झूठ क्या है, सच क्या है, आखिर यह यह अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।

NRC पर "लावण्या ज्योति मसांत" का विश्लेषण

“एनआरसी पर आखिर झूठ कौन बोल रहा है, सच कौन बोल रहा है। पीएम नरेन्द्र मोदी या गृहमंत्री अमित शाह । सोशल मीडया से लेकर अखबारों तक में यह चर्चाएं चल रही हैं। आखिर यह अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है।”

रविवार को पीएम मोदी ने रामलीला मैदान में ‘आभार रैली’ को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं है। साल 2014 से ही एनआरसी शब्द पर कोई चर्चा नहीं हुई है। कोई बात नहीं हुई है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के कहने पर यह असम के लिए करना पड़ा। हालांकि लोकसभा और राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि देश में एनआरसी लागू होकर रहेगा. ऐसे में लोग किसके बयान पर भरोसा करें, क्योंकि दोनों (पीएम मोदी और अमित शाह) के बयान एक दूसरे के उलट हैं।
एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) सांसद असदुद्दीन ओवैसी के आरोप पर अमित शाह ने लोकसभा में कहा था, ‘एनआरसी का कोई बैकग्राउंड बनाने की जरूरत नहीं है। हम इस पर बिल्कुल साफ हैं कि देश में एनआरसी होकर रहेगा। कोई बैक ग्राउंड बनाने की जरूरत नहीं है। हमारा घोषणा पत्र ही बैकग्राउंड है।

मोदी अपने भाषण में नागरिकता संशोधित कानून (सीएए) और नागरिकों का राष्ट्रीय पंजीकरण (एनआरसी) पर कहा कि कांग्रेस और अर्बन नक्सल द्वारा उड़ाई गई डिटेंशन सेंटर का अफवाह, सरासर झूठ है। खराब इरादे वाली है, देश को बर्बाद करने वाली है, ये नापाक इरादे से भरी है, ये झूठ है, झूठ है, झूठ है। इसके बाद उन्होंने कहा कि देश के किसी मुसलमान को न डिटेंशन सेंटर भेजा जा रहा है, न हिंदूस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है। ये सफेद झूठ है….। उन्होंने यह भी कहा कि केवल असम में एनआरसी को वापस ले लिया गया, वह भी उच्चतम न्यायालय के आदेश पर। भारत में केवल मुस्लिमों के लिए कोई सुधार गृह नहीं है।
लेकिन यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान कि …न हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेंटर है, को सच मान लिया जाए, तो सच्चाई से यह मेल नहीं खा रही है। द टेलीग्राफ के मुताबिक असम के जेलों में करीब छह सुधार गृह हैं, जो कि काफी हद तक हिंदुस्तान का ही है, जहां भारत में गैर-कानूनी तरीके से रहने वाले दिवेशी को भेजा जाता है। इसके अलावा आनेवाले दिनों में और दस डिटेंशन सेंटर बनने वाले हैं।

खुद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानन्द राय ने नवंबर में कहा था कि असम में छह कैंप हैं जहां 1043 विदेशी, 1025 बांग्लादेशी और 18 म्यांमार के निवासी हैं। यदि अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम का जिक्र, इसलिए नहीं किया है कि उच्चतम न्यायालय का असम में एनआरसी के लागू होने पर आदेश दिया गया था। लेकिन उनकी सरकार डिटेंशन सेंटर की मौजूदगी से पल्ला नहीं झाड़ सकती है। असम में सुधार शिविर यहां का राज्य गृह विभाग द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति से चल रहा है। असम के गोआलपड़ा, कोक्राझर, सीलचर, दिब्रुगढ़, जोरहाट और तेजपुर में छह सुधार शिविर मौजूद हैं। बहरहाल, 10 नए सुधार गृहों के निर्माण का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रालय को भेजा गया है जिस पर अनुमोदन होना बाकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, असम में भाजपा शासित सरकार द्वारा गोआलपड़ा जिले के लोवर असम में खास डिटेंशन सेंटर का निर्माण करीब 46.51 करोड़ रुपये में चल रहा है जिसमें तीन हजार लोगों को रखा जा सकेगा। असम के अलावा, महाराष्ट्र में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणविश ने राज्य के पहले डिटेंशन सेंटर के लिए जमीन की पहचान करायी थी। नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में यह कहा कि पहले यह तो देख लिजिए, एनआरसी पर कुछ हुआ भी क्या? झूठ चलायी जा रही है। मेरी सरकार आने के बाद, 2014 से आजतक, मैं यह सच 130 करोड़ लोगों के लिए कहना चाहता हूं, कहीं पर भी एनआरसी शब्द पर कोई चर्चा नहीं हुई है। कोई बात नहीं हुई है। जबकि इस साल नवंबर में घुसपेठियों के मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक उच्च न्यायालय में केंद्र ने कहा था कि भारत में रहने वाले विदेशी व देसी घुसपेठियों को रखने के लिए उन्होंने 2014 में सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखा था तथा 2018 में डिटेंशन सेंटर के निर्माण के लिए दुबारा पत्र लिखा था। इसी मामले में, कर्नाटक सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया था कि राज्य में 35 अस्थायी डिटेंशन सेंटर चल रहे हैं।

भारत में डिटेंशन सेंटर नहीं होने की बात को लेकर प्रधानमंत्री के दावे पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। पार्टी ने कहा है कि सामान्य गुगुल सर्च से भी उनके झूठे तथ्यों का पता लगाया जा सकता है। कांग्रेस ने मोदी के भाषण के जवाब को ट्वीट करते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि भारतीयों को सामान्य गुगुल सर्च से उनके झुठ का पता नहीं चल पाएगा? डिटेंशन सेंटर की बात पूरी तरह से सच है तथा जब तक उनकी सरकार सत्ता में है, तब तक देश में डिटेंशन सेंटरों की संख्या भी बढ़ती जाएगी।                                                                                                                                                     – लावण्या ज्योति मसांत

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