देश विशेष : लगातार बढ रहे हैं गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में बाघ

आंकड़ा आधा दर्जन पहुंचा, केन्द्र और राज्य सरकार कर रही सीधे मॉनिटरिंग

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के कोरिया जिले में स्थित क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश के सबसे बडे गुरू घासीदास नेशनल पार्क में एक बाघ की और बढोतरी हो गयी है। लगातार बाघों की बढती संख्या को देखते हुए केन्द्र और राज्य सरकार के आला अफसर ना सिर्फ पार्क की स्वयं मॉनिटरिंग कर रहे हैं बल्कि इस पार्क को कैमरा ट्रेपिंग प्रोटोकाल में शामिल कर लिया गया है, जिसके तहत जहां बाघों का रहवास क्षेत्र है वहां कैमरा टैपिंग करने के लिए नक्शा तैयार कर कैमरे लगाने का कार्य सरकार करेगी। इस संबंध में गुरू घासीदास पार्क के डायेक्टर इमोत्स्यु आओ का कहना है कि बडी खुशी की बात है हमारे यहां बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, अब केन्द्र और राज्य सरकार हमारे पार्क की मॉनिटरिंग के साथ कई तरह के संसाधन उपलब्ध करा रही है, आने वाले समय में इनके संरक्षण को लेकर और कई नई सुविधाएं उपलब्ध होगी।

जानकारी के अनुसार गुरू घासीदास नेशनल पार्क में बाघों की संख्या अब आधा दर्जन का आंकडा छू गया। यह खुशी की बात है कि यहां लगातार बाघों की बढोतरी हो रही है। सिर्फ पार्क के सोनहत परिक्षेत्र में 4 टाइगर है। पार्क रेंजर एमएस मार्सकोले की माने तो फरवरी 2019 से यहां बाघों का आना शुरू हुआ है, तो आगे बढता ही गया है। नया छठवां मेहमान अब हमारे यहां का ही माना जा रहा है, बाघ के दोनों ओर की धारियां किसी और स्थान के बाघ से मैच नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि परिक्षेत्राधिकारी मार्सकोले और उनकी टीम 9 महीने से लगातार बाघों पर नजर बनाए हुए है। उन्होनें पार्क में वाहनों की गति पर ब्रेक लगाई, असामाजिक तत्वों और शिकारियों पर पैनी नजर बनाने के लिए विशेष रणनीति बनाई, इसके अलावा पार्क में ग्रामीणों को बाघों के संरक्षण को लेकर काफी समझाईस देने में कामयाबी पाई।

आमने सामने है इलाका
सोनहत में वन्य जीवों की भारमार होने, पर्याप्त पानी और घनघोर जंगल में कई ऐसे स्थान है, जहां आम इंसान नहीं पहुंच सकता, यही कारण है बाघों ने अपना आशियाना बनाया है। बीते माह आए नए मेहमान ने अपना इलाका बना लिया है। सोनहत से रामगढ जाने वाली मुख्य मार्ग के एक ओर एक बाघ का इलाका है, जबकि सड़क के दूसरी ओर दूसरे बाघ का इलाका। कई बार दोनों के साथ साथ फूटमार्क भी मिले है, दूसरी ओर बाघिन के साथ उसके एक शावक के फूटमार्क कई स्थानों पर पाए गए है। शावक बाघिन के पीछे ही रहता है, पार्क के अफसर यह पता नहीं लगा पाए है जन्मा शावक नर है या मादा।

कब कब बढे नेशनल पार्क में टाईगर
फरवरी 2019 में पहली 1 नर बाघ को देखा गया
अप्रेल 2019 में एक मादा बाघिन का पता चला।
जून 2019 में बाघिन ने एक बच्चे का जन्म दिया।
जुलाई 2019 में नर बाघ जनकपुर परिक्षेत्र में देखा गया, जिसमे कॉलर लगा हुआ है।
जुलाई 2019 में एक बाघ पार्क के कमर्जी परिक्षेत्र पाया गया
अक्टूबर 2019 में एक नर बाध पार्क के सोनहत परिक्षेत्र. में पाया गया।

