प्रधान पाठ बैराज का भार कम करने पौन अरब का नया बांध

डूबान में आएंगे दो गांव, विरोध में एकजुट ग्रामीण

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। खैरागढ़ ब्लॉक के लछना पंचायत में स्थित प्रधानपाठ बैराज के बढ़ते भार को कम करने के लिए प्रशासन ने जलाशय के ऊपरी हिस्से में नए बांध निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। तकनीकी रूप से जल संसाधन विभाग नए बांध निर्माण की जरूरत पर जोर दे रहा है। विभाग तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए बांध निर्माण के लिए जल्द ही प्रभावित दो गांव लछनाटोला और जोगीदल्ली की जमीनों का अधिग्रहण भी शुरू करेगा। वहीं दोनों गांव के बाशिंदो को अन्यत्र विस्थापित किया जाएगा। दस साल के लंबे अंतराल के बाद दो साल पहले बैराज अस्तित्व में आया है।
बताया जाता है कि इस साल बारिश में बैराज के गेट के टूटने के पीछे अफसरों ने बांध की कमी को भी एक प्रमुख वजह माना हैं। विभाग की ओर से भेजे गए 80 करोड़ के प्रस्ताव को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी हैं। बताया जाता है कि ऊपरी हिस्से में बांध निर्माण से दो लछनाटोला और दल्लीखोली डूबान से प्रभावित होगें। बताया जाता है कि नए बांध के निर्माण से दोनों गांव के करीब 60 से अधिक परिवार को अन्यत्र निवास करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। लछनाटोला और दल्लीखोली की आबादी क्रमश: 250 व 30 हैं। इसके अलावा नए लछना समेत अन्य गांवो की खेती योग्य भूमि भी बांध बनने से डूब जाएगी। 2008 में प्रधानपाठ बैराज की आधाराशिला रखी गई। करीब दो साल पहले बैराज का निर्माण पूरा हुआ। इस संबंध में जलसंसाधन विभाग के ईई जीएन रामटेके ने चर्चा में कहा कि बांध निर्माण से बैराज को मजबूती मिलेगी, इसलिए नया बांध बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

बताया जाता है कि पूववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल में छुईखदान जल संसाधन रेंज में पदस्थ अफसरों ने बड़ी चूक करते हुए उक्त बांध का निर्माण करने की ओर ध्यान नहीं दिया। बताया जाता है कि तकनीकी रूप से बांध का निर्माण उस दौरान होना था। यही कारण है कि बांध के अभाव में बैराज की क्षमता पर विपरीत असर पड़ा हैं। इस साल क्षमता से अधिक जलभराव होने की वजह से बांध का एक गेट टूटकर बह गया। बताया जाता है कि नए बांध निर्माण से आमनेर नदी की धार में कमी आएगी। यानी बारिश का पानी बांध से बैराज तक पहुंचेगा। प्रधानपाठ बैराज निर्माण के दौरान लछना गांव को नए जगह पर विस्थापित किया गया। प्रधानपाठ बैराज के पानी से लगभग 14 गांवों को रबी सिंचाई से लाभ मिल रहा है। वही दो हजार हेक्टेयर में किसान फसल ले रहे हैं। बताया जाता है कि बैराज में 3.4480 मि.क्यूसेक मीटर पानी भरने की क्षमता है। 17 मीटर की ऊंचाई वाले इस बैराज को अब नए सिरे से मजबूती देने के लिए नए बांध का निर्माण करने विभाग तैयारी कर रहा हैं। हालांकि बांध निर्माण से पहले राज्य सरकार को पर्यावरण विभाग की मंज़ूरी भी लेनी पड़ेगी। प्रधानपाठ बैराज निर्माण से जंगल का एक बड़ा हिस्सा भी डूब गया। बताया जाता है जल संसाधन की टीम ने बांध निर्माण के लिए सर्वे का काम भी पूरा कर लिया। हैं।

इधर नए बांध के निर्माण का ग्रामीण पुरजोर विरोध भी कर रहे हैं। पंचायत के सरपंच गणेशराम पटेल ने चर्चा में कहा कि बार-बार निर्माण के नाम पर ग्रामीणों को प्रभावित किया जा रहा हैं। बांध निर्माण से खेती की जमीनी डूब जाएगी। पूर्व में भी प्रभावितों को वायदे के अनुसार लाभ नहीं मिला। गौरतलब है कि प्रधानपाठ बैराज निर्माण से प्रभावित हुए ग्रामीणों को राज्य सरकार ने नौकरी देने तथा उचित मुआवजा देने का भरोसा दिया था। बाद में सरकार ने युवाओं को नौकरी देने के वचन से मुंह फेर लिया। अब नए बांध से प्रभावित होने वाले दोनों गांव में सरकार के खिलाफ आक्रोश पनप रहा हैं।