देश-विशेष : अब तक ताला नहीं खुला फिर भी “बी ग्रेड स्कूल”

कोरिया के वनांचल झापर स्कूल का हाल

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के वनांचल में स्कूली शिक्षा कैसी है इसका एक नमूना भरतपुर जनपद के ग्राम झांपर का प्राथमिक स्कूल है। शिक्षा सत्र शुरू होने के 5 माह बाद भी स्कूल में ताला लटका है। इतना होने के बावजूद झांपर बी ग्रेड का स्कूल है। दूरस्थ दुर्गम होने के कारण के कारण विभाग मानिटरिंग भी नहीं कर रहा है। शिकायत पर शिक्षा विभाग ने जांच की और इसे सही पाया पर निदान अब तक नहीं हो सका है। हालाकि जिला शिक्षा अधिकारी का दावा है कि स्कूल खुले इसका प्रयास किया जा रहा है।


कोरिया जिले के दुर्गम क्षेत्र में स्थित ग्राम झांपर भरतपुर जनपद के देवसील ग्राम पंचायत अंतर्गत आता है। यह सोनहत के रामगढ़ से 7 किमी दूर है। यहां वर्ष 2008 में एक प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कराया गया ताकि क्षेत्र के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मिल सके। दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई जिनमें से एक का तबादला हो चुका है। शेष एक शिक्षक लम्बे समय से नदारत हैं। मीडिया में खबर आने के बाद वर्ष 2016 के दिसंबर में तत्कालीन कलेक्टर एस प्रकाश दुर्गम क्षेत्र झांपर पहुंचे थे और उन्होंने स्थानीय एक पढे लिखे युवक को अध्यापन का जिम्मा सौपा था, उस युवक को मानदेय भी दिया जाता था। इस बीच कलेक्टर का स्थानांतरण हो गया और स्कूल में पढा रहे युवक का मानदेय बंद कर दिया गया।

नहीं आते है शिक्षक
गांव के जगदेव, जगन्नाथ, रधुनाथ, बलदेव, शिवधन सिंह, विश्वनाथ, सुखमन, धर्मपाल ने बताया कि दो वर्ष पहले जब पूरा प्रशासन इस दुर्गम गांव में आया था और स्कूल खुलने लगा था और पढाई होने लगी थी, परन्तु अब तो लम्बे समय से विद्यालय में पदस्थ बंद पडा हुआ है, नए सत्र में एक भी दिन स्कूल नहीं खुल पाया है। एक मात्र शिक्षक जो आते ही नहीं है। स्कूल का गेट खुला रहता है। कार्यालय में हमेशा ताला लटका रहता है। बच्चों को पहाड़ा, गिनती तक नहीं आती। स्कूल का शौचालय अधूरा है। मध्यान्ह भोजन भी नहीं मिलता है।

इस सत्र नहीं खुला है स्कूल
इस स्कूल को लेकर ग्रामीण बेहद परेशान है इस सत्र में एक भी दिन स्कूल नहीं खुल पाया है। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल में झंडा नहीं फहरा, जिसके बाद अभिभावक अपने बच्चों के साथ लंबी दूरी तय कर भरतपुर बीईओ से मिले। उन्होंने शिकायत की और अपने बच्चों के भविष्य के लिए चिंता जाहिर करते हुए दूसरे शिक्षक को पदस्थ करने की मांग की, परन्तु निदान नहीं हुआ।

जंगलों के बीच बसा है गांव
सोनहत विकासखंड का झापर दूरस्थ ग्राम है। आवागमन के लिए सड़क मार्ग भी नहीं है। वर्ष 2016 में यहां के दो भाई बहनों की सर्पदंश से मौत हो गयी थी जिनके पीएम के लिए अस्पताल तक ले जाने में दो दिन लगा था। 2016 में इस स्कूल को एक साल से बंद रहने के मीडिया में आने के बाद जिले के कलेक्टर स्वयं स्कूल पहुंचे थे और तब स्कूल के कुछ हालात बदले थे परन्तु एक बार फिर महीनों से स्कूल बंद पडा हुआ है और नए सत्र में एक भी दिन स्कूल नहीं खुल पाया है जिससे अभिभावकों में काफी नाराजगी है।

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