कंकाली मठ : यहां रखे है माँ कंकाली के वस्त्र और अस्त-शस्त्र

दशहरे पर दर्शन के लिए खुला रायपुर का कंकाली मठ

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ब्राम्हण पारा इलाके में एक ऐसा मठ है जो केवल दशहरे के दिन ही खुलता है। ये मठ है माँ कंकाली का। इस मठ में माँ कंकाली के वस्त्र और अस्त्र शस्त्र रखे हुए है। इस ऐतिहासिक मठ की किवदंतियां भी सबसे अलग है जो इस मठ को एक मज़बूत आस्था और श्रद्धा का केंद्र बनाती है। माई कंकाली का ये शस्त्रागार भी कहा जाता है और दर्शनार्थी इसे दशहरा मंदिर के नाम से भी जानते है। ये मठ साल में केवल एक ही दिन यानी दशहरे की सुबह पहले पहर में पट खुलता है और दशहरे के दिन के आखरी पहर में पट बंद किया जाता है। इस दौरान दर्शनार्थियों की भारी भीड़ लगती है, लोग माँ कंकाली के अस्त्र-शस्त्र के दर्शन कर मत्था टेकते हैं।

                      इस मठ के जानकार बताते है कि ये मठ तक़रीबन 500 साल पुराना है। जहां पहले माता कंकाली की मूर्ति स्थापित थी, मंदिर के महंत कृपालगिरी पूर्वज को स्वप्न आया कि माता की स्थापना नज़दीक के तालाब (वर्तमान में कंकाली तालाब) के पास किया जाए। उसी के बाद उस तालाब का नाम कंकाली पड़ा। कंकाली मठ के महंत गजेन्द्र गिरी ने जानकारी देते हुए कहा कि आज दशहरा के दिन साल में एक बार कंकाली मठ के पट खुलते है, और शास्त्रों की पूजा अर्चना की जाती है। शास्त्रों में कहा गया कि माता की स्थापना तो मंदिर में कर दी गई पर माता के शस्त्र कंकाली मठ में रखे गए है। मान्यता यह है कि दशहरा के दिन मां कंकाली अपने मूल स्थान कंकाली मठ में आती है। जिस कारण साल में एक बार दशहरा पर्व पर कंकाली मठ के पट खुलते हैं।

भगवान राम को शस्त्र देने की किवदंती
कंकाली मठ के महंत गजेन्द्र गिरी ने बताया कि इस मठ और माता कंकाली को लेकर एक और किवदंती है कि भगवान राम और रावण का युद्ध हो रहा था, तब देवी कंकाली युद्ध के मैदान में प्रकट हुई थी और श्रीराम को शस्त्रो से सुसज्जित किया गया था। इसी मान्यता के चलते यहाँ रखे विभिन्न प्रकार के शस्त्रों का महत्व और भी बढ़ जाता है, और लोग इनके दर्शन मात्र के लिए दूर-दूर से आते हैं।

नागसाधुओं की है समाधी
मठ के महंत गजेन्द्र गिरी ने बताया कि कंकाली मठ का निर्माण नागा साधुओं के तांत्रिक साधना केंद्र के रूप में हुआ था। इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। यहां नागा साधुओं की समाधि है जिसे जिवंत बताया जाता है। महंत कृपाल गिरी ने कंकाली मंदिर का निर्माण करवाया था। 17 वीं शताब्दी के आस पास इस मंदिर मठ का निर्माण कराया गया था।