नहीं रहे ” अटल… ” कल विजय घाट में किया जाएगा अंतिम संस्कार

अटल बिहारी वाजपेयी ने ली 5 बजकर 5 मिनट में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली / रायपुर। गंभीर अवस्था में एम्स में भर्ती  ने एम्स में अपनी अंतिम सांस ली। 93 साल के अटल बिहारी वाजपेयी ने ली 5 बजकर 5 मिनट में ली अंतिम सांस ली है। उनका अंतिम संस्कार कल सुबह विजय घाट पर किया जाएगा। इसकी व्यवस्था की जा रही है।

 

Vajpayee

गौरतलब है कि उनके परिजनों को आज दोपहर ही ग्वालियर से दिल्ली बुलवा लिया गया था। जिसके बाद उनकी मुलाकात अटल जी से कराई गई थी। मिली जानकारी के मुताबिक कल सुबह अटल जी का पार्थिव शरीर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। जिसके बाद उनके पार्थिव देह का अंतिम संस्कार दिल्ली विजय घाट में किया जाएगा।

यादें : जब तड़के सुबह हुई थी कवर्धा में अटल बिहारी वाजपेयी की सभा…

देशभर समेत छत्तीसगढ़ में शोक की लहर
छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता अटल बिहारी के निधन में जहाँ पूरा देश सदमे में है, वहीं छत्तीसगढ़ भी शोक संतिप्त है। राज्य निर्माण से लेकर यहां के विकास में उनका खासा योगदान रहा है। उनकी मौत पर जहाँ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समेत भाजपा के तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

Atal Bihari Vajpayee

 

कवर्धा में अल सुबह ली थी सभा
मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने उनसे जुडी यादों को साझा करते हुए कहा कि जब मैं युवा मोर्चा में था, तब मुझे उनकी एक सभा कवर्धा में कराने की ज़िम्मेदारी मिली थी। अटल जी और आरिफ बेग साहब जबलपुर जा रहे थे। तब तड़के सुबह 7 बजे उनकी सभा मैंने कवर्धा में कराई थी। मेरे जीवन का वो पहला दौर था, जब मैंने उन्हें करीब से जाना। इतने बड़े नेता को समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि विशाल ह्रदय और व्यक्तित्व के धनी अटल जी के साथ उनके मंत्रिमंडल में उन्होंने मुझे राज्यमंत्री का दर्ज़ा मिला। पुरे देश को एक सूत्र में बांधने की कला उनके भीतर है। पक्ष विपक्ष सभी को गले लगाकर साथ चलने वाले प्रधानमंत्री रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जातिगत राजनीति की भावना से परे मानव हित की भावना उनके भीतर है। मैं मानता हूँ इस देश की राजनीति में ऐसा कोई नेता नहीं हुआ जो लगातार 50 साल लोकप्रियता के शिखर में रहे। फिर छाले वो पक्ष विपक्ष की बात हो या फिर जनता की।