मजदूर संगठनों की हड़ताल से कोयला उत्पादन प्रभावित, ढुलाई भी ठप

पांच दिवसीय हड़ताल का आज है तीसरा दिन

कोरबा। कोयला उद्योग में शत प्रतिशत एफडीआई लागू करने के विरोध में लामबंद मज़दूर संगठन की हड़ताल का कोयला उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। बीएमएस व एसईकेएमसी ने सोमवार से पांच दिवसीय हड़ताल की शुरूआत की है। 27 सितंबर तक घोषित इस हड़ताल से जिले में संचालित एसईसीएल के भूमिगत व ओपन खदानों में कोयला उत्पादन पर काफी असर पड़ा है। मजदूर नेताओं ने सडक़ व रेल मार्ग से होने वाले कोल परिवहन को भी ठप कर दिया। संयुक्त श्रमिक संगठन ने कोयला उद्योग में एफडीआई की मंजूरी को वापस लेने की मांग की है।


मजदूर नेता खदानों के बाहर सुबह से ही डटे रहे और कर्मचारियों को काम पर नहीं जाने की समझाईश दी। हड़ताल में एटक, इंटक, सीटू, एचएमएस ने सहभागिता निभाई। इंटक जिलाध्यक्ष विकास सिंह व एटक के राष्ट्रीय सचिव दीपेश मिश्रा के नेतृत्व में सीटू मानिकपुर सचिव मोहन सिंह प्रधान, सुनील शर्मा, डी शेखर, महेंदर सिंह, रंजन, पार्षद सीताराम चौहान, आदि ने मानिकपुर व सेंट्रल वर्कशाप में काम बंद कराया। कोरबा एरिया के कई अन्य खदानों में भी पहुंचे।

कोरबा के साथ इन इलाकों में भी हड़ताल
कोरबा के अलावा कुसमुंडा, दीपका, गेवरा एरिया में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखा। संगठन के नेताओं ने कहा कि कोयला उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश अफसर और सरकार के हित में नहीं है। पहले व्यवसायिक खनन के बाद इसे अनुमति देकर कोल इंडिया के अस्तितव को खतरे में डाल दिया है। इस फैसले से कंपनी बंद होने की स्थिति में आ जाएगी।

तो विदेशी कम्पनी भी निकालेगी कोयला
एफडीआई की मंंजूरी से विदेशी कंपनियां भारत में कोल ब्लॉक ले सकेंगी। कोयला खोदकर बाजार में बिक्री भी करेंगी। चूंकि कोल इंडिया कर्मचारियों के वेतन भत्ते पर निजी कंपनियों की तुलना में अधिक पैसे खर्च करती है। निजी कंपनियों का कोयला बाजार में सस्ता बिकेगा, इससे कोल इंडिया का कोयला खरीदने ग्राहक नहीं मिलेंगे। प्रतिस्पर्धा होने से कोयला उद्योग के समक्ष चुनौती खड़ी हो जाएगी। इससे कंपनी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।