायित्व था।

पिछले कुछ दिनों से कोरोना मरीजों में मनोविकार जनित  आत्महत्याओं की खबरें लगातार आ रहीं हैं। कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों एवं इससे जुड़ी समस्याओं एवं चिंताओं से विचलित एवं परेशान होकर बहुत से स्वस्थ नागरिक ख़ुदकुशी जैसे कदम उठाने को विवश हो रहे हैं, तो यह केवल उनके परिवार की चिंता नहीं है। यह पूरे समाज एवं सरकार की बड़ी चिंता एवं चुनौती है, जिस पर गंभीर विमर्श की तत्काल आवश्यकता है। खबर है कि छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर संभागों के विभिन्न जिलों में पिछले सप्ताह ही दर्जन भर से अधिक कोरोना पीड़ित या सक्रंमित लोगों ने ख़ुदकुशी की है।

मनोविकार बनकर गंभीर चिंता एवं चुनौती बन रही कोरोनारोजी-रोटी, कॅरियर का डर, भविष्य की चिंता अब इस कदर लोगों को दहशत और अवसाद में ले जा रही है कि वे अपनी जिंदगी तक दांव पर लगाने को उतारू हो रहे हैं। देश के किसानों एवं नौजवानों के बाद कोरोना मरीजों की इस तरह की आत्महत्याएं सरकारों के लिए लिए भी चिंताजनक है।

आने वाले समय में यह सवाल सरकारों के लिए भी मुसीबत खड़ा कर सकती है कि आखिर सरकारें इस तरह के माहौल लिए कहां तक एवं कितनी जिम्मेदार हैं ? अब सरकारों के लिए कागजी खानापूर्ति कर तमाशा देखना भारी पड़ सकता है।

चिंतन की वजह यह भी है कि हमलोग कितनी बेरहम, दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्णं कालखण्ड में जीने को विवश हैं, और इन अप्राकृतिक, अनैतिक एवं अनहोनी घटनाओं के साक्षी एवं गवाह बनते जा रहे हैं। सरकारों की कायरतापूर्णं घड़ियाली आंसूओं का सैलाब हमारे जनप्रतिनिधियों को तनिक भी शर्मसार नहीं कर रहा है। तथाकथित आधुनिक समाज की इससे बड़ी विडम्बना, विसंगति, विकृति एवं विरोधाभास और क्या हो सकती है ?

दरअसल में कोरोना संक्रमण एवं मौत के आंकड़ों एवं घटनाओं को भयावह स्वरूप देने में या देने के लिए मीडिया की भूमिका की भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। सोशल एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया इस तरह की घटनाओं को हवा देने में बहुत हद तक जिम्मेदार है। इस समय घटनाओं के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर विचार करते हुए लोगों का साहस एवं हौसला बढ़ाने की अधिक आवश्यकता है।

मनोविकार बनकर गंभीर चिंता एवं चुनौती बन रही कोरोना

जनमानस को इस समय मनोविकार से निकालने के लिए सकारात्मक सोच एवं प्रेरणाओं के साथ अभिप्रेरित करना होगा। जिंदगियांे को किसी भी कीमत पर बचाना, इस पीढ़ीयांे को अवसाद से निकालना बेहद जरूरी है। जीवन में अक्सर निर्णय लेने की क्षमता की कमी के कारण या निर्णय लेने में विलंब के कारण या निर्णय नहीं ले सकने-पाने के कारण या गलत निर्णय के कारण व्यक्ति के जीवन में अवसाद, निराशा, तनाव, कुण्ठा, हताशा जन्म लेती है, और व्यक्ति अपनी योग्यताओं, क्षमताओं का उपयोग नहीं कर पाता है। जीवन उबाऊ एवं बोझिल बन जाता है, अंततः आत्महत्या का विचार मन में घर करता जाता है। इसलिए सही समय पर उचित सलाह बेहद जरुरी है।

