Bahuda Yatra : मौसी के घर से कल श्रीमंदिर जाएंगे महाप्रभु

महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा लौटेंगे घर

पुरी। महाप्रभु स्वामी जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा कल अपने मौसी के घर से वापस लौटेंगे। त्रिमूर्ति कल गुंडिचा मंदिर से वापस अपने अपने रथों में सवार होकर श्रीमंदिर लौटेंगे। इससे पहले गुंडिचा मंदिर में भी कल सुबह से ही पूजापाठ और विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे।


शुक्रवार यानी कल महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा के साथ अपने जन्म वेदी से रत्न वेदी के लिए रवाना होंगे। जिसे बाहुड़ा यात्रा के नाम से जाना जाता है। रथयात्रा की तरह ही बाहुड़ा यात्रा में भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु महाप्रभु के दर्शन मात्र के लिए ओडिशा के पुरी में पहुंचते है। मौसी मां के मंदिर गुंडीचा मंदिर से 7 दिनों के विश्राम के बाद महाप्रभु जगन्नाथ भाई बलभद्र देवी सुभद्रा और सुदर्शन के साथ ” बीजे पहांड़ी ” संपन्न होने के बाद रथ की ओर प्रस्थान करेंगे। रथ में त्रिमूर्ति के विराजमान होने के बाद “पुरी के राजा गजपति महाराज” छेरा पहरा की रस्म अदा करेंगे। जिसके बाद गुंडिचा मंदिर से त्रिमूर्ति को उनके रथ से श्रीमंदिर की ओर निकलेंगे। इस दौरान त्रिमूर्ति के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर से लेकर श्रीमंदिर तक जमा होते है।

क्या है गुंडिचा मंदिर का महत्व
कलिंग वास्तुकला में बने गुंडिचा मंदिर को स्वामी जगन्नाथ की जन्मवेदी कहा जाता है। इस मंदिर के गुंब्बद पर भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र बना है। इसे भगवान के मौसी का घर भी कहा जाता है। स्वामी जगन्नाथ के श्रीमंदिर से इस मंदिर की दुरी तक़रीबन 3 किलोमीटर है। अपने जन्मवेदी में स्वामी जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने के बाद 7 दिनों तक विश्राम करते है। इस मंदिर में दो प्रमुख द्वार है जिसमे रथयात्रा से आने के बाद महाप्रभु मंदिर के पश्चिमी द्वार से मंदिर प्रांगण में प्रवेश करते है। वहीं श्रीमंदिर वापस लौटने के लिए स्वामी जगरनाथ पूर्वी दरवाजे से बाहर निकलते है।