Exclusive : ओडिशा के ईंटभट्टे में फंसे छत्तीसगढ़ के 60 मजदूर

सभी महासमुंद जिले के, 7 माह से मजदूरी भी नहीं मिली

भुवनेश्वर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लाक के गांजर गांव के 60 मजदूर जिनमें एक दर्जन बच्चे हैं। ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के एक ईंट भट्टे में फंसे हुए हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें भट्ठा मालिक न तो पैसे दे रहा है और न ही उनके वापस भेजने का प्रबंध कर रहा है। उनका सब्र टूट रहा है।

इन मजदूरों ने अपने गांव के  पंच आनंद साहू को फोन पर इसकी जानकारी दी और गांव वापस लाने मदद की गुहार तो  पंच ने एसडीएम बागबहरा को आनलाइन आवेदन दिया। कार्रवाई न होने पर कलेक्टर महासमुंद से आनलाइन शिकायत की है।

इधर देश टीवी ने ओडिशा के इस दुर्गाभट्टी तिरतोल ईंटभट्टे पर रहने वाले दो मजदूरों ईश्वर धोबी और लखन बरिहा का मोबाइल नंबर जुटाया और संपर्क किया।

ईश्वर धोबी के मोबाइल पर जब संपर्क किया गया तो उसके बेटे 21 साल के लालजी ने फोन उठाया और हालात की जानकारी दी। उसने बताया कि उसके पिता और लखन बाहर गए हुए हैं।

बताया गया कि 7 महीने पहले वे इस ईंट भट्टे में काम करने आए हैं। ओडिशा के नुआपड़ा जिले के टेमरीमाल माडूसिल्ली निवासी गोकुल बेहरा नामक दलाल के जरिए वे यहां आए हैं।

लालजी का कहना था कि 60 मजदूरों में से करीब एक दर्जन छोटे-छोटे बच्चे हैं। वह अपने माता-पिता और बहन के साथ काम करता है।

7 महीने से मजदूरी नहीं दी गई है भट्ठा मालिक बस हफ्ते में खाने के लायक पैसे देता रहा है। हमने जब वापिस जाने की बात कही तो वह भेजने के लिए टालता रहा। 2 तारीख से  टालते –टालते अब 31 मई को हिसाब करने की बात कहता है। उसके टाल मटोल के कारण उन्हें लगता नहीं है कि वह हमारी मजदूरी देगा। वे किसी भी तरह अब घर पहुंचना चाहते हैं। पर वह जाने नहीं दे रहा है।

ईंटभट्टे से लालजी साहू ने अपने  वीडियो हम तक भेजा और तस्वीरें भी। जिनमें मजदूर साफ बता रहे हैं कि मजदूरी नहीं दी गई है। मालिक झूठ बोल रहा है। यहां से हमें जाने नहीं दे रहा है।

इधर गांजर के पंच आनंद साहू ने बताया कि उनके गांव से 40 से ज्यादा मजदूर हैं जो वहां फंसे हुए हैं। वे इन मजदूरों की हालत की शिकायत एसडीएम और कलेक्टर  से की है। इसके अलावा सीएम भूपेश बघेल और सीएम नवीन पटनायक को भी ट्वीट किया है।

मजदूर दलाल गोकुल बेहरा से सपंर्क किया गया तो दिया गया नंबर गलत निकला।

देश टीवी ने जब ईंट भट्ठे के मालिक विजय कुमार नाथ से बात की तो उसका कहना था कि उसने सबका हिसाब कर दिया है सबको मजदूरी दे दी है। ये मजदूर हर बरस गत सात साल से यहां आकर काम करते हैं।

लाकडाउन और फिर चक्रवात के कारण उन्हें  भेजा नहीं जा सका है। चूंकि इतने लोगों को एक साथ नहीं भेजा जा सकता इसलिए वे कुछ मजदूरों को ट्रेन से और कुछ को बस से भेजेंगे। वे उनके गांव तक सकुशल उन्हें पहुंचाएंगे। 28 मई को एक बस उन्हें लेकर जाएगी।

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