कोरोना ने तोड़ दी इंदौर में 200 साल पुरानी हिंगोट युद्ध की परंपरा

देखने हजारों लोग पहुंचते हैं इसलिए प्रशासन ने इस बार हिंगोट युद्ध की अनुमति नहीं दी

इंदौर| कोरोना संक्रमण का असर इंदौर में लगभग 200 साल से चली आ रही हिंगोट युद्ध की परंपरा पर भी पड़ा है। प्रशासन ने इस बार हिंगोट युद्ध की अनुमति नहीं दी है और यही कारण है कि इस बार लोगों को हिंगोट युद्ध देखने को नहीं मिलेगा।

इंदौर के करीब स्थित गौतमपुरा में बीते दो शताब्दी से हिंगोट युद्ध का आयोजन होता आ रहा है, यह पर्व दीपावली के अगले दिन होता है। इसकी तैयारियां कई माह पहले से शुरु हो जाती है। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते आयोजन की अनुमति नहीं दी गई है। बीते दो शताब्दी में पहली बार ऐसा मौका आया है जब यह युद्ध नहीं होगा।

गौतमपुरा थाने के प्रभारी आरसी भास्करे ने आईएएनएस को बताया है कि कोरोना के कारण इस युद्ध की अनुमति नहीं दी गई है क्योंकि इस आयोजन को देखने हजारों लोग पहुंचते हैं और बीमारी के फैलने का खतरा है।

ज्ञात हो कि इंदौर मध्य प्रदेश में कोरोना को लेकर हॉटस्पॉट बना हुआ है। यहां अब तक लगभग साढ़े 35 हजार मामले सामने आ चुके है और सात सौ से ज्यादा लोगों क मौत हेा चुकी है।

इस युद्ध की शुरूआत की अपनी कहानी है। बताया जाता है कि रियासत काल में गौतमपुरा क्षेत्र में सुरक्षा करने वाले लड़ाके मुगल सेना के दुश्मन घुड़सवारो के ऊपर हिंगोट से हमला करते थे और अपने इलाके में आने से रोकते थे। बाद में यह परंपरा धार्मिक मान्यताओं से जुड़ती गई और तब से यह लगातार जारी है।

यहाँ इस युद्ध में दो गांव गौतमपुरा व रुणजी की टीमें आमने-सामने होती हैं। एक कलंगी और दूसरा तुर्रा। दोनों ही दल एक-दूसरे पर हिंगोट के जलते हुए गोले बरसाते हैं और एक दूसरे को परास्त करने में नहीं चूकते। इस युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं।

-आईएएनएस