भारतीय रेल – रेलवे ने बनाया ऐसा नियम, जो आपकी नींद उड़ा कर रख देगा…

रेलवे बोर्ड की ओर से जारी नए नियम के मुताबिक आरक्षित कोचों के यात्री अब रात 10:00 बजे से लेकर सुबह 6:00 बजे तक ही सो सकते हैं।

नई दिल्ली: भारतीय रेल में ज्यादातर सफर करने वाले यात्रियों के लिए आवश्यक सुचना। रेलवे ने हाल ही में जो कानून बनाया है वह आपकी नींद को उड़ा सकता है। रेल में यात्रा करने के क्रम में सोने को लेकर ज्यादातर लोगों को कई बार एक दूसरे के साथ झगड़ते हुए देखा होगा, इस झगड़े का निदान करने के लिए रेलवे बोर्ड ने सोने के लिए चयनित समय में से एक घंटा कम कर दी है।

रेलवे बोर्ड की तरफ से लागू सर्कुलर के अनुकूल आरक्षित कोचों के यात्री अब रात्रि के 22:00 बजे से लेकर प्रातः के 06:00 बजे तक ही अपनी नींद पूरी कर सकते हैं, ताकि अन्य यात्रियों को सीट पर बाकी बचे समय में बैठने का सुयोग मिल सके। इससे पहले यात्रियों के सोने का आधिकारिक समय रात 21:00 बजे से प्रातः 06:00 बजे तक ही था।

भारतीय रेल – बाकी बचे घंटों में दूसरे आरक्षित यात्री सीट पर बैठ सकते हैं

जारी सर्कुलर में बताया गया है, “आरक्षित कोचों में सोने की लाभ रात में 22:00 बजे से लेकर प्रातः 06:00 बजे तक है और अवशेष समय में दूसरे आरक्षित यात्री इस सीट पर बैठ कर अपनी यात्रा कर सकते हैं ।” हालांकि सर्कुलर में कुछ निश्चित यात्रियों को विशेष सुविधा दी गई है ।

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इसमें कहा गया है, “यात्रियों से आग्रह किया गया है की, दिव्यांग, बीमार और गर्भवती महिला यात्रियों के मामले में सहयोग करें। जिससे अगर दिव्यांग, बीमार और गर्भवती महिला यात्री चाहें तो अनुमति वाले समय से ज्यादा सो सकते है ।” इस नए नियम ने भारतीय रेलवे वाणिज्यिक नियमावली, खंड एक के पैराग्राफ 652 को निकाल दिया है। इससे पहले इस नियम के अनुसार यात्री रात के 21:00 बजे से लेकर प्रातः 06:00 बजे तक सो सकते थे ।

सोने की सुविधा वाले सभी आरक्षित कोचों में ही लागू

रेलवे बोर्ड मंत्रिमंडल के प्रतिनिधि अनिल सक्सेना ने कहा, “सोने के प्रबंध को लेकर रेल यात्रियों की परेशानी के बारे में रेलवे अधिकारियों से सुझाव मिला था। हमारे पास पहले ही इसके लिए एक कानून व्यवस्था है। हालांकि हम इसे साफ़ कर देना चाहते थे और सुनिश्चित करना चाहते थे कि इन नियमों का पालन हो।” उन्होंने कहा है कि यह नियम सोने की सुविधा वाले सभी आरक्षित कोचों में लागू होगा।

वहीं एक अन्य रेलवे अफसर ने कहा कि शयन के समय में एक घंटे की कमी इसलिए की गई क्योंकि कुछ यात्री ट्रेन में चढ़ने के साथ ही अपनी आरक्षित सीट पर सो जाते थे, चाहे वह दिन का समय हो या रात्रि का। इससे ऊपर या मध्यम की सीट के यात्रियों को परेशानी होती थी।
मंत्रिमंडल के अफसरों ने कहा कि इस नए निर्देश से यात्रा टीटीई को भी इज़ाजत वाले समय से अधिक सोने से संबंधित परेशानियों को सुलझाने में सरलता होगी।

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