महासमुंदः प्रधानमंत्री आवास की बाट जोहते 6 बरस से यात्री प्रतीक्षालय बना ठिकाना

अब तक सर्वे सूची में नाम नहीं, पंचायत प्रस्ताव पर अब तक फैसला नहीं

रजिंदर खनूजा,पिथौरा। 6 बरस पहले कच्चा मकान भारी बारिश के कारण ढह गया। तब से यह परिवार प्रधानमंत्री आवास की मांग करता आ रहा है। यह भूमिहीन परिवार के 6 सदस्यों के साथ  लिहाजा गांव वालों की मंजूरी से 6 बरस से यात्री प्रतीक्षालय को अपना ठिकाना बना रखा  है। यह हाल है महासमुंद जिले के पिथौरा ब्लाक के गांव साई सरायपाली का।

स्थानीय जनपद अधिकारी प्रदीप प्रधान ने  बताया कि उक्त परिवार का नाम पूर्व की सर्वे सूची में हो सकता है। उसे दिखाया जाएगा और नए सर्वे में इनका नाम प्रधान मंत्री आवास में जोड़ा जा सकता है।

पिथौरा विकासखण्ड के दूरस्थ ग्राम साई सराईपाली निवासी जयंत निषाद अपने परिवार के 6 सदस्यों के साथ ग्राम के ही यात्री प्रतीक्षालय में अपनी गुजर बसर कर रहा है। इनके पास ना तो स्वयं का मकान है और ना ही मकान बनाने के लिए जमीन है और ना ही पैसा। लिहाजा यह परिवार इसी यात्री प्रतीक्षालय में रहकर विगत 6 वर्षों से अपना जीवन यापन करने मजबूर है।

ग्रामीणों ने इस परिवार के बारे में बताया कि  इस परिवार को मात्र प्रधानमन्त्री आवास योजना से ही मकान मिल सकता है अन्यथा इस परिवार को अपनी इसी दुर्भाग्यजनक स्थिति में जीवन यापन करना पड़ सकता है।  जिसकी आस में यह परिवार आज भी बैठा हुआ है । गरीबी के चलते यह परिवार भागदौड़ नहीं कर सकता लिहाजा लालफीताशाही की मार से यह परिवार भी पीड़ित है ।

ज्ञात हो कि पिथौरा ब्लाक मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बसे ग्राम साईं सरायपाली मैं निवासरत जयंत निषाद पिता स्वर्गीय धरमसिंह निषाद  अत्यंत ही गरीब परिवार है। भूमिहीन इस परिवार के पास रहने के लिए एकमात्र स्वयं का कच्चा मकान था वह भी आज से करीब 6 वर्षों पूर्व भारी बारिश के चलते ढह गया और रहने के लिए इनके पास कुछ भी नहीं रहा । ग्राम वासियों ने इस परिवार की मजबूरी देखते हुए इन्हें ग्राम में बने यात्री प्रतीक्षालय में आश्रय दिया गया।जहां यह परिवार विगत 6 वर्षों से मकान का रूप देकर रह रहा है ।

एक ही कमरे में जयंत निषाद(32), पत्नी जीरा बाई(30), मां मांग मोती(50 तथा तीन बच्चों रितु(10) , दीपांजलि(8) एवं पुत्र अंकित (6) मिलाकर छह लोग निवासरत है  भूमिहीन होने के कारण किसी तरह रोजी मजदूरी कर यह परिवार अपना जीवन यापन कर रहा है ।

आज तक स्वीकृत नहीं हो सका प्रधानमंत्री आवास

हैरत की बात है कि विगत पांच वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकासखण्ड में हजारों आवास बन चुके है। इनमें अधिकांश आवास अपात्रों को भी दिए जाने की खबरें सुर्खियां बनती रही हैं।कुछ मामलों में भारी लेनदेन या किस्तों की गड़बड़ी की बात भी सामने आ चुकी है।परन्तु आज इस निरीह मजदूर की व्यथा किसी ने नहीं सुनी जबकि पूरी पंचायत के पदाधिकारी एवम अफसर भी इस बात से वाकिफ है कि उक्त निर्धन परिवार आवासहीन है और उसे सिर छुपाने के लिए भी विश्राम गृह का सहारा लेना पड़ा है।

 सूची में नाम नहीं-सचिव

ग्राम पंचायत के सचिव रवि लाल चौहान का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास वाली सूची में इस परिवार का नाम नहीं है जिसके कारण इस योजना का लाभ उसे अभी तक नहीं मिल सका है लिहाजा ग्राम पंचायत से पृथक से प्रस्ताव बनाकर जनपद कार्यालय को भेज दिया गया है किंतु स्वीकृति नहीं मिल पाई है।

शासकीय मुआवजा नहीं मिला

दूसरी ओर बारिश से मकान टूटने पर भी इस परिवार को कोई भी शासकीय मुआवजा नहीं मिला। ज्ञात हो कि भारी बारिश के चलते कच्चे मकान के ढह जाने से राजस्व विभाग के द्वारा क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा राशि पीड़ित परिवार को दिया जाता है।

प्रतिवर्ष पलायन करते परिवार

यह परिवार प्रतिवर्ष मां को यहां छोड़कर भट्टा चले जाते है।  इनके दोनों छोटी पुत्री ऋतु और दीपांजलि भी पढ़ाई लिखाई छोड़कर ईंट भट्ठे में काम में हाथ बटाते हैं ।

बहरहाल पंचायत एवम विकासखण्ड के विभागीय लेटलतीफी  और लापरवाही के चलते गरीब  मजबूर परिवार को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नही मिल सका है । अब भी गांव में बने यात्री प्रतीक्षालय में दिन काट रहा है ।

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