कीट नन्हीपरी लिटिल मिस इंडिया 29 को

ग्रैंड फिनाले के लिए 23 राज्यों की 26 बालाएं प्रतिभागी

भुवनेश्वर। राजधानी स्थित ‘कीट नन्हीपरी लिटिल मिस इंडिया’ का ताज पाने के लिए 29 दिसम्बर को देश के 23 राज्यों से 26 बाला स्पर्धा करेंगी। इस प्रतिस्पर्धा में विजेता तथा दो उपविजेताओं को कीट विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में ताज पहनाया जाएगा। मौके पर अतिथि के रूप में सुमना राव, फेमिना मिस इंडिया 2019; शिवानी जाधव, मिस ग्रांड इंडिया 2019; श्रेया शंकर, मिस इंडिया यूनाइटेड कॉन्टीनेंट्स 2019; किआओ किआओ, मिस वर्ल्ड, क्विन्डांग, शेडोंग, चीन 2017 और दक्षिण कोरियाई प्रसिद्ध अभिनेत्री जंग हाइ-सन समेत दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिय उपस्थित रहेंगे। यह जानकारी कीट विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है। जानकारी के मुताबिक ग्रैंड फिनाले के लिए सेमी फाइनलिस्ट का चयन भारत के 24 प्रमुख शहरों में आयोजित ऑडिशन के माध्यम से किया गया था, जो इस एक तरह के सौंदर्य प्रतियोगिता के सही राष्ट्रीय चरित्र को दर्शाता है। चार महीनों तक चले ऑडिशन में प्रत्येक स्थान पर किशोरियों की जबरदस्त भागीदारी रही। विजेता को आकर्षक डिजाइन वाले स्वारोवस्की ताज सहित 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि जिसमें कीट विश्वविद्यालय में किसी भी विषय में अध्ययन के लिए 18 लाख रुपये तक की शुल्क माफी रहेगी।

प्रथम और द्वितीय उपविजेता को क्रमश: 10 लाख रुपये और 9.5 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी जिसमें कीट में पढ़ाई के शुल्क पर छुट शामिल है। शीर्ष तीन विजेताओं के अलावा, कई अन्य खिताब अंतिम दौर में तय किए जाएंगे। जैसे कि : मिस रॉपन्जेल (सबसे सुंदर बाल), मिस फोटोजेनिक (फोटोशूट राउंड में सर्वश्रेष्ठ पोज), मिस सेल्फी (फेसबुक पर अधिकतम लाइक), मिस फैशन (सर्वश्रेष्ठ पोशाक), मिस व्हिजिड (क्विज राउंड में उच्चतम अंक), मिस सिंड्रेला ( सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व), मिस उर्वसी (सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा), मिस कैटवाक (सर्वश्रेष्ठ रैंप वॉक), मिस मोनालिसा (सबसे खूबसूरत मुस्कान वाली सबसे खूबसूरत बाला) और मिस एक्टिव (सबसे सक्रिय बाला)।

उल्लेखनीय है कि ‘कीट नन्हीपरी लिटिल मिस इंडिया ’13-16 वर्ष की आयु के बीच की किशोर लड़कियों के लिए एक टैलेंट शौ है। 2001 में ओडिशा के केंदुझर जिले के एक दूरस्थ और छोटे आदिवासी शहर में इसकी शुरुआत हुई थी। कीट व कलिंग इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (कीस), भुवनेश्वर के संस्थापक, प्रख्यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता प्रो अच्युत सामंत के प्रयास से 2004 में यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम के आयोजन के कुछ सालों की समयावधि में यह राष्ट्रीय स्तर का ‘लिटिल मिस इंडिया’ प्रतियोगिता के रूप में परिचित होने लगी।