संसदीय सचिव : सुप्रीमकोर्ट ने माँगा सरकार और हाईकोर्ट से जवाब

नई दिल्ली / रायपुर। संसदीय सचिवों की नियुक्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार के साथ-साथ इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से भी मामले में जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय सचिवों के 70 लाख के अनुदान बांटे जाने के मुद्दे पर भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है। छत्तीसगढ़ में हमर संगवारी संस्था के प्रमुख और आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संसदीय सचिवों की नियुक्ति को चैलेंज करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर तीन जजों की बेंच में सुनवाई में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस डी चंद्रचूर और एके खांडवेल्कर शामिल थे। इस मामले में अब अगली सुनवाई गरमी छुट्टी के बाद होगी। कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर सभी पक्षों से ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।
इधर राकेश चौबे ने देशटीवी को बताया है कि संविधान में संसदीय सचिव का पद है ही नहीं, बावजूद नियुक्ति की गयी है। ये नियुक्तियाँ पूरी तरह अवैधानिक है, कई राज्यों ने इसे अवैध ठहराया और नियुक्ति निरस्त की गयी है। इन्ही सारे मुद्दों को उन्होंने संसदीय सचिव की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। राकेश चौबे ने कहा कि राज्य सरकार को नोटिस जारी किया गया है, हाईकोर्ट से भी जवाब मांगा गया है। गरमी की छुट्टी के बाद सभी को जवाब देने को आदेश दिया गया है।

ये है संसदीय सचिव
राज्य सरकार ने विधायक राजू सिंह क्षत्रिय, तोखन साहू, अंबेश जांगड़े, लखन लाल देवांगन, मोतीलाल चंद्रवंशी, लाभचंद बाफना, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा, सुनीति राठिया, चंपा देवी पावले और गोवर्धन सिंह मांझी को संसदीय सचिव बनाया है.