कोविड-19 एवं अर्थव्यवस्था: संकट और चुनौतियां

डाॅ.लखन चौधरी के विचार

“यदि हमारी सरकारें इसी तरह सोती रहीं तो आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन का संकट, अर्थव्यवस्था सहित समूची मानवता को इतनी पंगु और लाचार बना देगा कि मनुष्य अपने अस्तित्व के लिए चारों ओर मारा-मारा भागता, बिलखता, गिड़गिड़ाता दिखेगा। नये-नये वायरस, नई-नई बीमारियां, नये-नये समुद्री चक्रवाती तूफान, भूकम्प, सुनामी, बाढ़, सूखा, अकाल, नई-नई महामारी आदि जलवायु परिवर्तन जनित प्राकृतिक आपदाएं इस धरती पर मनुष्यों के लिए खतरे की घंटी तथा विनाशकाल की पूर्व चेतावनी है।”
-डाॅ. लखन चौधरी

कोविड-19 महामारी, संकट एवं त्रासदी को लेकर इस समय पूरी दुनिया में खलभली मची हुई है। जहां एक तरफ दुनिया के सामने लोगों की जिंदगी बचाने की चिंता है, वहीं दूसरी ओर कारोबार, व्यापार-व्यवसाय, उद्योग-धंधे एवं अर्थव्यवस्थाओं को बचाने की चिंता भी कम नहीं है। लोगों की जान बचाने और कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए भारत सहित दुनियाभर के सैकड़ों विकसित एवं विकासशील देशों ने अपने-अपने हिसाब से कई सप्ताह-महिने तक के लिए अपन-अपनेे देश में ’लाॅकडाउन’ किया है। इससे वायरस के संक्रमण के फैलाव को रोकने में बहुत हद तक सफलता मिली है, लेकिन इससे आम जनजीवन बहुत हद तक प्रभावित हुआ है। कारोबार, व्यापार-व्यवसाय, उद्योग-धंधांे सहित लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों के लंबे समय तक बंद रहने से दुनियाभर की विकसित एवं विकासशील सभी प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं में हताशा, निराशा, सुस्ती एवं मंदी छा गई। भारत सहित दुनिया के लगभग सभी देशों में कारोबार, व्यापार-व्यवसाय, उत्पादन ठप होने के कारण व्यापक पैमाने पर नौकरियों से छंटनी का दौर चल रहा है, और बेरोजगारी दर में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो महीने से भारत में बेरोजगारी दर 23-25 प्रतिशत बनी हुई है। कारखाने, उद्योग-धंधे एवं औद्योगिक उत्पादन सहित सभी आर्थिक-कारोबारी गतिविधियां लंबे समय तक बंद होने के कारण श्रमिकों, कामगारों का भारी मात्रा में पलायन हुआ एवं हो रहा है। प्रवासी श्रमिकों के पलायन या घर वापसी के कारण देश-दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। इनके कारण जहां एक तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी के साथ वायरस का संक्रमण फैल रहा है जिसके कारण अब देश का ग्रामीण क्षेत्र कोरोना वायरस का गढ़ बनता जा रहा है। कुल मिलाकर स्थिति बेहद खतरनाक एवं चिंताजनक बनी हुई है और लगातार बनती जा रही है। यह स्थिति कब तक चलेगी ? सामान्य जनजीवन, व्यापार-व्यवसाय, कारोबार सहित सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां कब पटरी पर वापस आयेंगी ? बहुत असमंजस, अनिश्चितता की स्थिति है।

