महासमुंदः 5 बरस पहले मुनगा-पपीता को इस डाक्टर ने बनाया था कुपोषण के खिलाफ हथियार

महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक में यह अभियान चलाया था चिरायु डाक्टर डॉ सुस्मिता खनूजा  ने

डा. निर्मल कुमार साहू

रायपुर।  अभी कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ प्रदेश  सरकार द्वारा  कुपोषण  के खिलाफ अभियान चलाकर मुनगा पौधा रोपण के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन आज से 5 साल पहले 2015-16 में महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक में यह अभियान चलाया था चिरायु में पदस्थ डाक्टर डॉ सुस्मिता खनूजा  ने। तब ब्लाक के हर आंगनबाड़ी में मुनगा के साथ पपीता के पौधे भी लगाए थे। कुछ ही दिनों में सकारात्मक नतीजे सामने आ गए थे। तब अखबारों ने मुनगा-पपीता को बनाया कुपोषण के खिलाफ हथियार –की सुर्खियों के साथ काफी प्रशंसा की थी। उस वक्त भाजपा की सरकार थी अगर इसे तब से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाता तो आज प्रदेश में कुपोषण की तस्वीर कुछ और होती। हालाकि वर्ष 2018 में प्रदेश कुछ जिलों में भी मुनगा को कुपोषण के खिलाफ अपनाया गया था।

पिथौरा विकासखण्ड के एक क्षेत्र में विगत 5 वर्ष पूर्व 2015-16 से ही मुनगा के औषधीय गुणों को पहचान कर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद की चिरायु में कार्यरत महिला आयुर्वेद चिकित्सक डॉ सुष्मिता खनूजा ने अपने क्षेत्र में मुनगा के साथ पपीता के पेड़ लगवाए थे। खासकर गर्भवती महिलाओं एवम कमजोर कुपोषित बच्चों के घरों तक जाकर डॉ सुष्मिता ने उक्त पौधों का रोपण करवा कर उनके सेवन की विधि भी समझाई।जिससे उस समय क्षेत्र के कई ग्रामो में कुपोषण कम होने लगा था।

विभागों का अच्छा सहयोग मिला-डॉ सुष्मिता

वर्तमान में बिलासपुर जिला मुख्यालय में कोविड 19 की डयूटी में तैनात डॉ सुष्मिता ने बताया कि जब उन्हें पिथौरा विकासखण्ड के आधे ग्रामो के स्कूल एवम आंगनबाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य परीक्षण का मौका मिला तब उन्होंने जांच में कुपोषण की गम्भीर समस्या देखी। इस दौरान तात्कालीन कलेक्टर उमेश अग्रवाल द्वारा लगातार मीटिंग लेकर कुपोषण से कारगर लड़ाई के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। परन्तु दवाओं से कुपोषण का स्थायी समाधान होना मुश्किल था।

मुनगा एवम पपीता के गुणों को देख कर आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इसका प्रयोग प्रारम्भ किया। उन्होंने ग्रामो में गर्भवती महिलाओं एवम कमजोर कुपोषित बच्चों का घर ढूंढ ढूंढ कर उनके घरों में मुनगा एवम पपीता रोपित करवाया। इस कार्य मे स्थानीय महिला बाल विकास अधिकारी सी एस साहू एवम बी एम ओ डॉ टी अग्रवाल का भरपूर सहयोग भी मिला।

मुनगा-पपीता में गजब के औषधीय गुण

डॉ सुष्मिता बताती हैं कि मुनगा एवम पपीता सर्वसुलभ एवम औषधीय गुणों से भरपूर है। मुनगा के पत्तों में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है।इसके अलावा इसमें आयरन भी होता है। पत्तो की सब्जी बना कर खाने से यह एन्टी बियोटिक का काम करने के साथ त्वचा सम्बन्धी परेशानी दूर कर रक्त शोधन एवम गाल ब्लेडर के फंक्शन को दुरुस्त करता है।जबकि मुनगा का फल कैल्शियम,आयरन एवम विटामिन की वजह से हड्डियों को मजबूत करता है।

इसी तरह पपीता  में विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होती है जिससे यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।कोविड 19 संक्रमण के इस दौर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर ही जोर दिया जा रहा है।

कई क्षेत्रों में घर-घर मुनगा-पपीता

इधर महिला बाल विकास अधिकारी सी एस साहू एवम तात्कालिक बी आर सी एफ ए नन्द ने बताया कि पिथौरा विकासखण्ड के अनेक ग्रामो में अभी मुनगा पौधे रोपने हेतु सर्वे किया गया है।इनमे बहुत से ग्राम तो ऐसे है जहाँ के अनेक घरो में मुनगा के पेड़ पूर्व से है।और वे इसका सेवन भी करते है।घर मे उपयोग के बाद बच जाने पर उसे बेच कर अपनी गुजर बसर भी कर रहे है।जिन ग्रामो में मुनगा के अधिक पेड़ है उन ग्रामो में कुपोषण भी नगण्य ही है।

2016 से लगाया जा रहा- रुपकुमारी चौधरी

तत्कालीन संसदीय सचिव रुप कुमारी चौधरी ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ग्रामीण दौरे के समय अनेक घरो में मुनगा एवम पपीता देख कर इसके बारे में ग्रामीणों से पूछा था।तब ग्रामीणों ने चिरायु की डॉ सुष्मिता द्वारा इसे लगाने के लिए आग्रह किया था।उनके इस प्रयास से सुश्री चौधरी ने डॉ सुष्मिता को बुलाकर उसका उत्साह वर्धन भी किया था।इसके अलावा डॉ सुष्मिता की कुपोषण के विरुद्ध सफल होती इस लड़ाई के कारण स्थानीय जनपद पंचायत एवम नगर पंचायत द्वारा उनका प्रमाण पत्र देकर सम्मान भी किया जा चुका है।

जानकारी नहीं-डाँ. मुकुंद राव 

जिले के किसी अन्य डाक्टर द्वारा इस तरह कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाए जाने की जानकारी के संबंध में जब आरबीएसके कंसल्टेंट डाँ. मुकुंद राव से जानकारी चाही गई तो उनका कहना था कि वे 2016 से पदस्थ हैं पर अन्य किसी डाक्टर द्वारा ऐसे प्रयास की कोई जानकारी उनके पास नहीं है।