देवानंद के कारण मुझे पहली बार लगा…कनक तिवारी

देवानंद की पुण्यतिथि पर कनक तिवारी ने साझा किया संस्मरण

रायपुर। आज 3 दिसंबर को देवानंद की पुण्यतिथि है। देवानंद से जुड़ी यादों को प्रसिद्ध लेखक और गांधीवादी विचारक, प्रदेश के पूर्व महाअधिवक्ता कनक तिवारी ने साझा किया है। वे लिखते हैं कि बिलासपुर में एक साहित्यिक कार्यक्रम में बालीवुड अभिनेताओं पर चर्चा छिड़ी और सुप्रसिद्ध लेखक विनोद कुमार शुक्ल ने देवानंद के बारे में क्या कहा। वे लिखते हैं..देवानंद के कारण मुझे पहली बार लगा कि पुष्पा नाम की स्त्री से रोमांटिक प्रेम किया जा सकता है।

                   ” बात कुछ बरस पहले की है। मैंने बिलासपुर में कई सांस्कृतिक साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए थे। एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विनोद कुमार शुक्ल ,विष्णु खरे ,डॉक्टर राजेश्वर सक्सेना जैसे साहित्यकारों ने अन्य मित्रों के साथ शिरकत की थी ।अचानक मंच पर ही भारतीय फिल्मों के कलाकारों की बात चल निकली ।जाहिर है मैं दिलीप कुमार का भक्त हूं। मैंने संचालक के रूप में माइक थामते हुए कहना शुरू किया कि कला अगर कहीं है अभिनय की तो युसूफ भाई में है दिलीप कुमार में है। मंच पर बैठे विष्णु खरे ने माइक मुझसे लिया और पूरी ताकत के साथ उन्होंने मेरी बात का समर्थन किया। और दिलीप कुमार की कला की बारीकियां और बानगियाँ याद करने लगे ।

अध्यक्षता बिलासपुर से राजेश्वर सक्सेना कर रहे थे ।मैंने उनसे अनुरोध किया कि वे भी अपनी बात कहें ।उन्होंने पूरी तौर से विष्णु जी से और मुझसे असहमति व्यक्त की और कहा कि मैं तो हर हालत में राज कपूर को सबसे बड़ा कलाकार मानता हूं ।अब ऐसा लगा कि मध्यस्थता करानी चाहिए।

विनोद कुमार शुक्ल से कहा कि वे भी हमसे अपनी बात कहें । हम सबको हतप्रभ करते हुए विनोद जी ने कहा भाई मैं तो देवानंद का मुरीद हूं। देवानंद के निधन के ठीक पहले मेरा हार्ट का बहुत खतरनाक ऑपरेशन गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में डॉ नरेश त्रेहान ने खुद किया था। बहुत मुश्किल से मैं बचा था ।और फिर प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट किया गया। ऑपरेशन पर जाने के पहले टेलीविजन पर खबर देख ली थी कि देवानंद अपनी किसी फिल्म के सिलसिले में लंदन गए हैं अपने बेटे के साथ और अपने एकाध मित्र के भी साथ। जब मैं ऑपरेशन करा कर लौटा और टेलीविजन देखने के लायक हुआ ।तो मेरी बेटी ने मुझे टेलीविजन में दिखाया कि लंदन के होटल में देवानंद की मौत हो गई है। मुझे गहरा सदमा लगा। डॉक्टर घबरा गए कि कहीं फिर से हार्ट अटैक ना हो जाए ।मुझे ठीक से अब याद नहीं आ रहा है।

लेकिन यह कहने में कोई मुझे गुरेज नहीं है कि लंदन मुझे बहुत पसंद है। कई कारणों से अंग्रेजी साहित्य संविधान, प्रशासन और कई तरह की पढ़ाई करने के कारण। एक बार हो भी आया हूं। पढ़ा था। टेलीविजन में देखा था ।

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देवानंद एक अच्छे होटल में तो रुके थे लेकिन पास के एक पंजाबी ढाबे में खाना खाने गए थे। वहीं अक्सर खाते थे। और उन्होंने तंदूरी रोटी, भिंडी की सब्जी , तंदूरी चिकन, दाल मखनी , बैगन का भरता , कुछ दो चीजें और खाई थीं। मेरे मन में इतनी परेशानी हो गई कि मैं बार-बार डॉक्टर से कहने लगा कि मुझे यह सब चीजें खानी है। मांसाहार में नहीं करता लेकिन मुझे दाल मखनी, भिंडी की सब्ज‌ी, तंदूरी रोट‌ बैंगन का भरता , एक और कोई वेजिटेरियन डिश और थी वह तत्काल दी जाए ।अन्यथा मैं लंदन जाना चाहूंगा। मैं उसी होटल में रुकूंगा। उसी ढाबे में खाने जाऊंगा। और मैं देवानंद की तरह रात में उसी होटल में मर जाना चाहूंगा। ऐसी काव्यात्मक मौत मुझे चाहिए।देवानंद जैसी जिंदगी नहीं मिली। तो क्या होता है। मौत तो मिल सकती है। दिल का ऑपरेशन कराने के बाद दिमाग इतना कमजोर और संवेदनशील हो जाता है। भावुक हो जाता है।मुझे नहीं मालूम था। मैं कई दिनों तक देवानंद की यादों में सुबकता रहा था।

कनक तिवारी जी लिखते हैं, मैंने भोपाल में एक फ्लैट भी खरीदा था ।एक बहुत बड़े कॉन्प्लेक्स में। उसका उद्घाटन भी देवानंद ने किया था। इतना ही मेरा उसे रिश्ता था। लेकिन अब मैं जब सभी बड़े नायकों की फिल्मों के गीत सुनता हूं ।तो सबसे ज्यादा फैंस फॉलोइंग देवानंद के फिल्मों के गीतों को मिलती है। और मुझे भी इस उम्र में उनकी रोमांटिकता अच्छी लगने लगी है। राजेश खन्ना से राजनीतिक कारणों से अच्छा संबंध हो गया था ।उनकी कई फिल्मों में नायिका का नाम मेरी पत्नी के नाम की तरह पुष्पा रहता था। ऐसा नहीं है कि देव आनंद की फिल्मों में ऐसा नहीं हुआ। नूतन का नाम भी जब पुष्पा एक फिल्म में मैंने देखा और जब देवानंद नहीं रहे। पत्नी मेरे प्राइवेट कमरे में मेरी संवेदनात्मक हालत को देखने आई। तब देवानंद के कारण मुझे पहली बार लगा कि पुष्पा नाम की स्त्री से रोमांटिक प्रेम किया जा सकता है। “