अब डाक्टर भी करेंगे ओझागिरी

बनारस विश्विवद्यालय ने तैयार किया पाठ्यक्रम

नई दिल्ली। अब डाक्टर भी सीखेंगे तांत्रिक विद्या। जिस तरह से बैगा गुनिया, ओझा लोगों का इलाज करते हैं। उसी अंदाज में ये डाक्टर प्रशिक्षण लेंगे और करेंगे मरीजों का इलाज। बनारस हिंदू विश्विवद्यालय ने डाक्टरों के लिए 6 माह का पाठ्यक्रम तैयार किया है।

भारत में भूत-प्रेत को अंधविश्वास माना गया है। जब भूत-प्रेत से जूड़ी कोई बात सामने आती है, तो लोग उसे अंधविश्वास या उसका प्रचार करने वाले को मानसिक रूप से पीड़ित बताते हैं। यहां तक कि छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड आदि कुछ राज्यों के पिछड़े इलाकों में तांत्रिक विद्या या जादू-टोने से इलाज करने वाले कई मिल जाएंगे। इस विद्या के प्रयोग से या इसे प्रयोग करने वाले लोगों की मौत होने की घटनाएं भी सामने आई हैं जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है।

अब जहां छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड में एक्ट पारितकर इससे पीड़ित लोगों को कानूनी सहायता दी जा रही है, वहीं अब भूतों की दुनिया, अलौकिक या अप्राकृतिक रूप से रहस्यमयी दुनिया की हैरतअंगेज बातों को जानने के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में ‘भूत विद्या’ या ‘साइंस ऑफ पैरानॉर्मल’ के अध्ययन की व्यवस्था करायी जा रही है। इस विषय पर छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू कराया जा रहा है।

भूत विद्या एक मनोचिकित्सा है और छह महीने के सर्टिफिकेट कोर्स में, चिकित्सकों को मनोचिकित्सा संबंधी विकारों और असामान्य कारणों से होने वाली असामान्य मनोवैज्ञानिक स्थितियों के इलाज के लिए उपचार और मनोचिकित्सा के बारे में सिखाया जाएगा, जिसे कई लोग भूत की वजह से होना मानते हैं।

जनवरी से पहले बैच की कक्षा शुरू होगी और आयुर्वेद संकाय द्वारा संचालित की जाएगी। यह पाठ्यक्रम बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) और बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) डिग्री धारकों के लिए तैयार किया गया है जो ‘भूत’ के कारण होने वाले मानसिक विकारों और बीमारियों का उपचार करेंगे।

इस आयुर्वेद शाखा के लिए छह महीने पहले एक अलग इकाई स्थापित करने के प्रयास शुरू हुए थे। संकाय में सभी 16 विभागों के प्रमुखों की बैठक के बाद इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया गया था. फिर यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद को भेजा गया, जिसने अष्टांग आयुर्वेद की बुनियादी शाखाओं में से एक पर एक अलग इकाई और एक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम को मंजूरी दी।