Exclusive : गांवों के प्रति सांसद फिक्रमंद नहीं…

चौथे चरण में छग के 16 में से केवल 9 ने गोद लिए गांव

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के कुछ महीनों के भीतर ही सांसद आदर्श ग्राम योजना का ऐलान किया था। इसके तहत करीब ढाई हज़ार गांवों की कायापलट करने का लक्ष्य रखा गया था। योजना के तहत 2014 से 2019 के बीच चरणबद्ध तरीके से सांसदों को तीन गांव गोद लेने थे और 2019 से 2024 के बीच पांच गांव गोद लेने की बात कही गई है।

सांसदों ने इस पर किस तरह रुचि ली। सांसद कितने फ्रिकमंद हैं। यह सामने आया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से। आंकड़े बता रहे हैं कि पहले चरण मेँ सांसदों ने अच्छी रूचि दिकाई इसके बाद चौथे चरण तक आते हालत इस तरह दिख रहे हैं जिससे साबित होता है कि सांसदों को अपने गांवों की चिंता नहीं है।

                      सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) का शुभारंभ 11 अक्तूबर 2014 को किया गया था। इसका उद्देश्य एक आदर्श भारतीय गांव के बारे में महात्मा गांधी की व्यापक कल्पना को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ध्यान में रखते हुए एक यथार्थ रूप देना था। SAGY के अंतर्गत, प्रत्येक सांसद एक ग्राम पंचायत को गोद लेता है और सामाजिक विकास को महत्व देते हुए इसकी समग्र प्रगति की राह दिखाता है जो इंफ्रास्ट्रक्चर के बराबर हो। ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ के लिये अलग से कोई आवंटन नहीं किया जाता है और सांसदों को सांसद निधि के कोष से ही इसका विकास करना होता है। वर्तमान में सांसदों की संख्या 790 है जिसमें लोकसभा में 545 सांसद और राज्यसभा 245 सांसद हैं। जनवरी 2010 तक राज्यसभा में 240 सांसद हैं जबकि 5 सीटें खाली हैं।

पहले चरण में देश भर के अलग-अलग हिस्सों में 703 सांसदों ने गोद लिया इनमें 500 सांसद लोकसभा और 203 सांसद राज्य सभा से थे। छत्तीसगढ़ के सभी 16 सांसदों ने भी गांव गोद लिए।

दूसरे चरण में सांसदों की रूचि कम होकर 497 पर जा अटकी। इनमें 364 लोकसभा और 133 राज्यसभा से थे। दूसरे चरण में भी छत्तीसगढ़ के सभी 16 सांसदों में गांव गोद लिए।

तीसरे चरण में सांसदों का यह आंकड़ा पहले चरण से भी आधे से कम 301 पर जा पहुंचा। इनमें लेकसभा से 239 और राज्यसभा से 62 सांसद थे। छत्तीसगढ़ के 16 में से 12 सांसदों ने इस चरण में रुचि दिखाई और गांव गोद लिए।

चौथा चरण की हालत बहुत खराब रही। सांसद आधे रह गए। केवल 252 सांसदों ने रुचि दिखाई और गांव गोद लिए इनमें 208 लोकसभा से और 44 राज्यसभा से हैं। छत्तीसगढ़ के सांसदों की रूचि भी कम होती गई। गोद लेने वाले सांसदों का आंकड़ा 9 पर पहंच गया है।

वैसे छत्तीसगढ़ के सांसद अपने पडोसी ओडिशा और मप्र से बेहतर हैं। ओडिशा के 31 सांसदों में से पहले चरण में 28 सांसदों, दूसरे चरण में 13 सांसदों, तीसरे चरण में 7 सांसदों और चौथे साल में केवल 6 सांसदों ने रूचि दिखाई और गांव गोद लिए।

मप्र के सांसदों की दिलचस्पी पहले चरण के बाद खत्म सी होती दिखी है। कुल सांसदों में से पहले चरण में 37, दूसरे चरण में 20 , तीसरे चरण में 15 और चौथे चरण में आकर 7 सांसदों पर अटक गया है।