अयोध्या मामला : “शोधपरक ग्रन्थ” सौपने पर कोर्ट में गहमा गहमी

अयोध्या मामलें में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज आखरी दिन

नई दिल्ली। अयोध्या में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में दैनिक सुनवाई आज शाम 5 बजे ख़त्म हो जाएगी। आज की सुनवाई शुरू करने से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने एक वकील की दलील देने के लिए वक़्त मांगने पर कहा कि “हम सभी शाम 5 बजे तक बैठ जाएंगे।”
इधर अयोध्या मध्यस्थता पैनल आज मध्यस्थता के दूसरे दौर में अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर सकती है। अयोध्या मामलें पर इस दफ़े उम्मीद है कि वो 17 नवंबर तक अपना फैसला सुना सकते है। दरअसल भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर्ड होने वाले है लिहाज़ा ये क़यास लगाए जा रहे है कि अपना पद छोड़ने से पहले गोगोई 134 साल पुराने इस केस में फैसला सुना सकते है।


गौरतलब है कि मंगलवार को वरिष्ठ वकील के.पराशरन ने राम लल्ला की ओर से अदालती कार्यवाही में ज़िरह करते हुए कहा कि हिंदू सदियों से राम जन्मभूमि के लिए लड़ रहे है, और यह तर्क दिया कि मुसलमान किसी भी मस्जिद में प्रार्थना कर सकते थे। इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए पूर्व एडवोकेट जनरल पराशरन ने कहा कि “मुसलमान किसी भी अन्य मस्जिद में भी नमाज़ कर सकते हैं। अयोध्या में 55-60 मस्जिदें हैं। लेकिन हिंदुओं के लिए, यह भगवान राम की जन्मभूमि है, और हम जन्मस्थान नहीं बदल सकते।” फिलहाल इस मामलें में सुनवाई जारी है।

                          सुप्रीम कोर्ट में ऑल इंडिया हिन्दू महासभा की ओर से विकास सिंह ने एडिशनल डॉक्यूमेंट के तौर पर पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल की ओर से शोधपरक ग्रन्थ बेंच को दिया गया। इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने ज़ोरदार आपत्ति जताई है। राजीव धवन ने कहा कि इसे ऑन रिकॉर्ड ना लिया जाए, ये बिल्कुल नई चीज है। कोर्ट इसे वापस कर दें, इसपर अदालत की ओर से कहा गया कि ये किताब वो बाद में पढ़ेंगे। इसी के साथ किताब वापस दे दी गई है। हिंदू महासभा की ओर से विकास सिंह ने अब बहस शुरू कर दी है। जब विकास सिंह ने किताब दी तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि क्या वह इसे रख सकके हैं ? मैं इसे बाद में पढ़ूंगा। राजीव धवन के विरोध पर हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने कहा कि कोर्ट ने किसी नए कागजातों को लाने पर मनाही की है, लेकिन कोई पार्टी किसी तरह का सबूत या किताब दे सकती है।