Big News : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा घटी

एसपीजी नहीं z+ सिक्योरिटी घेरे में रहेंगे मनमोहन सिंह

नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से Special Protection Group यानी SPG की सुरक्षा वापस ले ली गई है। अब उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौपी गई है। गृह मंत्रालय ने ये फैसला सभी एजेंसियों के इनपुट का एक नियमित मूल्यांकन के बाद लिया है। सूत्रों का कहना है कि मनमोहन सिंह के सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक वार्षिक समीक्षा की गई।

जिसमें उन्हें सीआरपीएफ के पर्याप्त संसाधनों के साथ महफूज़ रखने पर सहमति बनी। अब देश की सबसे संरक्षित राजनेताओं की रक्षा के लिए तैनात एसपीजी अब केवल चार लोगो को सुरक्षा देगी। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा का जिम्मा लिया है।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “वर्तमान सुरक्षा कवर समीक्षा की गई है जो संबंधित व्यक्ति, समेत कई अहम बिंदुओं पर हुई है। ये समीक्षा विशुद्ध रूप से सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पेशेवर मूल्यांकन पर आधारित है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि डॉ मनमोहन सिंह के पास Z + सुरक्षा कवर यथावत जारी है।”

पहले भी वापस ली गई थी सुरक्षा
मनमोहन सिंह पहले ऐसे पीएम नहीं है जिनकी सुरक्षा हटाई गई है। उनके पहले पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा और वीपी सिंह से भी दो दशक पहले इसी तरह की सुरक्षा वापस ले ली गई थी। पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो अपनी बीमारी के कारण पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे थे, 2018 में उनके स्वर्गवास तक उन्हें एसपीजी कवर दिया था। हालाँकि साल 2014 के चुनाव के दौरान मिली हर के बाद ही मनमोहन सिंह की बेटियों ने अपनी एसपीजी सुरक्षा लौटा दी थी।

इंदिरा की मौत के बाद हुआ था गठन
एसपीजी की स्थापना 1985 में विशेष रूप से प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा के लिए की गई थी। इंदिरा गांधी की हत्या के उनके सुरक्षा गार्डों द्वारा की गई थी। जिसके बाद इसका गतह्ण किया गया। वर्तमान में एसपीजी के पास 3,000 से अधिक कर्मचारी हैं। खतरे की आशंका के आधार पर, विशेष समूह प्रधानमंत्री के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवारों को भी शामिल एसपीजी की सुरक्षा श्रेणी में रखा जाता है। 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद, 10 साल के लिए पूर्व पीएम और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एसपीजी अधिनियम में संशोधन किया गया था। 2003 में, वाजपेयी सरकार ने केंद्र द्वारा तय किए गए खतरे के स्तर के आधार पर 10 साल के लिए स्वत: संरक्षण को एक वर्ष के लिए या उससे अधिक लाने के लिए फिर से कानून में संशोधन किया।