CWC Meeting : कांग्रेस का नया कप्तान होगा कौन ? मंथन शुरू

वासनिक,सिंधिया और पायलट का नाम दौड़ में सबसे आगे

नई दिल्ली |कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद पिछले दो माह से खाली पड़ा हुआ है। जिसके चलते कांग्रेस के द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कोई निर्णय लेना दूभर हो रहा है। इसी वजग से पार्टी के कद्दावर नेता इस पर लगातार चिंता जाता रहे है कि पार्टी बिना कप्तान के कोई काम को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। साथ ही दीगर दलों की तिरछी नजर भी कांग्रेस पर है। ऐसे में अब आज दिल्ली में ही कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक शुरू हो गई है। जिसमें कांग्रेस के नए कप्तान पर फैसला लेने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। दिल्ली की बैठक में शामिल होने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत,मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल भी पहुंच गए हैं।


अध्यक्ष की दौड़ में कई नाम शामिल
नेतृत्वविहीन पार्टी को नुकसान से बचने आज राष्ट्रीय अध्यक्ष पर एक रायशुमारी पर मुहर लग सकता है। कांग्रेस पदाधिकारी एक बार फिर राहुल गाँधी को मानाने की लोशिश में लगे हैं की राहुल इस पद पर रहकर अपना काम जारी रखे। लेकिन राहुल मानने को तैयार नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में दूसरे नाम पर विचार कर उन्हें ही कार्यभार सौपना ही अब लाजमी होगा। शशि थरूर और कर्ण सिंह जैसे पार्टी के दिग्गज नेताओं द्वारा चिंता जताने के बाद आज CWC की बैठक आहूत की गई है। हालाँकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे ज्यादा युवा वर्ग को तवज्जो दिए जाने की बात सामने आ रही है। जिसमे गाँधी परिवार से हटकर लेकिन उस परिवार के करीब मने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया,सचिन पायलट और मुकुल वासनिक का नाम सबसे ऊपर है। इस दौड़ में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ का नाम भी मौजूद है। आज की बैठक में थोड़े ही देर में अंतिम फैसले पर मुहर लगने की नजर सबकी टिकी हुई है। दरअसल इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अध्यक्ष के बारे में फैसले के बाद ही कांग्रेस की अगली दिशा तय हो पाएगी।

देश की वास्तविक हालात पर भी मंथन
आज के बैठक में अनुच्छेद 370 और 35 ए को कश्मीर से हटाए जाने को लेकर मंथन होना भी तय मन जा रहा है। राजयसभा और लोकसभा में भी कांग्रेस ने इस धारा का पुरजोर विरोध किया था। जिसे लेकर आज भी कांग्रेस विरोध का रुख अपनाइ हुई है। आज की बैठक में कश्मीर में शांति बहाली के साथ केंद्रशासित का मिले दर्जा पर भी गंभीर मंथन के आसार दिखाई दे रहे हैं।