Exclusive:छत्तीसगढ़ में पहला टाइम कैप्सूल भिलाई में दफन हुआ था

दूसरा भी यहीं सेक्टर 6 स्थित क्रिश्चियन कम्यूनिटी चर्च में

डा. निर्मल कुमार साहू

रायपुर। कल  5 अगस्त को अयोेध्या  में राम मंदिर शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों होगा। राम मंदिर की नींव में जमीन के 200 मीटर भीतर टाइम कैप्सूल गाड़ा जाएगा। इस टाइम कैप्सूल को लेकर देशभर में चर्चाएं हो रही है। ऐसा किया जाना देश में पहली बार नहीं है।

आपको यह जानकारी हैरान कर सकती है कि छत्तीसगढ़ की धरती पर भी टाइम कैप्सूल गाड़ा गया। और वह जगह था भिलाई स्टील प्लांट। इसके बाद भिलाई के एक चर्च में भी इसी तरह का टाइम कैप्सूल गाड़ा गया है।

भिलाई स्टील प्लांट में किस तरह नींव में टाइम कैप्सूल दफन हुआ इसका जिक्र भिलाई के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मो. जाकिर हुसैन ने अपनी किताब वोल्गा से शिवनाथ तक में विस्तार से किया है।

अपनी किताब वोल्गा से शिवनाथ तक में वे लिखते हैं- 6 जून 1955 को भारतीय–रूसी बहादुरों की पायनियर टीम टीम पहुंची थी। इस टीम को काफी सम्मान दिया गया।

सन 1962 में जब भिलाई की नींव में जब टाइम कैप्सूल डालने का मौका आया तो पायोनियर टीम को समर्पित किया गया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के संबंध में भलाई स्टील प्लांट के तब के डायरेक्टर (स्टोर एंड परचेस) हितेन भाया के हवाले से वे लिखते है- 14 अगस्त 1962 को जनरल मैनेजर सुकून सेन ने चौथी कोक ओवन बैटरी की क्रांक्रिटिंग का काम अपने हाथों शुरू किया।

नींव तैयार करने का काम हिंदुस्तान स्टील लिमिटेड के डायरेक्टर सरदार इंद्रजीत सिंह के हाथों 18 सिंतबर 1962 को शुरू हुआ। इसी दौरान हमारे मुल्क पर चीन का हमला शुरू हो गया। कुछ महीने काम प्रभावित हुए मुल्क के हालात सामान्य हुए तो क्रांक्रिटिंग की तैयारी शुरू हो गई।

हितेन भाया कहते हैं- वह वक्त रोमांचित कर देने वाला था।

10 दिसंबर 1962 को ब्लास्ट फर्नेश 4 की क्रांक्रीटिंग का काम सुबह 8 बजे शुरू होना था और लगातार 48 घंटे तक किया जाना था।

टाइम कैप्सूल पायनियर टीम को समर्पित किया गया। इसके लिए विशेष बेलनाकार वाले स्टील पात्र का उपयोग किया गया। इसमें जानकारियां अंग्रेजी में लिखी गईं।

जिसका हिंदी अनुवाद है- चौथे ब्लास्ट फर्नेस की बुनियाद से जुड़ा यह प्रमाणपत्र और हस्ताक्षर समारोह समर्पित है। उन भारतीय-रूसी पायनियरों को जो यहां भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना के लिए आए। इसे समर्पित किया जाता है उन रूसी तकनिकी विशेषज्ञों को भी, जो निर्माण के दौरान तकनीकी सहायता प्रदान केरने के लिए सोवियत संघ सरकार द्वारा नियुक्त किए गए।

तब भारतीय चीफ इंजीनियर पुरतेज सिंह और सोवियत चीफ इंजीनियर एवी सिट्स इस समारोह की पूरी निगरानी कर रहे थे।

एक बेलनाकार पात्र में भारती-सोवियत संघ समझौते और कई अन्य अहम दस्तावेज इस टाइम कैप्सूल में डाले गए। तमाम अफसरों के हस्ताक्षर इन दस्तावेजों पर लिए गए और टाइम कैप्सूल में डाला गया। नींव में रखे जाने के बाद 48 घंटे तक कांक्रीटीकरण चला।

इस तरह पहला टाइम कैप्सूल ब्लास्ट फर्नेस 4 में दफन हो गया।

भिलाई में दूसरा टाइम कैप्सूल 25 दिसंबर 1965 को सेक्टर 6 स्थित क्रिश्चियन कम्यूनिटी चर्च की नींव रखे जाने समय दफन किया गया।

क्या है टाइम कैप्सूल

वस्तुतः टाइम कैप्सूल’ एक ऐसा बॉक्स होता है, जिसमे पूरी जानकारियां होती हैं। जैसे देश का नाम, जनसँख्या, धर्म, परंपराएं, वैज्ञानिक अविष्कार की जानकारी आदि। कैप्सूल में कई वस्तुएं, रिकार्डिंग इत्यादि भी डाली जाती है। इसके बाद कैप्सूल को कांक्रीट के आवरण में पैक कर जमीन में बहुत गहराई में गाड़ दिया जाता है। ताकि सैकड़ोंहज़ारों वर्ष बाद जब किसी और सभ्यता को ये कैप्सूल मिले तो वह उस वक्त की सारी जानकारियां हासिल कर सके।

आपको यह जानकार हैरत हो सकता है कि टाइम कैप्सूल की अवधारणा आदिम मानव युग से चली आ रही है। पाषाण युग में शैलचित्र-भित्ती चित्र, प्राचीन मंदिरों की दीवारों पर शिलालेख एक तरह से टाइम कैप्सूल ही तो हैं।

 

 

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