Big News :आख़िरकार KSK प्लांट में लगा ताला…नहीं सुलझा कर्मचारी प्रबंधन का विवाद

हफ्ते भर में दो दिन प्लांट रहा था बंद, चार एफआईआर दर्ज़

जांजगीर चांपा। प्रदेश के बड़े बिजली उत्पादक प्लांटों में से एक KSK महानदी पॉवर कम्पनी लिमिटेड में आखिर कार ताला लटक ही गया। लंबे समय से श्रमिक और प्लांट प्रबंधन के बीच चल रहे टकराव के बाद आखिरकार प्लांट को प्रबंधन ने बंद करने का फैसला लिया है। और आज सुबह तड़के तकरीबन साढ़े 4 बजे प्लांट को बंद कर दिया। प्लांट खाली कराने के बाद में गेट पर सीलिंग का नोटिस भी चस्पा कर दिया गया। इस प्लांट को बंद करने से अब वहां काम कर रहे 4 हज़ार से भी ज़्यादा मज़दूर, अधिकारी और कर्मचारी एक झटके में बेरोजगारी की चपेट में आ गए है।


मिली जानकारी के मुताबिक श्रमिकों और प्लांट प्रबंधन के बीच कई महीनों से जंगी टकराव चल रहा था। जिसमे कर्मचारी खूनखराबे तक भी उतर आए थे। कई दौर की बात चित के बाद प्रबंधन ने लॉक आउट का फैसला लिया। प्रबंधन के मुताबिक़ श्रमिकों द्वारा किए गए मारपीट और श्रमिकों द्वारा प्लांट ट्रिपिंग होने की वज़ह से यहाँ तालाबंदी की गई है। प्रबंधन ने दस सितंबर और ग्यारह सितंबर की तारीख़ों का उल्लेख घटनाओं के समर्थन में किया है।

ये है विवाद की जड़
केएसके महानदी पॉवर कंपनी लिमिटेड में दो श्रमिक संगठन छत्तीसगढ पॉवर मज़दूर संघ और यूनाइटेड मज़दूर संघ के बिच वर्चस्व की लड़ाई है। इनमें एक समुह उन मज़दूर परिवारों का जिनकी ज़मीन पर ये प्लांट चल रहा है और दूसरा समूह उन श्रमिकों का है जो ठेकेदारी के मार्फ़त काम कर रहे है। सालों से चल रहे इन दोनों के बीच विवाद तब गहराया जब मसला वेतन बढ़ाने का आया।जिनकी जमीन पर प्लांट चल रहा था ऐसे मज़दूर वेतन बढ़ाने की लेकर लामबंद हुए, इसे देख ठेका में काम कर रहे प्लांट कर्मियों ने श्रमिक समान वेतन की माँग कर दी। और प्रबंधन ने भू विस्थापित श्रमिकों का वेतन बढ़ा दिया गया। जिसके बाद मामला खून खराबे तक जा पंहुचा।

हफ्ते भर में चार एफआईआर
जांजगीर एसपी पारुल माथुर ने मीडिया को इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि बीते एक सप्ताह में चार एफआईआर हो चुकी है, यह संयंत्र प्रबंधन और श्रमिकों के संगठन के बीच का मसला है, लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति नियंत्रित है।