Rath Yatra : महाप्रभु के दर्शन को पहुचेंगी “नाराज़ माँ लक्ष्मी”

जगन्नाथ पूरी में मनाई जा रही यही हेरा पंचमी

पुरी। भगवान बलभद्र, महाप्रभु जगन्नाथ और देवी सुभद्रा अपने वार्षिक प्रवास मौसी माँ के घर यानी गुंडिचा मंदिर में है। आज रथ यात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमी मनाई जा रही है। आज यानी हेरा पंचमी के दिन देवी लक्ष्मी ने भगवान जगन्नाथ पर उन्हें श्रीमंदिर में अकेले छोड़ने और अपने भाई-बहनों के साथ अपनी मौसी माँ के निवास पर रहने के लिए नाराज होती है।

                 हेरा पंचमी के अनुष्ठान के अनुसार देवी बिमला से सलाह लेने के बाद, अपने अकेले पन से परेशान देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने के लिए बिमना (सुशोभित पालकी) में गुंडिचा मंदिर जाएंगी। वह अपने सेवकों द्वारा एक जुलूस की शक्ल में वहां पहुँचती है।
मंदिर पहुंचने के बाद माता लक्ष्मी की पालकी महाप्रभु जगन्नाथ के रथ नंदीघोष के पास रुकेगी। जहां उसका स्वागत पाटी महापात्र के सेवादारों द्वारा “बंदपना” के साथ किया जाएगा। जिसके बाद देवी लक्ष्मी को ‘जया बिजया द्वार’ के माध्यम से भगवान जगन्नाथ के पास ले जाया जाएगा, जहां उन्हें प्रभु की ओर से महापात्र सेवकों से एक ‘आज्ञा माला’ (सहमति की एक माला) प्राप्त होगी जो देवी को श्रीमंदिर में लौटने का आश्वासन देगी।

                 ये रस्म तीन दिन बाद निभाई जाएंगी। इस अनुष्ठान के अनुसार लौटते समय, वह अपने सेवादारों से नंदीघोष के एक हिस्से को तोड़ने के लिए कहेगी और बाद में गोकिरी साही मार्ग से नाकचाना द्वार से गुप्त रूप से श्रीमंदिर लौट आएगी।