Video-EXCLUSIVE ओडिशा का बेटा छत्तीसगढ़ को हरा-भरा करने में जुटा

छत्तीसगढ़ के विकास खण्ड बागबाहरा के देवरी,बांसकांटा ,कुसमी ,बाघामुडा के सड़क किनारे पौधरोपण

रजिंदर खनूजा, महासमुंद। इन दिनों ओडिशा का एक बेटा अपने कुनबे के साथ छत्तीसगढ़ को हरा-भरा करने करने में जुटा है। महासमुंद जिले के ओडिशा की सीमा से सटे बागबाहरा के सड़क से लगे इलाकों में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। वे जंगलों की साफ-सफाई कर भी पौध लगा रहे हैं।

बता दें कि बागबाहरा से ओडिशा खरियाररोड की दूरी महज 18 किमी है। रोटी-बेटी का रिश्ता इस कदर कि लगता ही नहीं कि वह कोई दूसरा राज्य है। सरहदें इस अपनत्व के सामने कहीं नहीं ठहरती। दांत काटी रोटी की तरह दोस्ती यहां आपको देखने मिल जाएगी।

ओडिशा के खरियाररोड निवासी 52 वर्षीय मनोज डागा अपने विशिष्ट अंदाज से पर्यावरण बचाने के अपने विशिष्ट अंदाज से जुटे है।मनोज पशु पक्षी प्रेमी के सांथ सांथ समाज सेवी भी है।वे प्रतिदिन गौ सेवा करते हैं। सुबह उठ कर पक्षियों को दाना देते है।

वे विगत सप्ताह भर से खरियाररोड से 18 किलोमीटर चलकर छत्तीसगढ़ के विकास खण्ड बागबाहरा के देवरी,बांसकांटा ,कुसमी ,बाघामुडा के सडक किनारे पौधरोपण कर रहे है।

मनोज के सांथ ग्राम देवरी के युवाओ की टीम तथा बांसकांटा ज्ञान चेतना नवयुवक समिति बांस कांटा के अध्यक्ष फुलेश्वर निराला उपाध्यक्ष समारू जांगड़े संयोजक व संस्थापक भागचंद निराला एवं समस्त सदस्यगण के सांथ मिल कर बांसकांटा से चौखड़ी तक करीब दो किलोमीटर तक पौधा लगाने में सहयोग कर रहे हैं।

इसके साथ ही गांव में भी पौधों को प्रत्येक घरों में वितरण भी किया गया है। बांसकांटा से बाघामुड़ा की तरफ कोई डेढ़ किमी तक वृक्षारोपण भी किया गया है।

पूरा परिवार समर्पित

ओडिशा खरियाररोड के डागा परिवार के चार भाइयों में तीसरे नम्बर के मनोज डागा कहते हैं, उनका संयुक्त परिवार खरियार रोड में एक प्रोवीजन स्टोर्स चलता है।जिसकी कमाई का चौथाई हिस्सा वे सामाजिक कार्यो में खर्च करते हैं।

उनकी एक बेटी है।अब बेटी भी पिता की राह पर है।प्रतिदिन कितने पौधे लगाए, कितने बचाये कितनो की सेवा की।ये हिसाब भी बेटी लेने लगी है।जिससे पूरे परिवार का उत्साह और भी बढ़ जाता है और वे दुगुने उत्साह से सामाजिक कार्यो में जुट जाते हैं।

मनोज डागा कहते हैं, वर्तमान में पर्यावरण असंतुलन के कारण जो स्थिति बनी है  उसका दुष्परिणाम भयावह होता जा रहा है।प्राकृतिक संरचनाओं के सांथ इंसान खिलवाड़ कर रहे है इस लिए मानव जीवन के सांथ भी प्राकृतिक का तांडव हो रहा है।

वे कहते हैं, इंसान आज भी सच्ची लगन से उजडे वनों को सहेजे अपने घरों खेत बाडी व खाली पडे जगहों पर पौध रोपण करें निश्चित ही भविष्य मे इसका सुखद परिणाम आयेगा।

वर्तमान में मनोज डागा द्वारा अनेक ग्रामो में बनाई गई उनकी टीम उनके ही नेतृत्व में पूरी टीम बड़े स्तर पर पौधों का रोपण कर रही है। और उन पौधों को बड़े करने के लिए सुरक्षा का भी इंतजाम कर रही है ।इसी क्रम में मनोज डागा  के नेतृत्व में अभी तक पूरी टीम द्वारा 3500 पौधों का रोपण किया जा चुका है और 1100 पौधों को सुरक्षित किया जा चुका है ।

जागरूकता अभियान

मनोज डागा स्वयम के प्रयासों के साथ वृक्ष रोपण के  लिए लोगों को लगातार जागरूक भी करते रहते है। वे वृक्षारोपण  करीब14-15  वर्षों से कर रहे है। वर्ष 2010-11में प्रकृति बंधु का एवार्ड नुआपाड़ा ब्लाक से दिया गया था।

इसके बाद पर्यावरण संरक्षण के प्रचार में मेले और बाजारों में भी जाने लगे ट्रेन,बस सभी जगहों पर प्रचार कर चुके है, राजिम मेला में 2 बार, खल्लारी मेला में एक बार, नृरसिंघनाथ में 5,6 बार इसके अलावा कश्मीर से कन्याकुमारी तक इधर राजस्थान से बंगाल कलकत्ता तक प्रचार अपने तरीके से कर रहे है।

प्राणियों के भोजन वाले पौधों को प्राथमिकता

मनोज डागा बताते है कि अब जंगलो में वन्य प्राणियों एवम पशु पक्षियों के भोजन की कमी को देखते हुए उन्होंने इन जीवों के भोजन पैदा करने वाले पौधों का रोपण प्रारम्भ किया है। इनमें पीपल,बरगद,जामुन,जाम, गंगा इमली,तेंदू,आम एवम इमली जैसे अन्य वन्य प्राणियों के पसंदीदा पेड़ का रूप लेने वाले पौधों का रोपण करने लगे है।

इसके लिए वे पंचायतो में जाकर युवाओं को इसके लिए तैयार करते है और उन्ही के हाथों जंगलोँ के बीच खुली जगह पर वृक्षारोपण करते है। उन्होंने बागबाहरा के समीप ग्राम देवरी के युवाओं की एक 17 सदस्यीय टीम तैयार की है।इसका नाम युवा देवरी है।ये टीम ग्रामीणों को जागरूक करने के अलावा जंगल की रक्षा के लिए भी संकल्पित है।

रक्त दान भी

मनोज डागा लगभग 58 बार रक्त दान कर चुके है वहीं 50 से अधिक बार रक्तदान कैम्प लगा चुके है वे बताते है कि इंन सभी कामों से मुझे आत्मसंतुष्टि मिलती है यदि इंसान दृढसंकल्पित हो जाए तो हर असंभव काम संभव हो सकता है।