विशेषज्ञों ने दी ट्रेकिंग की नई तकनीक
पार्क परिक्षेत्र में में 19 नवंबर को वाईल्ड लाईफ के विशेषज्ञों ने पार्क के वन अमला व अधिकारियों को वन्य जीवो के कैमरा ट्रेकिंग प्रोटोकाल के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान कर इसकी बारीकियों से अवगत कराया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सीनियर वाईल्ड लाईफ रिसर्चर आशीष वालेकर, तथा सहायक संचालक तमोल पिंगला एलिफें रिजर्व के जयजीत केरकेट्टा द्वारा पार्क क्षेत्र में शेरों व टाईगरों को कैमरों से ट्रेकिंग कैसे की जाये उसकी जानकारी साझा की।

नई तकनीक से कर रहे है ट्रैक
अभी तक दक्ष तकनीकी तौर पर जिले के वन क्षेत्रों से वन्य जीवों की ट्रेकिंग की जाती रही थी जो पर्याप्त नहीं था। अब स्पष्ट तौर पर नक्शा तैयार कर वन्य जीवों की आधुनिक तरीके से नई तकनीक का उपयोग करते हुए ट्रेकिंग की जायेगी जिससे कि उनकी सही स्थिति का पता चल सके। प्रशिक्षण में बताया गया कि अब पार्क की निगरानी राज्य स्तर से किये जाने के साथ साथ केंद्र सरकार की वाईल्ड लाईफ के अधिकारियों की सीधी निगरानी क्षेत्र में आ गया है। इधर, राज्य वाईल्ड लाईफ द्वारा पार्क का नये सिरे से नक्शा तैयार किया जा रहा है और बारिकी से इस दिशा में मॉनिटरिंग होगी।

कैमरे से भी बनाई है नज़र
जिला कोरिया में स्थित गुरू घासीदास नेशनल पार्क में वर्ष के शुरूआती दौर में अधिकारियों को पार्क क्षेत्र से गुजरे मुख्य मार्ग पर शाम ढलने के बाद शेर दिखाई दिया था इसके बाद से पार्क अधिकारियों द्वारा क्षेत्र में कई तरह की पाबंदियां लगाकर शेर की निगरानी के लिए कैमरे लगाये गये थे ताकि शेर की हर गतिविधि के साथ लोकेशन को दर्ज किया जा सके।

पार्क में और होगे कडे नियम
अब पार्क नेशनल की सीमा में पिकनिक मनाने को पूर्ण रूप से प्रतिबंध कर दिया गया है। पार्क क्षेत्र में वाहनों की गति सीमा तय कर दी गई है, लोगों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। अब दिन के समय आसानी से बाघ किसी को भी नजर आने लगे है। टाईगर के कुनबे में एक सदस्य की बढोतरी के बाद से फिर पार्क अधिकारियों की हलचल बढी है। बताया जाता है कि गुरू घासीदास नेशनल पार्क को केंद्र सरकार के नये प्रोजेक्ट में शामिल करने की कवायद तेज हो गयी है। पूर्व में ही गुरू घासीदास नेशनल पार्क को टाईगर रिजर्व बनाने की दिशा में भी प्रस्ताव भेजा जा चुका है।

बाइक छोड भाग खड़ा हुआ ग्रामीण
जानकारी के अनुसार एक सप्ताह पूर्व दिन के समय रामगढ से सोनहत आ रहा एक बाइक सवार के सामने कुछ दूरी पर बाघ नजर आया था लेकिन बाघ चुपचाप सडक पार कर अपने रास्ते जंगलों की ओर चला गया। परन्तु बाईक चालक डर के मारे बाइक को सडक किनारे गढढे में गिरा भाग खडा हुआ, कुछ दूरी पर जाकर ग्रामीणों के पास पहुंचा और फिर ग्रामीणों की मदद उसकी बाइक गढढे से निकाली गई।