बैंक हड़ताल : दीपावली से ठीक पहले हड़ताल का बाजार पर दिखा असर

देशभर में दो बैंक यूनियनों ने बुलाई हड़ताल

रायपुर। बैंक इंप्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और एटक ने आज देशव्यापी बैंक हड़ताल किया। जिसमें युनियन से जुड़े सभी बैंक के लिपिकिय कर्मियों ने आंदोलन का भरपुर समर्थन भी किया। देशभर के साथ साथ राजधानी रायपुर में भी बैंक इंप्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और एटक के आह्वान पर सभी बैंक के कर्मी सुबह इकट्ठे होकर केन्द्र सरकार के भेदभाव पूर्ण रवैये पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया है। आपको बता दें कि 10 सरकारी बैंकों का विलय कर 4 बड़े बैंक बनाने के विरोध में ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉइज एसोसिएशन ने ये विरोध जताया है। सितंबर माह मे भी यूनियन ने बैंक हड़ताल करने की चेतावनी दी थी लेकिन सरकार के आश्वासन के बाद इसे स्थगित किया गया था, लेकिन पुरे एक माह बीत जाने के बाद भी जब केन्द्र सरकार ने इस बात पर कोई संज्ञान नही लिया तो आज बैंक इंप्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने एक दिवसीय प्रदर्शन कर केन्द्र सरकार के खिलाफ लामबंद हुए। हालाकि बैंको के हड़ताल से उपभोक्ताओं को कैश, डिपॉजिट, निकासी संबंधी जरूरतों में काफी परेशानी उठानी पड़ी।


आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते अगस्त माह में 10 सरकारी बैंकों के महाविलय प्लान की घोषणा की थी। जिसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या मौजूदा 27 से घटकर 12 रह गई। इसके तहत पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का, केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आंध्रा बैंक व कॉरपोरेशन बैंक का और इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का मर्ज होना तय है। निर्मला सीतरामण की माने तो आने वाले 5 साल में देश को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन बैंकों का होना जरूरी है।

पहले भी हुआ विलय पर नहीं मिला परिणाम
इधर आंदोलन क बाद युनियन के पदाधिकरियों का कहना है कि छह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बैंकों को बंद करना सरकार का दुर्भाग्यपूर्ण और अनपेक्षित निर्णय है। ये अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंक हैं और देश के आर्थिक विकास में उल्लेखनीय योगदान भी इन बैंको ने दिया है। युनियन ये भी कहना है कि इसके पहले भी बैंकों का विलय किया गया था लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नही दिखाई दिया। यह बैंकों के विलय के प्रयोग करने का समय नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था निचे गिरी हुइ है ऐसे मे ये समय बैंकों के विलय के लिए कदापी सही नही है।

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन रहा सहारा
देशव्यापी बैंक हड़ताल के चलते करोडों रूपए के नुकसान का अंदेशा अर्थशास्त्री जता रहे है। खासकर दिपावली से ठीक पहले हुए इस बंद का असर व्यापार पर भी काफी पड़ा। ऐसे मे बिगड़ते अर्थव्यवस्था पर आज की ये हड़ताल दुष्प्रभावी माना जा रहा है, लेकिन डिजिटल युग में बैंको द्वारा दी गई ऑनलाइन सुविधा के चलते हड़ताल का प्रभाव कुछ हद तक कम हुआ है। वहीं एसबीआई के भी कर्मचारियों ने भी इस हड़ताल से दुरी बनाए रखी थी।