रस्म निभाने चादर ओढ़ाकर छुपाते रहे नाबालिक दुल्हन, रुकी आठ शादियां !


अंबिकापुर। सुरजपुर जिले के रामानुजनगर में अक्षय तृतीया पर रस्म अदाएगी के नाम पर आठ नाबालिक जोड़ो की शादिया कराई जा रही थी। इसकी भनक जब बाल संरक्षण आयोग को लगी तब ग्रामीणों ने दुल्हन को छिपाने एक चादर का सहारा लिया। चादर ओढ़ बैठी नाबालिक की तरफ जब आयोग के सदस्यों की नज़रे गई तबी मामलें का खुलासा हुआ। बाल संरक्षण अधिकारी मनोज जायसवाल ने बताया कि ग्राम गोकुलपुर में एक, बरहोल में एक और केशवपुर में छह जोड़ों के विवाह की तैयारी चल थी। संयुक्त टीम ने जब इन घरों में पहुंचकर दस्तावेजों का परीक्षण किया, तो सभी नाबालिग पाए गए। इन सभी का 18 अप्रैल अक्षय तृतीया के दिन विवाह होना था। इस पर टीम ने नाबालिग लड़की-लड़के के माता-पिता और अन्य परिजनों को समझाइश देकर बाल विवाह के लिए बने कानून की जानकारी दी। टीम ने उन्हें बताया कि बाल विवाह करना कानूनन अपराध है। इसके दोषियों को सजा के साथ ही अर्थदंड का भी प्रावधान है। इस समझाइश के बाद लड़के-लड़की के परिजन मान गए. उन्होंने हामी भरी कि जब तक बच्चे बालिग नहीं हो जाते, वे विवाह नहीं करेंगे।

अग़र हुई शादी तो तैयार रहे ज़िम्मेदार
इधर बाल विवाह रुकवाने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को सख्त निर्देश ज़ारी करते हुए बाल विवाह को रोकने कहा है। आयोग ने ज़ारी आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया है कि यदि नाबालिकों की शादी हुई तो ज़िम्मेदार अफ़सर कार्यवाही के लिए भी तैयार रहे। गौरतलब है कि साल 2017 में बाल विवाह के कुल 109 मामलें अकेले छत्तीसगढ़ से प्रकाश में आए थे। जिसके बाद आयोग ने सख्ती दिखाई है।