अधरपणा : भगवान जगन्नाथ को लगाया जाएगा ये विशेष भोग

रथारूढ़ होकर भगवान जगन्नाथ दे रहे है भक्तो को दर्शन

पुरी। सुनाबेशा के एक दिन बाद, भगवान बलभद्र, जगन्नाथ और देवी सुभद्रा को आज शाम एक विशेष अनुष्ठान में ” अधरपणा ” दिया जाएगा। अनुष्ठान के सुचारू संचालन के लिए, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) द्वारा एक समिति का गठन किया गया है। समिति में सुरा महासूरा निजोग और दइतापति निजोग के सेवक, एसजेटीए के मुख्य प्रशासक प्रदीपता महापात्र शामिल हैं। महापात्र ने कहा, ” पहले की तरह किसी भी तरह के झड़प से बचने के लिए, अनुष्ठानों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए समितियों का गठन किया गया है।


” अधरपणा ” भगवान जगन्नाथ का एक समृद्ध पेय है जो दूध, केला, पनीर, सुगंधित मसाले और पानी के साथ महासूरा सेवकों द्वारा तैयार किया जाता है। महाप्रभु के लिए इस खीर रूपी पेय पदार्थ तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को पानिया आपात सेवादारों ने सिंगवारा के पास छूनी मठ से लाया जाता है। त्रिमूर्ति के अलावा, तीन रथों पर मौजूद अन्य दिव्य अवतार के लिए भी ये भोग लगाया जाता है। मंदिर समिति द्वारा पवित्र त्रिमूर्ति की नीलाद्रि बिज रस्म कल आयोजित की जाएगी।

रथों में विराजमान है भगवान
तालध्वज में भगवान बलभद्र, देवदलन में देवी सुभद्रा और नंदीघोष रथ में महाप्रभु जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर पहुंच गए है। मगर माता लक्ष्मी महाप्रभु से नाराज़ है और उन्होंने श्रीमंदिर के भीतर महाप्रभु के प्रवेश नहीं करने देती है। तब भगवान का स्वर्ण शृंगार यानी सुनाबेशा किया जाता है। जिसके दूसरे दिन भगवान को अधरपणा का भोग लगाया जाता है। श्रीमंदिर के सिंह द्वार के नज़दीक खड़े रथों में विराजे देवताओं के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। मान्यता के मुताबिक लाखों की संख्या में रथ में सवार महाप्रभु के दर्शन कर मोक्ष प्राप्ति की कामना करते नज़र आए।