Exclusive कोरिया के जंगल में माता सीता का चूल्हा आज भी मौजूद

वनवास के दौरान राम के वनगमन मार्ग पर कई चिह्न आज आस्था का केंद्र

चंद्रकांत पारगीर,कोरिया। बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि वनवास के दौरान कोरिया जिले में भगवान राम और लक्ष्मण के साथ आई सीता ने जिस चूल्हे पर भोजन बनाया था वो आज भी रावतसरई के जंगलों में आज भी मौजूद है।इनमें सोनहत के रावतसरई के जंगलों में पडने वाला सीता चूल्हा है वहीं सुरजपुर जिले में सीता लेखनी, लक्ष्मण पंजा के साथ कई ऐसे स्थान है जो उनके यहां से जाने की याद ताजा करते हैं।

छत्त्तीसगढ प्रदेश के उत्तरी छोर में स्थित कोरिया जिला कोयले की खान व प्राकृतिक घने जंगलों के लिए ही प्रसिद्ध नही है वरन रामायण काल में भगवान राम का वनवास के दौरान वन गमन मार्ग के लिए भी जाना जाता है। अब सरकार इसे पर्यटन के रूप में विकसित कर रही है। परन्तु इस मार्ग पर पडने वाले भगवान राम सीता और लक्ष्मण से जुडे कई ऐसे स्थान है जिस पर सरकार की नजर नहीं पड़ी है।

घने जंगलों के बीच आस्था का केंद्र सीता चूल्हा
वन गमन के दौरान भगवान राम सीता व लक्ष्मण कोरिया जिले के भरतपुर जनपद अंतर्गत ग्राम हरचौका में प्रवेश किये इसके बाद भरतपुर जनपद क्षेत्र के जंगलों से होते हुए भगवान राम सीमा कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड में प्रवेश कर आगे गुजरते गये। सोनहत  विकासखंड के घने जंगल के बीच में भी महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र स्थित है जो सिर्फ पास के ग्रामीणों को ही पता है।

इसके अलावा सोनहत विकासखंड अन्य क्षेत्रों को महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल के बारे में अब तक किसी तरह की जानकारी नही है। ऐसे में जिले के अन्य क्षेत्रों के लोगों को इसकी जानकारी होने की उम्मीद नही की जा सकती हैं। गुमनामी के कारण ही पुरातत्व विभाग को भी जानकारी नहीं हो पायी है। यह क्षेत्र भी इतिहासिकारों के लिए शोध का विषय है।

जानकारी के अनुसार सोनहत विकासखंड अंतर्गत ग्राम रावतसरई जो कि कोरिया का सीमावती गांव है जिसके बाद सूरजपुर जिले की सीमा शुरू होती है। ग्राम रावतसरई की सीमा से निकलकर जब जंगलों में काफी अंदर में प्रवेश करते है तो रामायण काल में पत्थरों को तराशकर बनाये गये सीताचूल्हा आज भी स्थित है जो क्षेत्र के ग्रामीणों का महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है।

समय समय पर क्षे़त्र के ग्रामीण पूजा अर्चना के लिए भी पहुंचते है। इस आस्था के केंद्र के बारे में ग्राम रावतसरई निवासी शिवमंगल सिंह उम्र लगभग 36 वर्ष ने बताया कि जब भगवान राम सीता वनवास पर निकले तो यहां भी पहुंचे और इसी चूल्हे में खाना पकाते थे जो आज पत्थर का हो गया है। जिस पर क्षेत्र के ग्रामीणों की विशेष आस्था आज भी बनी हुई है।

जलस्रोत जो कभी नहीं सूखता
सीता चूल्हा के पास में ही पत्थरों के बीच से शीतल जल निकलता है ग्रामीण बताते हैं कि यही से सीता जी भोजन पकाने के लिए पानी ले जाती थी इस स्थल का पानी कभी भी नहीं सूखता है। जंगल में इसके कुछ दूरी पर जाने पर भतपहरी नामक उॅचा पत्थर है। इस पत्थर के संबंध में ग्रामीणों की मान्यता है कि सीता जी द्वारा यही पर चावल रखे गए थे जो कालांतर में पत्थर बन गए है। भतपहरी से कुछ दूर आगे घने जंगलों में जाने पर दो गिद्ध जो कि अब पत्थर बन जाने की बात ग्रामीण बताते है।

चूल्हे को हल्की क्षति पहुंचाई तो पड़ा परेशानी में
ग्राम रावतसरई के शिवमंगल बताते हैं कि जब वह किशोर था तब जंगल स्थित सीता चुल्हा के एक हिस्से को थोडा सा कुल्हाडी से मारकर हल्की क्षति पहुंचा दी थी। जिसके बाद से उसका एक पांव में काफी सूजन आ गया था और घाव बनता जा रहा रहा था।  जब घर वालों को वास्तविकता को बताया तो घर वालों ने उसे सलाह दी कि थोडा सा अक्षत ले जाकर सीताचूल्हा में छिंटकर भगवान से क्षमा मांग लो। उसने ऐसा किया और क्षमा मांगने के दूसरे दिन ही बिना किसी दवा के पांव का सूजन ठीक हो गया। जिससे कि वह भी आश्चर्य चकित रह गया। तब से उसकी भी आस्था सीता चूल्हा को लेकर हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय से सीता चूल्हा पूज्यनीय स्थल के रूप पूजा जाता है।

सूरजपुर जिले में भी कई ऐतिहासिक तथ्य
वनवास के दौरान भगवान राम कोरिया जिले में लंबा समय बिताया इसके बाद सोनहत विकासखंड के ग्राम पत्थरगवां के जंगलों से निकलने के बाद भगवान श्री राम सूरजपुर जिले की सीमा मे प्रवेश किये। सूरजपुर जिले में भी कई ऐसे प्रमाण है जिसके पीछे मान्यता है कि भगवान राम सीता इस क्षेत्र से समय बिताया और गुजरते गये।

जानकारी के अनुसार राम सीता से जुडे एक ऐसा ही प्रमाण सूरजपुर जिले में सीतालेखनी पहाड है। सीतालेखनी को प्रमाणित बताया जा रहा है जिसमें अभी और शोध किये जाने की जरूरत है। जानकारी के अनुसार सुरजपुर जिले के ओडगी विकासखंड मुख्यालय से करीब  35 किमी दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत जेहला के पहाडी को सीतालेखनी के नाम से जाना जाता है।

क्षेत्रीय ग्रामीणों की पुरखों से चली आ रही मान्यता है जब भगवान श्रीराम इस क्षेत्र में वनवास के दौरान पहुंचें तब सीता जी ने क्षेत्र की महिलाओं को पत्थरों पर लिखते हुए देखा जिसे वे समझ नहीं पायी थी। इस दौरान भगवान राम ने सीता जी को अक्षर ज्ञान कराने के निर्देश लक्ष्मण को दिये। इसके बाद इसी क्षेत्र की पहाडी के पत्थरों पर लक्ष्मण ने सीता जी को अक्षर ज्ञान कराया जिसे आज क्षेत्रीय ग्रामीण सीता लेखनी के नाम से जानते है।

सूरजपुर जिले में रामायणकाल के रामगमन के ऐसे कई और ची_ मौजूद है जिनमें लक्ष्मण पंजा, जोगीमाडा, सारासोर, बिलदुरा, सीतापॉंव आदि  है जिन पर क्षेत्र के लोगों की आस्था बनी हुई है।