संघर्षपूर्णं जीवन के लिए जान की बाजी लगा देना कतई उचित नहीं माना जाता है। जीवन की तमाम मानसिक बाधाओं, चिंताओं, निराशाओं, नकारात्मकताओं के बावजूद सकारात्मकता, रचनात्मकता एवं सर्जनात्मकता का दामन थामना ही होगा, तभी जीवन को सार्थकता मिल सकेगी। जीवन को समाप्त करने के बजाय जीवन को जीने का जोखिम लेने का वक्त है।

याद रहे, इतिहास संघर्षों से बनता है। प्रकृति की जोखिमों को वहन करने की योग्यता, क्षमता एवं दक्षता के लिए साहस, संघर्ष एवं पुरूषार्थ की दरकार होती है। प्रकृति जब कठिनाईयां बढ़ाती है तो बुद्धि भी बढ़ाती है। कोरोना इससे बढ़कर अधिक नहीं है।

कोरोना प्रकृति प्रदत्त आपदा है, जिसका समूचे मनुष्य समुदाय को मिलकर मुकाबला करना है। कोरोना ने निश्चित तौर पर इस समय जीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, लेकिन इसका तात्पर्य यह कतई नहीं है कि इसके बाद धरती, प्रकृति खत्म हो जायेगी। जिंदगी में कभी भी एक आसान जीवन के लिए प्रार्थना न करें, बल्कि एक चुनौति भरे जीवन को निभा पाने की शक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।

यकीनन, कोरोना इस समय एक तरह से अछूत महामारी का रूप धारण कर चुकी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसका कोई ईलाज, उपाय, निदान नहीं है। समय, प्रकृति सब कुछ ठीक देते हैं, दुनिया कोरोना से भी अवश्य मुक्त होगी। इसके लिए धेर्य, साहस, आत्मबल एवं आत्मविश्वास की जरूरत है।

मनोविकार बनकर गंभीर चिंता एवं चुनौती बन रही कोरोना

संयमित, सावधान, अनुशासित एवं जिम्मेदार जीवनशैली को जीवन में स्थान दीजिए और मनोविकार से निकलिए । दुनिया कुछ ही समय बाद फिर से पूर्ववत हो जायेगी, तब तक जीवन को बचा कर रखिये। जीवन को कोरोना की आहुति देने के बजाय जिंदगी को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सार्थक एवं उद्देश्यपूर्णं कार्योे में लगाईये, कोरोना का भय खत्म हो जायेगा।

(लेखक; प्राध्यापक, अर्थशास्त्री, मीडिया पेनलिस्ट, सामाजिक-आर्थिक विश्लेषक एवं विमर्शकार हैं) 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति desh tv उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार desh tv के नहीं हैं, तथा desh tv उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

 

संबंधित पोस्ट

Video:नये राजभवन,सीएम हाउस समेत नवा रायपुर के प्रमुख निर्माण कार्यों पर लगी रोक

सरकार का बड़ा ऐलान,कोरोना से पालकों को खोने वाले बच्चों को पढ़ाएगी सरकार

कोरोना मरीज़ों को अब लगेगा Tocilizumab इंजेक्शन,CMHO ने जारी की गाइडलाइन

छत्तीसगढ़ में समन्वय ने तोड़ी कोरोना संक्रमण की चेन,भोर होने ज्यादा समय नहीं

लॉकडाउन और वैक्सीनेशन का असर, नए कोरोना संक्रमित मरीज हुए कम

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण में मिली थोड़ी राहत,प्रदेश में रिकवरी दर बढ़ा

कोरोना की रफ़्तार में आई थोड़ी कमी,मौत के आंकड़े ने चौंकाया

एक ही दिन में बढे करीब 3 हजार कोरोना संक्रमित मरीज,खौफ में लोग

24 घंटे में 3 लाख 23 हजार 144 नए कोरोना रोगी, 2771 की मौत

कोरोना संकटकाल में अस्पतालों की मनमानी पर कलेक्टर की सख्त नजर

कोरोना के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त, 3.14 लाख नये मामले

छत्तीसगढ़ में कोरोना से मौत का तांडव जारी,संक्रमण में आई कमी