नहीं रहे छत्तीसगढ़ के “भूषण” अस्पताल में ली आखरी साँसे

रायपुर। स्वंतत्रता संग्राम सेेनानी और पूर्व सांसद केयूर भूषण का गुरुवार को शाम करीब चार बजे निधन हो गया है। वे पिछले कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थे। दो बार रायपुर से सांसद रहे चुके केयूर भूषण की पृथक छत्तीसगढ़ के आंदोलन में भी भागीदारी रही है। श्री भूषण ने 80 से 90 के दशक में रायपुर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा श्री भूषण छत्तीसगढिय़ा और राजभाषा के लिए भी लड़े। उन्होंने दो बार कांग्रेस की टिकट पर रायपुर लोकसभा से चुनाव लड़ा था। केयूर भूषण स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनेता, पत्रकार और छत्तीसगढ़ी साहित्यकार थे। इन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन 1942 में 9 माह की जेल एवं कुल चार वर्ष जेल में काटे। ये किसान मजदूरआन्दोलन से जुड़े एवं अस्सी के दशक में रायपुर से लोकसभा सांसद बने।
केयूर भूषण छत्तीसगढ़ी अउ छत्तीसगढ़ संदेश साप्ताहिक सम्पादन करते हैं। छत्तीसगढ़ी साहित्य के बारे में उनका कहना था कि- ‘छत्तीसगढ़ी साहित्य अब पोठ होवत हे। सबे किसम के छत्तीसगढ़ी साहित्य उजागर होवत हे। जतेक छत्तीसगढ़ी शब्द वोमा काम आही ओतके छत्तीसगढ़ी भाव सुन्दराही। जब छत्तीसगढ़ी मा हिन्दी शब्द सांझर-मिझंर होय लागथे तो ओखर मिठास मा फरक आये लागथे। जिंहा तक हो सकय मिलावट ले बांचय अउ खोजके छत्तीसगढ़ी शब्द ला अपन लेखन मा शामिल करय।

ये है उनका संक्षिप्त जीवन
केयूर भूषण का जन्म 1 मार्च, 1928 ग्राम जाँता, जिला दुर्ग में हुआ था। वे समाजसेवा में छात्रवस्था से कार्यरत हो जाने से मिडिल स्कूल से आगे नहीं पढ़ सके थे। कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी तथा सर्वोदय में कार्य किया और कई बार जेल गये। उन्हें छत्तीसगढ़ शासन का पं. रविशंकर शुक्ल सदभावना पुरस्कार 2001 से सम्मानित किया गया था।

दी कई प्रसिद्ध रचनाएं
केयूर भूषण ने लहर (कविता संग्रह), कुल के मरजाद (उपन्यास), कहां बिलागे मोर धान के कटोरा (उपन्यास), नित्य प्रवाह (प्रार्थना एवं भजन), कालू भगत (कहानी संग्रह), आंसू म फ़िले अचरा (कहानी संग्रह), मोर मयारुक, हीरा के पीरा (निबंध संग्रह), डोंगराही रद्दा (कहानी संग्रह), लोक-लाज (उपन्यास), समें के बलिहारी(उपन्यास), छत्तीसगढ़ के नारी रत्न। इन्होंने सोना कैना (नाटक), मोंगरा (कहानी), बनिहार (गीत), कुल के मरजाद (छत्तीसगढ़ी उपन्यास), लहर (छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह) इत्यादि की रचना भी की थी।