शावक खुद करने लगा शिकार तो बाघिन लौट आई साथी के पास

सोनहत के मेंड्रा में आराम करते दिखे, मेटिंग की सभावना बढ़ी

बैकुंठपुर। गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में अब बाघिन अपने शावक को छोड़ अब अपने नर साथी के पास लौट आई है, जिसके बाद अब इनके मेटिंग की संभावना बढ गयी है। वहीं 4 अन्य बाघों ने अपना नया इलाका बना पार्क को घर बना लिया है। दूसरी ओर शनिवार शाम बाघ और बाघिन सोनहत के मेड्रा स्थित मुख्यमार्ग पर आराम करते देखे गए।
इस संबंध में पार्क रेंजर एमएस मार्सकोले का कहना है कि बाघिन का बच्चा बड़ा हो गया है, और अब उसने अपने बच्चे को अकेला छोड, अपने साथी नर बाघ के पास लौट गई अब दोनों साथ- साथ घूम रहे हैं। दोनों ने कुछ दिन पहले एक साथ नीलगाय का शिकार भी किया है। चार अन्य बाघों ने अपना अपना इलाका तय कर लिया है। उन्हें यहां भरपूर भोजन मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान को राज्य सरकार ने टाईगर रिजर्व घोषित कर दिया है, जिसे लेकर पार्क क्षेत्र में एकदम शांति देखी जा रही है। ठंड के इस मौसम में बाघ दिन में धूप का आन्नद लेने सड़कों तक देखे जा रहे है। शनिवार को सोनहत के मेंड्रा स्थित सड़क पर दोनों बैठे देखे गए।

बता दें कि सोनहत परिक्षेत्र में बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया था, कई माह शावक और उसकी मां को एक साथ देखा गया। पार्क के कर्मचारी लगातार बाघों की आवाजाही पर नजर रख रहे है। अब बाघिन का शावक जवान हो गया है और खुद ही शिकार कर रहा है। बाघिन उसे छोड दूसरे नर बाघ के साथ हो गई है। विभाग के कर्मचारियों ने बीते 10 दिन पहले से दोनों को एक साथ देख रहे है, दोनों के पदचिन्ह भी एक साथ पाए जा रहे हैं, जिसके बाद आने वाले कुछ दिनों में एक और नए मेहमान के आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। एक बाघ ने कमर्जी तो नए शावक ने मझगवां में अपना इलाका बनाया है। बाघ और बाघिन सोनहत के आमापानी के एक तरफ तो दूसरा अकेला बाघ दूसरी ओर अपने इलाके में घूम रहा है।

पन्नालाल अब भी पार्क क्षेत्र में
पन्ना टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ और फिर बांधवगढ़ से संजय गांधी पार्क होकर गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान पहुंचा पन्नालाल बाघ पार्क के जनकपुर क्षेत्र में ही भ्रमण कर रहा है, इसमे कॉलर आईडी लगा हुआ है। पार्क का अमला इस पर नज़र बनाए हुए है। एक साल होने को है इसे यही खूब खाने को मिल रहा है, इसलिए ये अब यही रह रहा है।

गर्भवती होने पर छॊड़ दिया था साथ
पार्क के अधिकारियों की मानें तो बाघिन ने गर्भवती होने के बाद से बाघ का साथ छोड दिया था, उसने सोनहत के घनघोर ऐसे क्षेत्र में अपना आशियाना बनाया जहां कोई नहीं पहुंच पाए, उस स्थान पर पानी और उसके भोजना की पर्याप्त व्यवस्था है, शावक के जन्म के बाद उसे कई महीने अपने साथ रखा, अब ब़डा होने पर उसका साथ छो़ड दिया। बताया जाता है कि बाघ अपने होने वाले शावक को प्रतिद्वंदी मानकर मार डाला करता है, परन्तु यदि मादा का जन्म होता है तो उसे नहीं मारता। यही कारण था कि बाघिन ने अपने शावक की बाघ से रक्षा करने ऐसा किया और बड़ा होने पर उसे छोड वापस बाघ के पास आ चुकी है।

भरपूर मात्रा में है भोजन
बाघों ने पार्क के लम्बे घने और सघन वन को अपने रहने का निवास चुना है, इसका प्रमुख कारण है यहां की बढती नीलगाय की संख्या है, आए दिन बाघों के द्वारा नीलगाय के शिकार के तथ्य सामने आ रहे है, कभी-कभी बाघों के द्वारा गाय, भैस और बैलों के शिकार भी देखा जा रहा है। हालांकि विभाग की माने तो बाघों के मल सेंपल से बंदरों को खाने के भी प्रमाण मिले है। इसके अलावा यहां अन्य वन्य जीवों की बहुतायत है जिसके कारण वे यहां स्वच्छंद रूप से विचरण कर रहे हैं।