शिक्षाकर्मी : 22 साल से मिल रहा आश्वाशन, अब सिर्फ संविलियन चाहिए


रायपुर। संविलियन को लेकर सरकार हमें 22 साल से आश्वासन ही दे रही है। सरकार ने हर बार हमसे छल किया। हमारे वाजिब मांगों पर भी सरकार का रवैया उपेक्षापूर्ण बना हुआ है। अब हमे सिर्फ संविलियन चाहिए। ये ताव शिक्षाकर्मियों ने सरकार के खिलाफ दिखाए है। संघ के संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा कि अब तक कमेटी की अनुशंषा, रिपोर्ट जैसे मामलों में सरकार हमे उलझाए हुए है पर अब हमे हमारा हक संविलियन ही चाहिए। दुबे ने बताया कि संविलियन की मांग को लेकर अब प्रदेश के सभी 90 विधानसभा क्षेत्र में संविलियन संकल्प सभा का आयोजन किया जाएगा। इसमें शिक्षक पंचायत एवं नगरीय निकाय मोर्चा के सभी पदाधिकारियों को जिम्मेदारी बांटी गई है। इस सभा में सिविल सोसायटी, शाला प्रबंधन समितियां, समाजसेवी, शिक्षाविद्, पत्रकार, मीडियाकर्मी, विद्यार्थी व उनके पालक, कर्मचारी संगठन, वकील समेत शिक्षाकर्मियों के रिश्तेदारों को भी आमंत्रित किया जाएगा। दुबे ने बताया कि हम लगातार अपनी मांगों को लेकर लड़ रहे हैं। फिर भी सरकार हमारी मांगो को नहीं सुन रही है। हमने 20 नवंबर से 4 दिसंबर तक आंदोलन किया, तब सरकार ने हमें आश्वासन दिया कि तीन महीने में हम आपकी मांगों को पूरा करेंगे, लेकिन आज 5 महीना बीत जाने के बाद भी हमारी मांगों को नहीं सुना गया।

सरकार का रवैय्या सकारात्मक नहीं
भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में शिक्षाकर्मियों के संविलियन करने की बात कही थी। हमें लिखकर दिया गया था कि शिक्षाकर्मियों का संविलियन किया जाएगा। उसके बाद आज तक संविलियन को लेकर सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं रहा। हम मानसिक रूप से प्रताड़ित हैं, सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं किया। 15 साल बीत जाने के बाद भी हमें कुछ नहीं मिला, कुछ नहीं दिया गया। आज बच्चे टीचर बनने से पहले सोचेंगे। इतने सालों में रमन सरकार ने केवल वादे किए हैं।