अयोध्या मामला : अदालत में ज़िरह पूरी, अब फैसले का इंतज़ार

मामलें में SC 6 अगस्त से प्रतिदिन कर रहा था सुनवाई

नई दिल्ली। अयोध्या में दशकों पुराने मंदिर-मस्जिद विवाद की दैनिक सुनवाई 40 दिनों के बाद आज सुप्रीम कोर्ट में समाप्त हो गई। इस मामले में फैसला फिलहाल कोर्ट ने सुरक्षित रखा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 17 नवंबर से पहले इस फैसले को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। इस मामलें में सुनवाई सुनवाई करने वाली भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई समेत पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने की है। जिसमें से सीजेआई रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। सुनवाई के अंतिम दिन, मुस्लिम याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कोर्ट में नाटकीय ढंग से एक नक्शें को दाफ दिया जिसमें राम जन्मभूमि का जिक्र था। अधिवक्ता राजीव धवन ने सुन्नी वक्फ बोर्ड सहित मुस्लिम याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए अदालत की अनुमति के बाद राम जन्म स्थान वाले एक नक्शे को फाड़ दिया। जिसके बाद अदालती कार्यवाही में गहमा गहमी का माहौल बन गया। इस हंगामे के कारण और दोनों पक्षों के व्यवधानों के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने बाहर चले जाने की बात कही।

                  पांच-न्यायाधीशों के संविधान ने 6 अगस्त को दिन-प्रतिदिन की कार्यवाही शुरू की, मध्यस्थता की कार्यवाही विवाद का एक सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने में विफल रही। सप्ताह भर के दशहरे के अवकाश के बाद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक सुनवाई फिर से शुरू कर दी। 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में चौदह अपील दायर की गई हैं कि अयोध्या में 2.77 एकड़ जमीन को तीन पक्षों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाए – सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला।

कई हिंदुओं का मानना ​​है कि भूमि भगवान राम की जन्मभूमि थी और एक प्राचीन मंदिर के खंडहर पर एक मस्जिद बनाई गई थी। 16 वीं सदी में बाबरी मस्जिद दिसंबर 1992 में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा चकित कर दी गई थी। मस्जिद के विनाश ने देश में दंगे भड़का दिए। कई मध्यस्थता प्रयास दशकों पुराने विवाद के समाधान का उत्पादन करने में विफल रहे है।