इस वैश्विक महामारी एवं त्रासदी से उबरने और निकलने के लिए दुनियाभर में अपने-अपने तरीके से सर्वाधिक और सर्वोत्तम प्रबल प्रयास एवं उत्कृट उपक्रम भी जोरों से हो रहे हंै। अभी सबकी चिंताएं केवल इतनी है कि कैसे भी इस संकट से उबरा जाए, कैसे भी करके इस महामारी से लोगों को बचाया जाए। लेकिन अब सरकारों के साथ जनमानस को भी यह चिंता सताने लगी है कि कोविड-19 संकट के बाद क्या होगा ? देश-दुनिया में क्या-कुछ बदलेगा ? कितना बदलेगा ? लोग कितने बदलेंगे ? लोगों की जीवनचर्या या जीवनशैली कितनी बदलेगी ? खान-पान, रहन-सहन के तौर-तरीके कितने और किस तरह बदलेंगे ? इस बीच सरकार अर्थव्यवस्था में सुधार के नाम से देश के सार्वजनिक क्षेत्रों का तेजी के साथ निजीकरण करने में लगी हुई है। जबकि इस समय देश की अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती एवं मंदी को दूर करने के उपाय एवं समाधान के लिए सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों को साथ लेकर ही चलने की जरूरत है, जैसे कि अभी तक देश मिश्रित अर्थव्यवस्था के साथ चलकर विकास किया है। सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भष्ट्राचार, लालफीताशाही, नौकरशाही, अफसरशाही, भाई-भतीजावाद, फिजूलखर्ची को रोकने और इस पर कठोर नियंत्रण लगाने की आवश्यकता है।

इधर हमारे सरकारी तंत्र की खामियों एवं नाकामियों ने देश के करोड़ों प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को सड़कों को बेबस छोड़कर प्रवासी कामगारों एवं श्रमिकों के साथ दोहरा अन्याय किया है। एक तो उन्हें लाॅकडाउन कालखण्ड का वेतन नहीं दिया जिसके कारण वे मजबूरन घर लौटने को विवश हुए, दूसरी तरफ सरकार उन्हें सुरक्षित तरीके से घर पहुंचाने में नाकाम रही है। उपर से काम के घंटे बढ़ाने वाले श्रम कानून में रातोंरात बदलाव करते हुए मजदूरों पर एक और कुठाराघात किया गया है। क्या चार घंटे प्रतिदिन काम के घंटे बढ़ाने संबंधी श्रम कानूून में रातों-रात बदलाव एवं परिवर्तन करना शासन की तानाशाही, सामंतवादी, अधिनायकवादी प्रवृति का परिचायक नहीं है ? इस कानून का मतलब है कि प्रतिदिन 8 घंटे के स्थान पर अब प्रतिदिन 12 घंटे और प्रति सप्ताह 72 घंटे की कार्यअवधि लागू करना। प्रतिदिन 12 घंटे और प्रति सप्ताह 72 घंटे काम करने के बाद श्रमिक कितने दिन तक जिंदा रहेंगे ? इन सब के बीच एक तथ्यात्मक सच्चाई यह है कि आज पूरी दुनिया जिस वैश्विक महामारी से जुझ रही है, दरअसल में इसकी मुख्य वजह धरती में बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या, और इसके कारण प्रकृति का अंधाधंुध दुरूपयोग है।

धरती, प्रकृति इस बोझ को सहन नहीं कर पा रही है, इस कारण वह संतुलनकारी उपाय कर रही है। कोविड-19 प्रकृति के संतुलनकारी नीति का ही परिणाम है, जिसकी घोषणा ब्रिटिश पादरी एवं प्रसिद्ध प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माल्थस ने आज से सवा दो सौ साल पहले ही कर दी थी। इसके बावजूद हमारी सरकारों ने कभी गंभीरता से नहीं लिया, जिसका परिणाम सामने है। तात्पर्य यह है कि कहीं न कहीं इस समस्या की जड़ में धरती पर बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या की कार्य गतिविधियां हैं। इसलिए अब लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव एवं परिवर्तन करना होगा। खान-पान, रहन-सहन के तौर-तरीके बदलने होंगे। सामाजिक दूरियां या सही मायने में कहा जाये भौतिक दूरियां को अब जीवन का हिस्सा बनाना होगा। मास्क लगाकर ही घर से बाहर निकलने, सेनेटाइजर का इस्तेमाल करने, बार-बार हाथ धोने जैसे नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। बुनियादी साफ-सफाई एवं सुरक्षात्मक उपायों के साथ जीने की आदत डालनी होगी। अब यह सोचना होगा कि जीवन, प्रकृति, यह धरती सिर्फ हमारी नहीं है, इन पर हमारी आगामी पीढ़ीयों का भी अधिकार है। तभी यह दुनिया, यह जीवन आबाद रहेंगे। चूंकि आज से ठीक सौ साल पहले 1918-20 में भी इस दुनिया में इस तरह के खतरे आ चुके हैं, और भविष्य में भी इस तरह की आपदाएं आती रहेंगी, इसलिए सावधानी, सतर्कता आवश्यक एवं अनिवार्य है।

