बस्तर के बच्चे इन दिनों पढ़ रहे शांतिनिकेतन की तरह

पढ़ाई तुंहर दुआर कार्यक्रम , युनिसेफ भी कर रहा मदद

बस्तर। कोरोना संक्रमण के इस दौर में शहरी इलाको में आनलाइन पढ़ाई का दौर जारी है। पर बस्तर जैसे सुदुर गांव जहां नेटवर्क और स्मार्टफोन नहीं वहां के स्कूली बच्चों की भी पढ़ाई चल रही है। पढ़ाई तुंहर दुआर कार्यक्रम के तहत यह सब हो रहा है। बालिंटियर शिक्षक, पारा, टोला, मोहल्ला में पहुंचकर शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। बस्तर के बच्चे भी लंबे समय बाद इस तरह की कक्षाओं से उत्साहित भी  हैं और लगन से पढ़ाई कर रहे हैं। शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने प्रकृति की निकटता के साथ पढ़ाई की इसी संकल्पना को जन्म दिया था।

जिला प्रशासन और युनिसेफ द्वारा चलाये जा रहे सीख कार्यक्रम में वालंटियर्स घरों पर सुरक्षित स्थानों में बच्चों को खेल-खेल के माध्यम से पढ़ाई करा रहे हैं। नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील बस्तर के कई ऐसे इलाके हैं, जहां नेटवर्क की समस्या के साथ अधिकांश बच्चों, पालकों के पास एंड्रायड स्मार्ट फोन की भी समस्या है। ऐसे में आनलाइन के साथ ऑफलाइन पढ़ाई कराने की पहल की गई, ताकि बच्चों का लर्निंग लेवल और शिक्षा गुणवत्ता का स्तर बनें रहे।

पारा,टोला, मोहल्ले में सोशल डिस्टेंस का पालन, मास्क या रुमाल का उपयोग करते हुए वालंटियर्स रोज एक घंटे पढ़ाई करा रहे हैं। यूनिसेफ से मिले ऑडियो, वीडियो सहायक सामग्री का उपयोग करते हुए सीख कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

सुकमा जिले से पढ़ई तुंहर दुआर की यह तस्वीर मूरतोडा के गोल्लागुड़ा की है जहां पेड़ के नीचे दरी बिछाए बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।बच्चे प्राचीनकाल में ऋषि मुनियों के आश्रम में दिए जाने वाले शिक्षा की तरह अर्जन करते दिख रहे हैं।

छोटे समूह में पढ़ाई, पेड़ के नीचे या घर के आंगन हो रही है और साथ ही सामाजिक दूरी का सुरक्षा के साथ पालन भी।