Junior Doctors Strike : हड़ताल खत्म करें, नहीं तो खाली करें हॉस्टल

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर जेएनएम का नोटिस

रायपुर। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल डॉ भीमराव अंबेडकर 480 जूनियर डॉक्टर बीते 6 दिनों से हड़ताल पर है। जूनियर डॉक्टर्स की इस बे-मुद्दत हड़ताल में अब पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता ने हड़ताल खत्म नहीं करने पर कार्यवाही का फरमान जारी किया है। चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा जारी इस पत्र में लिखा गया है कि

” जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के आह्वाहन पर सभी पीजी विद्यार्थी, इंटर्न एवं एमबीबीएस विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर 28 जून 2019 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। जिससे चिकित्सालय में मरीजों के इलाज संबंधी सभी सेवाएं प्रभावित हो रहे है। मरीजों के हित को ध्यान में रखते हुए आप सभी को सूचित किया जाता है कि सभी विद्यार्थी, इंटर्न तत्काल अपनी उपस्थिति संबंधित विभागों में देना सुनिश्चित करें, अन्यथा आप के विरुद्ध निम्नलिखित कार्रवाई की जाएगी जिसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे :-
01 जो भी विद्यार्थी हड़ताल में है उनकी हड़ताल अवधि को अनुपस्थित मानते हुए उनकी शिक्षण अवधि में छह माह की वृद्धि की जाएगी।
02 जो पीजी विद्यार्थी हड़ताल में है, उन्हें 24 घंटे के भीतर छात्रावास खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी।
03 जो इंटर्न एवं एमबीबीएस विद्यार्थी हड़ताल में है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। “

कार्रवाई के फरमान वाला ये नोटिस अधिष्ठाता चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर हस्ताक्षर से जारी किया गया है। इसके बाद जूनियर डॉक्टरों में आक्रोश और बढ़ गया है।

10 में 9 मांगे पूरी फिर भी हड़ताल
इधर जूनियर डॉक्टर्स की 10 में से 9 मांगों को चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ एसएल आदिले ने अपने स्तर पर पूरी कर दिया था। इसमें डॉक्टरों की सुरक्षा, कॉलेज की कमेटियों में जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन का प्रतिनिधि समेत तमाम मांगे शामिल है। लेकिन जूनियर डॉक्टर जिस प्रमुख मांग को लेकर हड़ताल पर डटे हुए है वो है स्टायफंड। जुड़ो स्टायफंड पर सातवें वेतनमान लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर अडिग है। जिसे लेकर अब तक कोई भी फैसला शासन स्तर पर नहीं लिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक अगर स्टायफंड पर सातवां वेतनमान लागू होता है, तो फर्स्ट ईयर के पीजी छात्रों को 42 से 82 हज़ार, सेकंड ईयर के छात्रों को 45 से 85 हजार और फाइनल ईयर छात्रों को 47 से 87 हज़ार रुपए मिलेगा, जो एम्स के बराबर होगा। हालाँकि स्टायफंड के संबंध में फैसला मुख्यमंत्री को ही लेना है, जिस पर अब तक उनकी तरफ से कोई पहल नहीं की गई है।