विशेष : भूलन- द मेज का टाइटल साँग रात भर में तैयार:  प्रवीण प्रवाह

नई दिल्ली में कल सोमवार को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के 67वें संस्करण की घोषणा की गई| जिसमें भूलन- द मेज को सर्वश्रेष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म के पुरस्कार से सम्मानित किया गया| इस फिल्म का टाइटल साँग (शीर्षक गीत) महासमुंद जिले के पिथौरा के प्रवीण प्रवाह ने लिखा है जिसे स्वर दिया है बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध गायक कैलाश खेर ने।

-डॉ. निर्मल साहू 

पिथौरा जैसे कस्बे में बरसों से श्रृंखला साहित्य मंच के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाने में जुटे प्रवीण प्रवाह सुमधुर गीतकार तो हैं ही एक अच्छे चित्रकार भी हैं| प्रवीण प्रवाह से भूलन- द मेज के टाइटल साँग निर्माण को लेकर deshtv ने बात की| आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि गीतकार प्रवीण प्रवाह ने महज 24 घंटे में ही यह शीर्ष गीत लिख डाला|

आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी कि भूलन- द मेज के गीतकार प्रवीण प्रवाह ने महज 24 घंटे में ही टाइटल साँग लिख डाला था| संजीव बख्शी द्वारा लिखित ‘भूलन कांदा’ जिस पर यह फिल्म आधारित है, 3 घंटे के बस के सफ़र में ही पढ़ डाला और रात तक शब्द गीत में ढल चुका था|

वे बताते हैं-   उस दिन मैं कर्नाटक में था। मेरी बेटी संस्कृति, कर्नाटक के एक नवोदय विद्यालय हंगल में पढ़ती थी। उससे मिलने मैं वहाँ गया हुआ था। वापस आते समय जब मैं ट्रेन में था मुझे मनोज वर्मा जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि मैं एक फिल्म बना रहा हूँ जिसके शीर्षक गीत के लिए आपकी रचना चाहिए। रायपुर लौटने पर मैं उनसे मिला।

उन्होंने मुझे संजीव बख्शी द्वारा लिखित पुस्तक ‘भूलन कांदा’ की प्रति दी और कहा कि इसकी कहानी पर मैं एक फिल्म बना रहा हूँ, जिसका टाइटल साँग मेरी दृष्टि में आप ही लिख सकते हैं।

मैंने उनसे पूछा कि और भी बहुत सारे गीतकार हैं लेकिन आपने मुझे ही क्यों गीत रचना के लिए चयन किया। उन्होंने कहा कि मैं आप की गजलें मदन चौहान जी से सुनता रहता हूँ। आपकी रचनाओं का प्रभाव कुछ विशेष होता है, इसलिए मुझे लगता है कि इस कथानक पर आप ही उपयुक्त रचना कर सकते हैं। मैंने उनके इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और कहा कि मैं कोशिश करता हूँ।

उनसे गीत की पटकथा के बारे में थोड़ी बहुत चर्चा होने के पश्चात मैं अपने गृह नगर पिथौरा के लिए बस से रवाना हुआ। बस में ही मैंने वह पुस्तक पढ़ ली। पिथौरा पहुँचने के पहले ही गीत का खाका मन में तैय्यार हो चुका था।

उसी दिन,  रात को ही रचना तैय्यार हो गयी। अगले दिन मैंने मनोज जी को गीत प्रेषित भी कर दिया।

गीत में शहरी भूल भुलैय्या में जन जीवन के भटकाव का चित्रण किया गया है।

बाद में मिलने पर मनोज जी ने गीत की तारीफ करते हुए कहा कि गीत बहुत अच्छा बन पड़ा है, इसे मैं कैलाश खेर की आवाज में प्रस्तुत करूंगा। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी।‌ बाद में कैलाश खेर ने इस गीत को स्वर दिया और ‘भूलन द मेज’ के नाम से यह फिल्म तैयार हुई।

गीतकार प्रवीण प्रवाह बताते हैं- मेरे बारे में कैलाश खेर ने एक विडियो बाइट में तारीफ भी की है जिसे मनोज जी ने मुझे प्रेषित करते हुए बधाई दी है ।

छत्तीसगढ़ी फिल्म भूलन- द मेज  को भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।इसके पूर्व भी ‌अनेक अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार इस फिल्म को मिल चुके हैं। इतनी बेहतरीन फिल्म के लिए मनोज जी ने मुझे गीत लिखने का अवसर दिया इसके लिए वे हार्दिक आभार और धन्यवाद के पात्र हैं।

वे कहते हैं- इस उपलब्धि के लिए मुझे अनेक शुभकामनाएँ प्राप्त हो रही हैं, सभी शुभचिंतकों के प्रति हार्दिक आभार।