कमरछठ पर औलादों की लंबी उम्र को लेकर माताओं ने रखा व्रत

राजनांदगांव में पर्व पर उत्साह के साथ महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। संतानों की लंबी आयु की कामना लेकर रविवार को माताओं ने पूरे उत्साह के साथ कमरछठ पर्व पर  व्रत रखा। व्रतधारी महिलाओं ने  भगवान शिव-पार्वती की  कथाएं सुनी।  पूजा-अर्चना करते बच्चों के मंगलकारी भविष्य की कामना की।
कमरछठ यानी हलषष्ठी पर्व पर रविवार को माताओं ने संतानों की दीर्घायु की कामना लेकर  व्रत रखा। हलषष्ठी पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हुए महिलाओं ने दोपहर बाद पूजा-अर्चना शुरू की। सामुहिक रूप से शहरभर में अलग-अलग चौराहों और मोहल्लों में महिलाओं ने भगवान शिव और पार्वती की अलौकिक गाथाओं से जुड़ी कथाएं सुनी।
माना जाता है कि कमरछठ पर्व भगवान शिव के  पूरे परिवार से जुड़ा हुआ है। पूरे परिवार के सदस्यों की कथाओं के जरिये वर्णन किया जाता है। जिसमें मुख्य रूप से भगवान शिव और पार्वती की धार्मिक गाथाएं शामिल है। महिलाएं पूजा-अर्चना के दौरान प्रतीकात्मक रूप से गडढे खोदकर सगरी (तालाब) का निर्माण करती है।
व्रत को लेकर श्रीमती चंदन सोनवानी ने बताया कि बच्चों के लंबी उम्र के लिए यह उपवास किया जाता है। खासतौर पर भगवान शिव समेत उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य की पूजा-अर्चना इस दिन की जाती है।
इसी तरह एक अन्य महिला मृदुला साहू ने बताया कि संतानों की सुख-समृद्धि के लिए भगवान शिव-पार्वती के अलावा धरती माता की भी पूजा-अर्चना की जाती है। एक प्रतीकात्मक रूप से गड्ढा खोदकर तालाब (सगरी) बनाकर पूजा किए जाने की परंपरा रही है। महिलाएं पसहर चावल  (बिना हल की उपज) का सेवन कर व्रत तोड़ती है।
महिलाओं ने आज सगरी में पूजन सामग्रियां चढ़ाई। वहीं भगवान शिव-पार्वती को भोग स्वरूप पसहर चावल, भैंस का दूध, दही, घी, बेल पत्ती, कांशी, खमार, बांटी, भौरा सहित अन्य सामग्रियां अर्पित की। दोपहर तक कथा और धार्मिक रूप से शिव-पार्वती का स्तुति गान करते हुए औलादों की लंबी आयु की कामना की।
इधर बाजार में पूजन सामग्रियों की खरीदी के लिए काफी चहल-पहल रही। पसहर चावल से लेकर अन्य सामग्रियों के दाम बढ़े रहे। पसहर चावल 150 रुपए किलो की दर पर बिका। वहीं भैंस का दूध और घी के दाम भी बेतहाशा कीमत पर रहे।