आदिवासियों पर दर्ज़ मुक़दमों की समीक्षा शुरू, पहली बैठक में ये फ़ैसले

नक्सल क्षेत्रों में आदिवासियों पर दर्ज़ मामलों में की समीक्षा शुरू

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले पर अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर दर्ज अपराध की समीक्षा शुरू हो गई है। इसके लिए सोमवार को पहली बैठक राजधानी के सर्किट हाउस में हुई। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक ने अध्यक्षता की है। पटनायक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महाधिवक्ता कनक तिवारी, प्रदेश के डीजीपी डी एम अवस्थी, नक्सल ऑपरेशन डीजी गिरधारी नायक, गृह सचिव अरुण देव गौतम, सचिव आदिम जाति विकास डीडी सिंह, उप पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, सीआईडी उप पुलिस महानिरीक्षक संजीव शुक्ला और डीआईजी जेल केके गुप्ता भी इस बैठक में मौजूद रहे।

नक्सल समीक्षा                                     बैठक में समिति के सदस्यों ने बस्तर रेंज के जिले कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर के साथ राजनांदगांव जिले को मिला कर कुल आठ नक्सल प्रभावित जिलों में दर्ज हुए अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों में समीक्षा की गई। इसमें इन इन जिलों में अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ दर्ज भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत एवं स्थानीय विशेष अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों की पूरी समीक्षा की गई है। साथ ही साथ उक्त प्रकरणों में कोर्ट की कार्यवाही की वर्तमान स्थिति का भी संज्ञान समिति ने लिया है। इन सभी प्रकरणों के अवलोकन और विचार-विमर्श के बाद समिति द्वारा प्रत्येक प्रकरणों के गुण और दोष के आधार पर समीक्षा होगी। जिसमें संबंधित लोगों के खिलाफ उक्त कार्रवाईयों में न्यायोचित कार्रवाई, समयबद्ध कार्य योजना के तहत करने का फैसला लिया गया है।

इन्हें सौपी गई ज़िम्मेदारी
नक्सल घटना से संबंधित प्रकरणों में सुंदरराज पी, भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं एवं स्थानीय विशेष अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में कार्रवाई के लिए संजीव शुक्ला, आबकारी अधिनियम से संबंधित प्रकरणों में सचिव आयुक्त आबकारी विभाग को आवश्यक समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इन तीनों अधिकारियों को सचिव आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर आगामी कार्यवाही की अनुशंषा का भी निर्णय इस समिति की पहली बैठक में लिया गया।