RathYatra : रायपुर के 500 साल पुराने मंदिर से निकलेगे स्वामी जगन्नाथ

निभाई जाती है स्वामी जगन्नाथ जी के रथयात्रा की परंपररा

रायपुर। जगन्नाथ पूरी ही नहीं बल्कि राजधानी रायपुर में भी स्वामी जगन्नाथ पिछले पांच सौ सालों से भक्तों को दर्शन देने रथ से निकलते है। टुरी हटरी स्तिथ जगन्नाथ मंदिर में सालों से रथयात्रा निकाली जा रही है। इस साल भी रथयात्रा के लिए पूरे मंदिर परिसर को सजाया गया। वहीं भगवान के नगर भ्रमण के लिए मंदिर के तक़रीबन 100 साल पुराने रथ को तैयार किया जा चूका है। जिसमें भगवान जगन्नाथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नगर भ्रमण पर निकलेंगे। राजधानी के टुरी हटरी का ये मंदिर न सिर्फ ऐतिहासिक है बल्कि पौराणिक महत्व वाला भी है।

                     करीब 500 साल पहले ताहुतकार परिवार द्वारा टूरी हटरी में भगवान जगन्नाथ के मंदिर की स्थापना करवाई गई थी। ये मंदिर वैदिक रीती रिवाज़ों से बना हुआ है। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करते ही आँगन में एक तुलसी का वृक्ष है। जिसके साथ ही भगवान को भोग लगाया जाता है। इसी वृक्ष के तुलसी दल से भगवान के लिए माला भी बनाई जाती है।

               इस वैदिक मंदिर के दाहिने और रामभक्त हनुमान जी का मंदिर है। बताते है कि ये मंदिर भी वैदिक पूजापाठ के साथ स्थापित किया गया था। ये हनुमान जी यहाँ पहुंचने वाले भक्तो के संकट भी हारते है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में पहुंचने वाले दर्शनार्थियों के हर संकट का निवारण भगवान् हनुमान करते है। साथ ही मंदिर परिसर में भगवान शिव का भी मंदिर है। जगन्नाथ जी के गर्भ गृह के बाहर भगवान् विष्णु के सेवक जय और विजय की प्रतिमा भी है।

रायपुर का सबसे पुराना रथ
इतिहासकार बताते है कि शहर की सबसे पहली रथयात्रा टूरी हटरी से ही निकली थी। तब से आज तक यह परंपरा निभाई जा रही है। हर साल स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान का स्नान कराया जाता है। जिससे भगवान् की तबीयत बिगड़ जाती है।

लगभग दस दिनों तक भगवान् को जड़ी-बूटियों से बनी औषदि खिलाकर उन्हें स्वस्थ करने का रिवाज़ मंदिर के पुजारी पूरी तन्मयता निभाते है। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक काढ़ा पिलाया जाता है जिसके असर से भगवान् की तबीयत ठीक होती है और वे अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भरण को निकलते है। इस ऐतिहासिक रथ और भगवान् के पूजा अर्चना के लिए शहर भर के श्रद्धालु अपनी तैयारीया करते है।