CG FILM : धरना-प्रदर्शन के बाद उतारी गई हिंदी फ़िल्म

हिन्द फिल्म को उतारकार लगाई गई छत्तीसगढ़ी फिल्म

रायपुर। राज्य के सभी फिल्म निर्माताओं सहित छत्तीसगढ़ी कलाकारों ने नारा लगाकर हिन्दी फिल्म लगाने के विरोध में रविवार को राजनांदगाव के कमल छाया मंदिर के सामने धरना प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ी फिल्म ‘‘महू कुंवारा तहूँ कुंवारी‘‘ फिल्म 26 अप्रैल को पूरे प्रदेश में 23 सिनेमा घरों में फिल्म निर्माताओं से अनुबंध कर फिल्म लगाया गया और वहीं राजनांदगांव के कमल छाया मंदिर सिनेमा घर में भी यह फिल्म लगाई गई थी। फिल्म को टाॅकिज में लगाने के एवज में फिल्म के निर्माता और टाॅकिज प्रबंधन के बीच अनुबंध नियमानुसार हुआ था। जिसमें सिनेमा घर का किराया 65 हजार और 90 हजार रूपये होल्ड ओवर रखा था। लेकिन फिल्म 1 लाख रूपये से अधिक की कमाई कर रही थी। इसके बावजुद भी कमल छाया मंदिर सिनेमा घर के मालिक ने फिल्म निर्माता राकी दासवानी के साथ हुए अनुबंध को तोड़ दिया।

महू कुंवारा तहूँ कुंवारी                                                इसके बाद शुक्रवार को रिलीज हुई हिन्दी फिल्म को टाॅकिज में लगाकर छत्तीसगढ़ी फिल्म को हटा दिया। अनुबंध को बिना बताएं तोड़े जाने पर छत्तीसगढ़र फिल्मों के सभी कालाकार इससे दुखी और नाराज थे। जिसके चलते रविवार को सभी कालाकारो ने एकजुटता दिखाते हुए टाॅकिज मालिक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। छत्तीसगढी फिल्म के निर्माताओं सहित अन्य कालाकारो ने राजनांदगांव पहुंचकर सिनेमा घर के बाहर बैठकर टाॅकिज प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को उग्र होते देख टाॅकिज मालिक विनोद राठी ने फिल्म निर्माता से चर्चा की और अनुबंध को तोड़ने को गलत ठहराया।

महू कुंवारा तहूँ कुंवारी                            साथ ही निर्माता से चर्चा के बाद कमल छाया मंंदिर मे हिन्दी फिल्म को उतारकर फिर से छत्तीसयगढ़ी फिल्म ‘‘महु कुंवारा तहुं कुवारी‘‘ का प्रदर्शन शुरू कर दिया। छत्तीसगढ़ सिनेमा प्रोड्यूसर संघ के सचिव मनोज वर्मा ने कहा कि प्रदर्शन के बाद टाॅकिज मालिक को अपनी गलती का एहसास हुआ है,जिससे फिल्म को दुबारा लगाया गया है। वही उन्होने कहा कि टाॅकिजों में छत्तीसगढ़ी फिल्म को तवोज्जो नही देने की बात अब मुख्मयंत्री से की जाएगी ताकि कोई ठोस नियम इस ओर बनाया जा सके।

हर राज्य में 90 दिन का है नियम
छत्तीसगढ़ के आलावा दीगर राज्य में स्थानीय भाषाओँ की सभी फिल्म को साल में 90 दिनों तक प्रदर्षित करने का नियम राज्य सरकारों ने बनाया है। वहीं छत्तीसगढ़ मे छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए अब तक कोई ठोस नियम नही बन पाया है। प्रदेश की राजभाषा छत्तीसगढ़ी घोषित हो चुकी है। अब प्रदेश के कलाकारों को शासन से काफी उम्मीद है, जिससे उनके साथ कोई भेदभाव न किया जाए और प्रदेश में छत्तीसगढ़ी फिल्म को भी दुसरे राज्यों की तरह एक विशेष स्थान मिले।