देशनायक दिवस’ पर अनावश्यक’सियासी पराक्रम’

कृष्णमोहन झा की कलम से

वेब डेस्क | पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में भाजपा को मिली सफलता ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बेहद परेशान कर रखा है। भाजपा उनको परेशान करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देती। आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं ‌जयंती के पुनीत अवसर पर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मुख्यातिथ्य में आयोजित एक शासकीय समारोह में ममता बनर्जी के भाषण की शुरुआत में वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा की गई नारेबाजी को भी इसी रूप में देखा जा रहा है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण के पूर्व जब ममता बनर्जी मंच पर अपनी कुर्सी से उठ कर माइक पर बोलने के लिये आगे बढ़ रही थीं तब दर्शकों के एक वर्ग ने जयश्री राम के नारे लगाए । मुख्यमंत्री इस नारे बाजी से इतनी उत्तेजित हो गई कि चंद पंक्तियों में ही अपना भाषण समाप्त कर वापस अपनी कुर्सी पर बैठ गई।

भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भाषण शुरू करने के पूर्व ‌की गई इस नारे बाजी को उन्होंने अपना अपमान निरूपित करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की १२५ जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह सरकारी आयोजन है इसलिए इस में ऐसी नारेबाजी को उचित नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को‌‌ ‌कार्यक्रम में बुलाकर उसका अपमान करना अशोभनीय है। मुख्यमंत्री ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती पर आयोजित समारोह में पधारने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार अवश्य व्यक्त किया। ममता बनर्जी जय हिन्द ‌और जय बांग्ला का नारा लगाकर जब अपनी कुर्सी पर बैठ गईं उसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने भाषण में इस पूरे घटनाक्रम का कहीं कोई उल्लेख नहीं करना यही संदेश दे रहा था कि प्रधानमंत्री ने इस नारे बाजी को कोई महत्व नहीं दिया। ममता बनर्जी ने भी अगर जयश्री राम के नारों पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त न करते हुए अपना भाषण पूरा कर दिया होता तो शायद नारेबाजी का प्रसंग तूल ही नहीं पकड़ता।


यह मानना ग़लत नहीं होगा कि भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा ममता बनर्जी के भाषण की शुरुआत में की गई नारेबाजी का असली मकसद उन्हें उत्तेजित करना ही था और ममता बनर्जी ने चंद सेकंड में ही अपना भाषण समाप्त कर अनजाने में ही उनकी इच्छा ‌पूरी कर दी। समारोह में जयश्री राम के नारे लगाए जाने पर ममता बनर्जी ने जो नाराज़गी व्यक्त की उसके लिए भाजपा नेता अब उनकी आलोचना कर रहे हैं। गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में आयोजित उक्त समारोह के पूर्व आठ किलोमीटर लंबी पदयात्रा भी की । केंद्र सरकार ने नेता जी की जयंती को हर वर्ष पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की है वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी की सरकार ने सुभाष जयंती को देशनायक दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था।

ममता बनर्जी ने कहा कि विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को देशनायक संबोधन प्रदान किया था। ममता बनर्जी की सरकार ने नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं ‌जयंती के अवसर पर कोलकाता में अनेक भव्य कार्यक्रम आयोजित किए थे जिनमें राज्य की जनता की अधिकतम ‌भागीदारी सुनिश्चित कर उन्होंने भाजपा को यह संदेश देना चाहा ‌था कि नेताजी पश्चिम बंगाल की जनता के दिलों में बसे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने यह साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि नेताजी के सपनों को साकार करने में केंद्र की मोदी सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से आगे रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार से नेता जी के जन्मदिवस पर हर वर्ष राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और कोलकाता को देश की क्रमिक राजधानी के रूप में मान्यता प्रदान करने की मांग भी की।कोलकाता में प्रधानमंत्री मोदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित मुख्य समारोह में ममता बनर्जी का भाषण शुरू होने के पूर्व भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा जयश्री राम के नारे लगाए जाने के पीछे भले ही उन्हें चिढ़ाने की मंशा रही हो परंतु अगर वे उस नारेबाजी को नजरंदाज कर अपना जारी रखतीं तो शायद उनके लिए वह कहीं अधिक अच्छी स्थिति हो‌ सकती थी। अगर उनके पूरे भाषण के दौरान भाजपा कार्यकर्ता नारे बाजी करते रहते तो यही माना जाता कि भाजपा कार्यकर्ता उनके भाषण में व्यवधान उत्पन्न करने की मंशा से लगातार नारे बाजी कर रहे हैं। दरअसल ममता बनर्जी ने जयश्री राम के नारों पर जब अपनी नाराजगी प्रदर्शित की उस समय उन्हें राज्य के अल्प संख्यक वोट बैंक की चिंता सता रही होगी। गौरतलब है कि जयश्री राम के नारों पर अतीत में भी कई बार अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से ममता बनर्जी ने कोई संकोच नहीं किया है। इस सबके बावजूद अगर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125 वीं जयंती पर भाजपा कार्यकर्ताओं और ममता बनर्जी ने संयम बरता होता तो समारोह में थोड़ी देर के लिए निर्मित अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता था।यह जिम्मेदारी भाजपा और ममता बनर्जी दोनों की ही थी।


(लेखक, कृष्णमोहन झा वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनितिक विश्लेषक हैं)
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