Exclusive : नक्सलियों का पर्चा, कवासी लखमा को कहा ग़द्दार

भूपेश सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप

जगदलपुर। राजनीतिक विरोधियों में नक्सलियो के हिमायती माने जाने वाले मंत्री कवासी लखमा पर नक्सलियों ने उद्योगों का समर्थक होने का आरोप लगाया है। जारी पर्चे में में नक्सलियों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि, वह “चुनावी वायदा” भूल गई है, और समाधान के नाम से चल रही पूर्ववर्ती सरकार की रणनीति जारी है।

                   भाजपा शासनकाल में कांग्रेस ने फर्जी मुठभेड़ों के विरोध का केवल दिखावा किया है, और कथित रुप से ग्रामीणों की हत्या और प्रताड़ना जारी है। पर्चे में बीते 14 सितंबर को चिंतलनार के कोतागुडा गाँव में हुई मुठभेड़ को फर्जी क़रार दिया है। ज्ञात हो कि सलवा जूडूम के दौर में कवासी लखमा ने कथित तौर पर जुडूम प्रश्रित हिंसा का विरोध किया था और तब कवासी लखमा सरकार और जूडूम समर्थकों की आँख की किरकिरी बन गए थे।

“चुनाव के पहले आदिवासी हितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाले ढोंगी आदिवासियों का गद्दार धोखेबाज कवासी लखमा सत्ता में बैठते ही आदिवासियों के जल जंगल जमीन व संसाधनों को कौड़ियों के भाव देशी, विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए स्वयं उद्योग मंत्री बन बैठे है। फर्जी मुठभेड़ों का विरोध करना तो दूर उन्हें अंजाम देने वाले डीआरजी गुंडों को इनाम व आउट ऑफ टर्न प्रमोशन यानी उनकी बहादुरी को देखते हुए समय से पहले ही प्रमोशन दे रहे है। उसी की देखरेख में छत्तीसगढ़ भू-अर्जन, पुनर्वास, व्यवस्थापन कानून 2019 पास कराया गया है। जो कि राज्य के किसानों दलितों व आदिवासियों की जमीनों जंगलों खदानों को छीनकर पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए ही बनाया गया है। आदिवासियों को दहशत में डाल कर खनन परियोजना जैसे नंदराज पहाड़ से लेकर उत्तर में हाहलादी, मानपुर तक एवं वृहद बांध परियोजनाओं को शुरू करने के लिए ही फर्जी मुठभेड़ों व मुठभेड़ों, गिरफ्तारियां, गांव पर हमला, अत्याचारों जनता की बेदम पिटाई का सिलसिला जारी है। आदिवासी आवाम के दमन में शोषक शासक वर्गों के हाथों कठपुतली बनकर अपना उल्लू सीधा करने वाला स्वार्थी व आदिवासी विरोधी कवासी लखमा के असली चरित्र से अवगत होकर उसकी चिकनी चुपड़ी बातों का भंडाफोड़ करें। “