नए साल पर विशेष: 7 बरस दृष्टिहीनता में गुजारे, अब दूसरों की आखें कर रहे रौशन

छह विषयों  में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर चुके बीजू पटनायक की बेनजीर पहल

रजिंदर खनूजा, पिथौरा| महासमुंद जिले के पिथौरा  नगर के एक शख्श ने 7 बरस दृष्टिहीनता में गुजारे| नेत्रहीनों को दर्द जाना| बमुश्किल अपने घर का गुजारा कर रहे  अपनी छोटी सी कमाई का आधा दूसरों की आखें रौशन करने में लगे हुए हैं|

पिथौरा  नगर के जगन्नाथ मंदिर के समीप निवासी बीजू पटनायक ने अब अपना पूरा जीवन नेत्रहीनों,दृष्टिबाधित बच्चों एवम दिव्यांगों के अलावा इनकी सेवा करने वालो को उत्साहित करने में बिता रहे हैं|

छह विषयों  में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर चुके बीजू बताते हैं कि वे सन 2003 में विकासखण्ड के ग्राम पिरदा में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में एक अर्जिनवीस के काम हेतु गये थे।

वापसी में शाम को एक टैक्सी से लौटते हुए उनके सिर में हल्की चोट लगी थी। इस चोट के बाद उनकी नजर धीरे-धीरे कम होने लगी।और कुछ ही दिनों में उनकी आखों की रौशनी पुरी तरह जा चुकी थी।

इसके लिए उन्होंने प्रदेश के बड़े से बड़े अस्पतालों में ऑपरेशन भी कराया परन्तु रौशनी लौट नहीं  सकी। उन्होंने लगातार सात वर्षों तक दृष्टिहीन का जीवन जीने के बाद सहज योग का रास्ता अपनाया,जिससे उनके आंखों की रौशनी धीरे-धीरे लौट आयी है।

दृष्टिहीनता का जीवन जीते जीते इस  बात का आभास हुआ कि कैसे दृष्टिहीन लोगों का जीवन कटता होगा।लिहाजा बीजू ने अपना जीवन दृष्टिहीन बच्चों को सिखाने एवम उनके उपचार की शपथ ले ली।

उसके बाद उन्होंने दृष्टि सेवा सदन के नाम से संस्था बनाई और स्कूलों सहित अन्य दृष्टिहीनों की सहायता प्रारम्भ की। इसके लिए जिन बच्चों की उपचार से दृष्टि वापसी की संभावना होती है।उन्हें स्वयम के खर्च से डॉक्टरी चेकअप करवा कर शेष राशि की व्यवस्था हेतु मरीज के परिवार के किसी सदस्य का मोबाइल नम्बर देकर दानदाताओं को उनकी सहायता की अपील करते है। लोगों का इन पर भरोसा था लिहाजा मरीज के परिजनों के खाते में उपचार का खर्च आसानी से पहुच जाता है।

दिव्यांग मित्र मंडल

अब दिव्यांग मित्र मंडल

बदलते समय ने अब अकेले नेत्रहीनों के लिए संघर्ष रहे बीजू को हेमंत खूंटे एवम डॉ देवनारायण साहू के रुप में दो सहयोगी मिल चुके है। अपने सहयोगियों के साथ बीजू ने अब अपने सेवा कार्य का विस्तार कर दिव्यांग मित्र मंडल का गठन कर लिया है।अब वे दृष्टिहीनों के अलावा दृष्टिबाधित एवम दिव्यांगों को आवश्यक मेडिकल सहित अन्य सहायता उपलब्ध कराते है।इसके अलावा उन्होंने अपने स्तर पर दिव्यांगों की देखरेख करने वालो को भी अपनी संस्था दिव्यांग मित्र मंडल के बेनर से सम्मानित भी करते है।

दृष्टिबाधित स्कूलों में बिताते हैं रात

बीजू बताते हैं कि वे जिले के करमापटपर दृष्टिबाधित स्कूल में सप्ताह में कम से कम एक दिन रात बच्चों के बीच बिताते हैं।जिससे उन्हें हो रही परेशानियों के बारे उन्हें पता चले और उसका समाधान किया जा सके। इसके अलावा नेत्रदान सुरक्षा पखवाड़ा में भी स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों एवम ग्रामीणों को नेत्र सुरक्षा हेतु प्रेरित कर देखरेख के टिप्स बताते है।किसी स्कूल में कोई दिव्यांग या दृष्टिबाधित परेशानी में दिखने से ये संस्था स्वयम अपने खर्च से इनका पूरा उपचार करवा रही है।

 मुम्बई की संस्था भी करती है सहयोग

बीजू पटनायक ने बताया कि दृष्टिहीन हेतु आवश्यक ब्रेनलिपि किट हेतु वे मुम्बई की एक संस्था को नाम भेजते है। इसके बाद उक्त संस्था के अधिकारी स्वयम ही घर पहुच कर ब्रेनलिपि किट का वितरण करने पहुचते है।

  दिव्यांग सेवा वास्तव में सच्ची सेवा है

बीजू ने बताया कि उन्होंने दृष्टिहीनता क्या होता है ये प्रत्यक्ष देखा है।सहज योग से उनकी आंखों की रोशनी लौटते ही वे अब अपना जीवन सेवा में समर्पित कर चुके है। उनके साथ जुड़े हेमंत खूंटे एवम डॉ देवनारायण साहू सहित नीलिमा पटनायक एवं श्रीमती डी साहू  के सहयोग से अब उनकी संस्था हौसले की पाठशाला के माध्यम से दुखी परेशान बच्चों एवम अभिभावकों का हौसला बढ़ाने के लिए हौसले की पाठशाला चला रहे है।

प्रतिसप्ताह लगने वाली इस पाठशाला के बाद प्रतिवर्ष 26 जनवरी को आयोजित शासकीय समारोह में दिव्यांगों की सेवा करने वालो का प्रमाणपत्र के साथ अर्थ सहायता कर सम्मान भी किया जाता है।

बीजू सहित सभी सदस्यों का मानना है कि दृष्टिहीनता के बाद से  सेवा कार्य ने उनकी जिंदगी एवम सोच ही बदल दी है।उन्हें इस कार्य से मानसिक शांति मिलती है क्योंकि एक इंसान के लिए सबसे बड़ी सेवा यही है।