दुनियाभर के पर्यावरणविदों एवं पर्यावरण वैज्ञानिकों का अनुमान और उनकी चेतावनी है कि आने वाले दिनों में तरह-तरह की प्राकृतिक आपदाओं के आने की प्रवृत्तियां जोर पकड़ने लगेंगी। आर्थिक विकास एवं संवृद्धि की अंधाधुंध लालसा, चाहत, लोभ प्रकृति एवं धरती के लिए अभिशाप बनती जा रही है। सरकारों की मूर्खतापूर्णं एवं अदूरदर्शितापूर्णं नीतियां इस आग में घी डालने का काम कर रही हैं। विकास एवं संवृद्धि की बेपनाह चाहत कार्बन उत्सर्जन को लगातार बढ़ा रहा है, जिसके कारण जलवायु परिवर्तन के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आ चुका है, सामने खड़ा है लेकिन हमारी सरकारें इससे बेपरवाह हैं। नतीजा सामने है कोरोना वायरस जैसे संकट, जिसने देखते ही देखते पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रखा है। फिर भी दुनियाभर की सरकारें इसके मूल कारण पर चर्चा करते एवं इसका निदान या समाधान की दिशा में आगे बढ़ते नहीं दिखती हैं। सरकारें समस्या या मर्ज का केवल सस्ता ईलाज, नीम-हकीमी निदान एवं सतही समाधान करते दिख रहे हैं।

यदि हमारी सरकारें इसी तरह सोती रहीं तो आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन का संकट, अर्थव्यवस्था सहित समूची मानवता को इतनी पंगु और लाचार बना देगा कि मनुष्य अपने अस्तित्व के लिए चारों ओर मारा-मारा भागता, बिलखता, गिड़गिड़ाता दिखेगा। नये-नये वायरस, नई-नई बीमारियां, नये-नये समुद्री चक्रवाती तूफान, भूकम्प, सुनामी, बाढ़, सूखा, अकाल, नई-नई महामारी आदि जलवायु परिवर्तन जनित प्राकृतिक आपदाएं इस धरती पर मनुष्यों के लिए खतरे की घंटी तथा विनाशकाल की पूर्व चेतावनी है। इसलिए अब लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव एवं परिवर्तन लाना होगा। जीने के लिए प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर चलना होगा। जीवन के प्राकृतिक नियमों का पालन करना होगा, तभी इस धरती पर मानव जाति का अस्तित्व लंबें समय तक रह सकेगा। इसलिए यह समय जागने, सीखने, सबक लेने और सोचने का है। देखना है कि जनमानस एवं सरकारें इस कोविड-19 संकट, महामारी एवं त्रासदी से कितना सीखते और सबक लेते हैं।

(लेखक, अर्थशास्त्री एवं सामाजिक-आर्थिक विमर्शकार हैं)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति desh tv उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार desh tv के नहीं हैं, तथा desh tv उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

संबंधित पोस्ट

कोविड-19 टीकाकरण की प्रारंभिक तैयारियां शुरू

कोविड-19 : पाकिस्तान टीम को न्यूजीलैंड सरकार की मिली आखिरी चेतावनी

छत्तीसगढ़: ’’यथोचित व्यवहार’’ विषय पर दिया जायेगा ऑनलाईन प्रशिक्षण, कोविड-19 की रोकथाम के लिए उठाया गया कदम

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने प्रदेश में कोविड-19 से निपटने की समीक्षा

कोविड-19 एंटीबॉडी देती है स्थायी रोग प्रतिरोधक क्षमता : शोध

2021 की सर्दियों में भारत में प्रतिदिन दर्ज हो सकते हैं 2.87 लाख कोविड मामले

corona updet दुनियाभर में कोविड-19 के मामले हुए 1.14 करोड़

corona updet दुनियाभर में मामले 1.04 करोड़ पर, 5 लाख से ज्यादा मौतें

CORONA UPDET भारत में 24 घंटे में 17 हजार नए मामले

CORONA UPDET दुनियाभर के मामले 95 लाख के पार, अमरीका शीर्ष पर कायम

corona updet दुनियाभर में कोविड-19 के मामले 94 लाख के पार

corona updet: दुनियाभर में कोरोना मामलों की संख्या 90 लाख के करीब