संस्कृत से संस्कृति तक मिलती है इस शिविर मे शिक्षा

संस्कृत मानव जीवन के अभिन्न अंग की तरह है- डॉ अंजनी शुक्ल

रायपुर। शदाणी दरबार परिसर में चल रहे संस्कृतभारती छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण शिविर में आज पूर्व सहायक संचालक उच्च शिक्षा एवं विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. अंजनी शुक्ल मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित हुए। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि संस्कृत मानव जीवन में अभिन्न अंग की तरह है, जन्म से लेकर मरण तक संस्कृत का उपयोग देखने को मिलता है।

संस्कृतभारती छत्तीसगढ़                      जिस प्रकार कोई अंग की कमी होने से जीवन मे नीरस रहता है वैसे ही बिना संस्कृत के हमारा जीवन नीरस है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और जननी के बिना जीवन अधूरा है। आज पूरे विश्व मे संस्कृत के प्रति लगाव देखा जा रहा है, इसरो जैसे बड़े-बड़े संस्थानों में संस्कृत का प्रयोग किया जा रहा है। संस्कृत विषय में एम बी ए की पढ़ाई हो रही है, आईएएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं, धार्मिक पूजा पाठ में संस्कृत के उपयोग के अलावा अच्छे कैरियर के रूप में भी संस्कृत को अपनाया जा सकता है। सहायक प्रचार प्रमुख पंडित चंद्रभूषण शुक्ला ने बताया कि संस्कृतभारती की संस्था देश के तमाम राज्य में है जो कि हर वर्ष राज्य स्तरीय संस्कृत प्रशिक्षण शिविर लगाती है। संस्था का मुख्य उद्देश्य संस्कृत भाषा का पुनरूत्थान, संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार, संस्कृत के माध्यम से देश सेवा एवं संस्कृत को बोलचाल की भाषा बनाना है।

संस्कृतभारती छत्तीसगढ़संस्कृत में ही होती है बात
छत्तीसगढ़ संस्कृत भारती के सह प्रांतमंत्री डॉ. ददुभाई त्रिपाठी ने कहा कि मात्र 5-6 दिन के प्रशिक्षण में ही लगभग सारे प्रशिक्षण लेने वाले संस्कृत में बात करना प्रारंभ कर दिए हैं,यहाँ पूरा वातावरण संस्कृत का प्रदान किया जाता है, उठने, नित्यकर्म से लेकर खाने-पीने से लेकर पूरा दिनचर्या संस्कृत में ही सरल भाषा मे बोलना सिखाया जाता है।संस्कृतभारती ने बहुत ही सरल विधि तैयार किया है जिससे बहुत ही कम समय में संस्कृत में संभाषण सीख जाते हैं।

संस्कृत में कर चुके है पीएचडी
प्रान्त शिक्षण प्रमुख डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा एवं वर्ग अधिकारी डॉ. राजकुमार तिवारी ने बताया कि हम लोग स्वयं इस संगठन में ऐसे ही प्रशिक्षण लेने आये थे, बाद में संस्कृत को कैरियर के रूप में लिए फिर 2-4 बार और प्रशिक्षण लिए फिर संस्कृत में ही डिग्री की पढ़ाई कर आज पी एच डी भी कर लिए हैं और अच्छे जगहों पर संस्कृत शिक्षक के रूप में नौकरी कर रहे हैं।

40 वर्षों से कर रहा संस्कृत का प्रचार
संस्कृतभारती संगठन एक अखिलभारतीय संगठन है जो विगत 40 वर्षों से संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में कार्यरत है, जो कि आज तक लाखों लोगों को प्रशिक्षण दे चुकी है। कई लोग तो इतने पारंगत हो गए हैं कि संस्कृत प्रशिक्षण लेकर और संस्कृत में ही शास्त्री व आचार्य की डिग्री के बाद पी एच डी भी कर चुके हैं तथा अब वे खुद प्रशिक्षण दे रहे हैं। केवल भारत देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अधिकतर लोग संस्कृतभारती द्वारा प्रशिक्षण ले चुके हैं, विदेशों में प्रशिक्षण और संस्कृत में किये जा रहे कार्य हेतु संस्कृतभारती के प्रमुख चमुकृष्ण शास्त्री जी को भारत सरकार ने इस वर्ष पद्मश्री पुरुस्कार भी प्रदान किया है।