जब तेलीबांधा तलाब में हुआ “ठाड़ दुआरे नंगा” का मंचन


रायपुर। तेलीबांधा तालाब में दिलीप मिश्र द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक “ठाड़ दुआरे नंगा” का मंचन किया गया। इस नाटक के मंचन के दौरान कलाकारों के संवाद को देखकर रूकती गाड़ियां और दर्शकों की बढ़ती भीड़ भी देखते ही बन रही थी। नाटक के सार को समझने लोगों की गंभीरता भी दिखी। बता दें कि दिलीप मिश्र ने 1979 में पहला नुक्कड़ नाटक “रोते हंसते हम” निर्देशित किया था। दिलीप ने अपने नाटकों के लेखन में समसामयिक घटनाओं को बेहद खूबसूरती से पिरोने में माहिर है। उतनी ही सूझबूझ उनके निर्देशन में भी सामने आती है।
नाटक देखने तेलीबांधा तलाब पर रुके एक राहगीर ने कहा कि नुक्कड़ नाटक भी बिना चीख चिल्लाहट के असरदार हो सकता है ,यह देखने के लिए भिलाई इप्टा की ये प्रस्तुति “ठाड़ दुआरे नंगा” को एक बार जरूर देखना चाहिए।
वही प्रतिष्ठित साहित्यकार डा. राजेन्द्र मिश्र ने नाटक की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी बच्चों ने उम्मदा काम किया है उन्हें बधाई। साथ ही उन्होंने कहा कि दर्शकों को नाटक में और इन्वाल्व किया जाने से नाटक और अधिक ग्राह्य बनेगा।

नाटक से पंहुचा रहे विचार
इप्टा भिलाई सालों से नुक्कड़ नाटकों के जरिये जन गण मन तक अपने विचार ले जाने का काम कर रही है। नाटक को आडिटोरियम के बंद दरवाजे से निकाल कर जनता के बीच ले जाने का काम इप्टा ने आजादी के बाद से लगातार कर रही है। बहरहाल समसामयिक घटनाओं पर नुक्कड़ नाटक अब कम दिखाई पड़ते हैं। भूलती बिसराती इस रिवायत को भिलाई इप्टा के युवा साथियों ने फिर ताजा किया है।

इन कलाकारों ने बंधा समा
ठाड़ दुआरे नंगा नाटक के लेखक एवं निर्देशक- दिलीप मिश्र थे। उनके साथी कलाकार बतौर राजा- नरेन्द्र, मंत्री- उत्तम, महिला मंत्री- गौरी, बैंक स्टाफ/ एअर होस्टेज- निकिता, मिसेज त्रिपाठी/ एअर होस्टेज- कविता सावरी, नारा लगाने वाली- वेनुप्रिया, पायलट- प्रान्जल, पेड़/कारीगर1- मयूर, कारीगर2-भानू प्रताप, किसान- सोम, किसान का बेटा- यश, टीटी/बाबा- रोहित, डाक्टर- समीर, कारीगर आखरी-अंशु, कारीगर/ मरीज का पिता- श्रीनु का किरदार निभाया। नाटक के संयोजक मणिमय मुखर्जी थे।