कोरियाः फूट पड़ा है हसदेव नदी के उद्गम का रहस्यमयी स्थल

तीन झरनों का अद्भूत नजारा, गुफाओं के आसपास बिखरी छटा

चंद्रकांत पारगीर, बैकुंठपुर।  सरगुजा संभाग की गोद में बसे कोरिया जिले में कई प्राकृतिक नजारे देखने को मिल जाते है जो दो पल के लिए लोगों को सुकून देते है। जिले में स्थित गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान जिसे टाइगर रिजर्व भी घोषित किया जा चुका है, यहां की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती है, यहां से निकलने वाले झरने और हरियाली से अच्छादित जंगल हर किसी का मन मोह लेते है।

कोरिया जिले में स्थित गुरूघासीदास नेशनल पार्क क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बडा नेशनल पार्क है। जहां कई किमी लंबी दूरी तक घने जंगल व बडे बडे पहाड स्थित है। जो कई तरह के प्राकृतिक नजारे समेटे हुए है, कुछ ऐसे है  जो आम लोगों के पहुंच के बाहर है यही कारण है कि ऐसे कई प्राकृतिक नजारों का कई लोगों ने अभी तक दीदार नही कर पाये है। ऐसे ही एक मनमोहक प्राकृतिक नजारा हसदेव नदी के उद्गम पर देखने को मिला।

कोरिया जिले में स्थित गुरू घासीदास नेशनल पार्क पहुंचने के लिए सोनहत जनपद मुख्यालय से नेशनल पार्क के मुख्य मार्ग से कुछ ही दूरी से घने जंगलों व पहाडों के बीच से कुछ दूर अंदर प्रवेश करते ही नेशनल पार्क केी हरियाली मन मोह लेती है।

उबड खाबड व पथरीले रास्तों के बीच कठिनाई से आगे बढते हुए नेशनल पार्क क्षेत्र में एक ऐसी जगह मिली जहां दो तीन प्राकृतिक झरनों की कल कल शांति प्रकृति में शोर मचा रही थी जो मन को लुभाने के साथ ही आनंदित भी कर रहा था।

तीन सुन्दर झरनें

इस स्थल पर दो तीन छोटे किन्तु सुन्दर झरनों को देखा जा सकता है जो अपनी ओर लोगों को आकर्षित करती है। पास ही एक विशाल पत्थरों के बीच में एक गुफा है जो आर पार है। गुफा में प्रवेश करने के पूर्व दूर से गुफा के द्वारा पर कुछ पत्थर फेंके गए जो यह तसल्ली करने के लिए थे कि कही टाईगर या भालू तो गुफा के अंदर नही है।

जब यह यकीन हो गया कि यहां कुछ भी नही है तब गुफा के पार हुए जिसके बाद एक सुन्दर झरना कल कल करता बहता मिला। जिसकी छटा घने जंगलों की बीच प्रकृति के नजारे को और भी खूबसूरत बना रही थी। इसके अलावा पास ही दो अन्य छोटे झरने भी बहते दिखाई दिये जो चट्टानों के सीना को चीरते हुए उॅचाई से नीचे गिर रहे थे जिसका नजारा मन को मोहित कर रहा था।

इसके चारों ओर हरियाली छायी थी यहां तक की पत्थरों जमी काई भी खूबसूरत दिखाई दे रही थी। गौरतलब है कि जिले में अभी भी कई ऐसे प्राकृतिक नजारे है जो ज्यादातर लोगों के पहुंच के बाहर है उनके बारे में स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे लोगों को इसकी कोई जानकारी नही है लेकिन जिले में स्थित गुरूघासीदास नेशनल पार्क क्षेत्र में तो कई ऐसे प्राकृतिक नजारे है जिनके बारे में सिर्फ पार्क क्षेत्र में तैनात वन कर्मियों को ही मालूम है।

कठिनाई से पहुंच लेकिन मिलता है सकून
गुरू घासीदास नेशनल पार्क के शुरूआत क्षेत्र में जिस स्थल पर दो तीन की संख्या में खूबसूरत छोटे झरने बह रही है वहां तक पहॅूचना कठिन है लेकिन जितना कठिन पहुंच है उतना ही सकून झरना स्थल पर पहुंच कर मिलता है।

झरने तक पहुंचने के लिए जंगलों के बीच चलते हुए झरने स्थल तक पहुंचने के लिए एक आर पार गुफा को पार करना पडता है साथ ही एक स्थान पर पत्थर के चटृटानों पर लगभग सीधी चढाई भी करना होता है इन दिनों पत्थरों में फिसलन होने के कारण थोडी सी लापरवाही हुई तो दुर्घटना का कारण बन सकता है।

नेशनल पार्क के साथ टाईगर रिजर्व क्षेत्र भी
जिले में स्थित गुरूघासीदास नेशनल पार्क ही नही है बल्कि इसे टाईगर रिजर्व क्षेत्र भी घोषित किया जा चुका है। पार्क परिक्षेत्र के अधिकारियों की माने तो पार्क के सोनहत रेंज में 4 टाइगर जबकि अन्य रेंज में 2 टाइगर मिलाकर कुल 6 टाइगर मौजूद है। जिनकी मूवमेंट आये दिन ट्रेस किये जा रहे है। अधिेकारियों की माने तो कई बार तो निगरानी के लिए बनाये गये मास्टर टावर कैप के नजदीक तक टाईगर पहुंच जाते है। प्रत्येक दिन टाईगर के मूवमेट पर नजर बनाये हुए है।