जन्माष्टमी : भगवान कृष्ण और आठ का ये है संयोग…

जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण जन्म की मान्यता

रायपुर। जन्माष्टमी हमारे देश का अत्यंत लोकप्रिय पर्व है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल जन्माष्टमी कह देने मात्र से भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का बोध हो जाता है। सनातन धर्म मे आस्था रखने वाले हर आयू वर्ग के लोग इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते है। सदियों पहले धरती पर भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि 12 बजे पूर्ण ब्रह्म भगवान श्री कृष्ण का अवतरण हुआ था। ये दस अवतारो मे प्रमुख तथा सोलह कलाओं से परिपूर्ण थे इसलिए भगवान श्री कृष्ण को पूर्ण ब्रह्म कहा जाता है। इस दिन को ही जन्माष्टमी के रूप मे मनाते है। भगवान श्री कृष्ण के जन्म और आठ आंतक का एक महत्वपूर्ण संयोग आज हम आपको बताते है।

                                       महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ला ने इस जानकारी को साझा करते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था। उनके जन्म के समय का पहर भी आठवां था। भगवान कृष्ण अपनी माँ देवकी के आठवें संतान थे। भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण आठवें अवतार है। कृष्ण जन्म में उनके आठ भाई थे। कृष्णावतार में उन्होंने कुल 16100 रानी के साथ विवाह किया था जिसका योग भी 8 आता है, और कृष्ण की आठ पटरानियां थी।

                     मनोज शुक्ला ने बताया कि उनकी आठ सखीया थी, वे कृष्णावतार में कुल 125 वर्षों तक धरती पर रहे थे जिसका योग भी आठ है। कंस ने भगवान कृष्ण के जन्म से पहले आठ प्रकार के अपशगुन देखे है। उनका तारक मंत्र भी आठ शब्दों से मिलकर बना है। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।। इन सभी चीज़ों के एक वृहद् संयोग की वज़ह से ही भगवान् कृष्ण के जमन को जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है।

कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी
पंडित मनोज शुक्ला ने बताया ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सप्तमी युक्त अष्टमी का व्रत नही रखना चाहिये। 23 तारीख शुक्रवार का व्रत इसीलिये त्याज्य है कि सूर्योदय सप्तमी में तथा उसके बाद 2 घण्टा 19 मिनट तक सप्तमी तिथि ही है साथ ही दिनभर व जन्म उत्सव समय मध्यरात्रि में भी रोहणी नक्षत्र नही है। 24 तारीख शनिवार को जन्माष्टमी व्रत मान्य है। क्योकि सूर्योदय से लेकर 2 घण्टा 42 मिनट तक अष्टमी तिथि व पूरे दिनभर रात भर रोहणी नक्षत्र है।

ये है जन्माष्टमी की पूजन विधि
इस दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर तीर्थ स्नान करना चाहिए । व्रत -उपवास का संकल्प लेकर निराहार या फलाहार करके श्री कृष्ण का चिंतन वंदन करते नृत्य गीत भजन आदि सहित उत्साह पूर्वक दिन को व्यतीत करना चाहिए। जन्माष्टमी के दिन रात्रि जागरण का सर्वाधिक महत्व है। संपूर्ण दिन भगवान की कथा, विष्णु सहस्र नाम स्तोत्र का पाठ तथा श्रीमद् भागवत महापुराण के श्री कृष्ण अवतार की कथा आचार्य-ब्राह्मणो को बुला कर उनसे सुनना चाहिए।
आधी रात को किसी भी सिद्ध स्थल, मंदिर या घर पर ही भगवान श्री कृष्ण के बालरूप (लड्डू गोपाल) का षोडषोपचार पूजन किसी वैदिक विद्वान ब्राह्मण के सहयोग से या यथा शक्ति स्वयं करना चाहिए। इस तरह भक्ति पूर्वक आराधना करते हुए दिन व्यतीत करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में ऐसे मनाई जाती है जन्माष्टमी
भारत देश के हृदय प्रदेश छत्तीसगढ़ मे कृष्ण जन्माष्टमी को आठे कन्हैया के नाम से भी जाना जाता है। आठे कन्हैया अर्थात आठ कृष्ण। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों मे इस दिन घर के पूजा स्थल पर दीवार मे भगवान कृष्ण के आठ मुर्ती बनाकर उसकी पूजा करते है। आठ कृष्णो की पूजा के दो कारण हो सकते है। पहला यह कि भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को हुआ था। दूसरा यह कि कृष्ण को मिलाकर उनके भाइयों की संख्या आठ है।